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सांसद, डीएम ने संचारी रोग नियंत्रण अभियान का किया आगाज
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जिला अस्पताल में सांसद हरीश द्विवेदी और डीएम प्रियंका निरंजन ने संचारी रोग नियंत्रण अभियान का क
- फोटो : BASTI
सांसद, डीएम ने संचारी रोग नियंत्रण अभियान का किया आगाज
बस्ती। एक माह तक चलने वाले विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह की शुरुआत शनिवार से हुई। अभियान का शुभारंभ सांसद हरीश द्विवेदी व डीएम प्रियंका निरंजन ने जागरूकता वाहन रैली को हरी झंडी दिखाकर किया। डीएम ने मौजूद लोगों को शपथ दिलाई।
इस अभियान में स्वास्थ्य सहित 12 विभाग मिलकर काम करेंगे। जिले के हाई रिस्क गांव पर टीम की विशेष नजर होगी। स्वच्छता अभियान चलाने के साथ ही लोगों को मच्छर, चूहा, छछूंदर से फैलने वाले रोग के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरपी मिश्र ने बताया कि अभियान के दौरान नालियों और झाड़ियों की सफाई, मच्छरों पर नियंत्रण, सुअरबाड़ों और पशुबाड़ों की स्वच्छता की जानकारी, बुखार के रोगियों को चिह्नित कर जांच व उपचार, स्वच्छ पेयजल के विषय में जनजागरुकता, क्लोरिन की गोलियों का वितरण, कुपोषित बच्चों की पहचान व संदर्भन, स्कूली बच्चों में संचारी रोगों के प्रति जागरुकता की गतिविधियां संचालित की जानी हैं। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार का बुखार हो तो तत्काल अस्पताल में दिखाएं। मरीज को अस्पताल तक ले जाने के लिए 108 नंबर की एंबुलेंस सेवा का इस्तेमाल करें।
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इन विभागों को मिली है अभियान की जिम्मेदारी
डीएम ने बताया कि अभियान में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, आईसीडीएस, ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग, शिक्षा विभाग, नगर निगम अथवा शहरी विकास, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, दिव्यांग कल्याण, स्वच्छ भारत मिशन, सूचना विभाग, संस्कृति विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ज्यादा जोखिम वाले गांवों पर होगी विशेष नजर
ज्यादा जोखिम वाले गांवों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी। ये ऐसे गांव हैं जहां कभी दिमागी बुखार से मृत्यु हुई है, अथवा तीन साल के भीतर कोई केस सामने आया है। ऐसे गांवों में सभी विभाग प्राथमिकता के साथ अपनी भूमिका निभाएंगे। अभियान के दौरान सहयोगी संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) और पॉथ की विशेष भूमिका रहेगी।
अभियान के मिल रहे हैं अच्छे परिणाम
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। डीएम ने बताया कि वर्ष 2018 में 26 गांव हाई रिस्क में रहे हैं, जिनकी संख्या लगातार कम हो रही है। वर्ष 2019 में 14, वर्ष 2020 में 12 हो गई। इस समय छह गांव हाई रिस्क वाले हैं। इन पर नजर रखी जा रही है। जिले में एईएस/जेई से होने वाली जनहानि में भी काफी कमी देखी जा रही है।
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बस्ती। एक माह तक चलने वाले विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह की शुरुआत शनिवार से हुई। अभियान का शुभारंभ सांसद हरीश द्विवेदी व डीएम प्रियंका निरंजन ने जागरूकता वाहन रैली को हरी झंडी दिखाकर किया। डीएम ने मौजूद लोगों को शपथ दिलाई।
इस अभियान में स्वास्थ्य सहित 12 विभाग मिलकर काम करेंगे। जिले के हाई रिस्क गांव पर टीम की विशेष नजर होगी। स्वच्छता अभियान चलाने के साथ ही लोगों को मच्छर, चूहा, छछूंदर से फैलने वाले रोग के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरपी मिश्र ने बताया कि अभियान के दौरान नालियों और झाड़ियों की सफाई, मच्छरों पर नियंत्रण, सुअरबाड़ों और पशुबाड़ों की स्वच्छता की जानकारी, बुखार के रोगियों को चिह्नित कर जांच व उपचार, स्वच्छ पेयजल के विषय में जनजागरुकता, क्लोरिन की गोलियों का वितरण, कुपोषित बच्चों की पहचान व संदर्भन, स्कूली बच्चों में संचारी रोगों के प्रति जागरुकता की गतिविधियां संचालित की जानी हैं। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार का बुखार हो तो तत्काल अस्पताल में दिखाएं। मरीज को अस्पताल तक ले जाने के लिए 108 नंबर की एंबुलेंस सेवा का इस्तेमाल करें।
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इन विभागों को मिली है अभियान की जिम्मेदारी
डीएम ने बताया कि अभियान में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, आईसीडीएस, ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग, शिक्षा विभाग, नगर निगम अथवा शहरी विकास, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, दिव्यांग कल्याण, स्वच्छ भारत मिशन, सूचना विभाग, संस्कृति विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ज्यादा जोखिम वाले गांवों पर होगी विशेष नजर
ज्यादा जोखिम वाले गांवों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी। ये ऐसे गांव हैं जहां कभी दिमागी बुखार से मृत्यु हुई है, अथवा तीन साल के भीतर कोई केस सामने आया है। ऐसे गांवों में सभी विभाग प्राथमिकता के साथ अपनी भूमिका निभाएंगे। अभियान के दौरान सहयोगी संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) और पॉथ की विशेष भूमिका रहेगी।
अभियान के मिल रहे हैं अच्छे परिणाम
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। डीएम ने बताया कि वर्ष 2018 में 26 गांव हाई रिस्क में रहे हैं, जिनकी संख्या लगातार कम हो रही है। वर्ष 2019 में 14, वर्ष 2020 में 12 हो गई। इस समय छह गांव हाई रिस्क वाले हैं। इन पर नजर रखी जा रही है। जिले में एईएस/जेई से होने वाली जनहानि में भी काफी कमी देखी जा रही है।