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Basti News: 159 साल पुराने अंग्रेजों के जर्जर घुड़साल में मुख्तारखाना
Fri, 06 Sep 2024 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 06 Sep 2024 11:31 PM IST
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कलक्ट्रेट परिसर में तहसील भवन के करीब बने मुख्तारखाना का नहीं हो सका जीर्णोद्धार
भवन में था अंग्रेजों का अस्तबल, फिर बना मुख्तारखाना, अब बन गया वकीलों का ठिकाना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कलक्ट्रेट परिसर में तहसील भवन के पास स्थित मुख्तारखाना का भवन 159 साल की उम्र पार कर चुका है। बावजूद इसके जीर्णोद्धार के लिए प्रशासन ने अब तक कोई पहल नहीं किया है। इससे यहां अपना चैंबर बना चुके वकीलों व वादकारियों के लिए यह भवन कभी भी खतरा बन सकता है।
कचहरी परिसर स्थित मुख्तारखाना के नाम से मशहूर यह भवन 1865 में अंग्रेजी हुकूमत ने बनवाया था। यहां अंग्रेज अफसरों व कर्मचारियों के लिए घोड़ों को रखा जाता था, ताकि वह क्षेत्र में भ्रमण कर प्रशासनिक निगरानी व कार्रवाई कर सकें। देश की आजादी के बाद यह मुख्तारखाना के नाम से मशहूर हो गया। जहां वकील व मुख्तार अपना कामकाज निपटाने लगे। अब यह जनपद बार एसोसिएशन का प्रमुख अंग बन चुका है। यहां करीब 250 वकीलों ने अपना चैंबर बना रखा है। जहां दिनभर वकीलों व वादकारियों की भीड़ रहती है।
159 साल पहले निर्मित इस भवन की छत जर्जर हो चुकी है। दीवारें भी बेदम हो चुकी हैं। बाहर से इसकी रंगाई-पुताई हो जाती है, लेकिन मजबूती के नाम यहां कुछ भी नहीं किया गया। यह भवन कभी भी जानमाल का खतरा बन सकता है। अधिवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव, जवाहर लाल, प्रेमकुमार, सुशील पांडेय व विवेकानंद ने बताया कि बारिश के दौरान यहां रुकना मुश्किल हो जाता है। यदि इस भवन का नवीनीकरण नहीं कराया गया तो यह कभी भी जानलेवा बन सकता है।
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कोट
मुख्तारखाने के भवन का परीक्षण करवाया जाएगा। आवश्यकतानुसार प्रस्ताव तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा, ताकि वकीलों व वादकारियों के लिए बेहतर इंतजाम किया जा सके।
- शत्रुध्न पाठक, एसडीएम सदर, बस्ती
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भवन में था अंग्रेजों का अस्तबल, फिर बना मुख्तारखाना, अब बन गया वकीलों का ठिकाना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कलक्ट्रेट परिसर में तहसील भवन के पास स्थित मुख्तारखाना का भवन 159 साल की उम्र पार कर चुका है। बावजूद इसके जीर्णोद्धार के लिए प्रशासन ने अब तक कोई पहल नहीं किया है। इससे यहां अपना चैंबर बना चुके वकीलों व वादकारियों के लिए यह भवन कभी भी खतरा बन सकता है।
कचहरी परिसर स्थित मुख्तारखाना के नाम से मशहूर यह भवन 1865 में अंग्रेजी हुकूमत ने बनवाया था। यहां अंग्रेज अफसरों व कर्मचारियों के लिए घोड़ों को रखा जाता था, ताकि वह क्षेत्र में भ्रमण कर प्रशासनिक निगरानी व कार्रवाई कर सकें। देश की आजादी के बाद यह मुख्तारखाना के नाम से मशहूर हो गया। जहां वकील व मुख्तार अपना कामकाज निपटाने लगे। अब यह जनपद बार एसोसिएशन का प्रमुख अंग बन चुका है। यहां करीब 250 वकीलों ने अपना चैंबर बना रखा है। जहां दिनभर वकीलों व वादकारियों की भीड़ रहती है।
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159 साल पहले निर्मित इस भवन की छत जर्जर हो चुकी है। दीवारें भी बेदम हो चुकी हैं। बाहर से इसकी रंगाई-पुताई हो जाती है, लेकिन मजबूती के नाम यहां कुछ भी नहीं किया गया। यह भवन कभी भी जानमाल का खतरा बन सकता है। अधिवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव, जवाहर लाल, प्रेमकुमार, सुशील पांडेय व विवेकानंद ने बताया कि बारिश के दौरान यहां रुकना मुश्किल हो जाता है। यदि इस भवन का नवीनीकरण नहीं कराया गया तो यह कभी भी जानलेवा बन सकता है।
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मुख्तारखाने के भवन का परीक्षण करवाया जाएगा। आवश्यकतानुसार प्रस्ताव तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा, ताकि वकीलों व वादकारियों के लिए बेहतर इंतजाम किया जा सके।
- शत्रुध्न पाठक, एसडीएम सदर, बस्ती