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Basti News: संतानों के कल्याण के लिए माताओं ने रखा हलषष्ठी व्रत
Fri, 15 Aug 2025 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 15 Aug 2025 12:35 AM IST
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शहर के पिकौरा शिवगुलाम मोहल्ले में पूजा करतीं षष्ठी व्रती महिलाएं।
बस्ती। हलषष्ठी यानी ललही छठ पर्व पर बृहस्पतिवार को महिलाओं ने पुत्र की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखा और पूजन कर प्रसाद वितरण किया। शहर के अमहट घाट के पास महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। इसके अलावा विभिन्न घाटों और अन्य स्थलों पर मेले जैसा माहौल था। ग्रामीण क्षेत्र में भी माताओं ने अपनी संतानों के कल्याण के लिए पूरी आस्था के साथ व्रत रखा। इस दौरान हलषष्ठी एवं बलराम की कथा सुनाई गई।
माताओं ने भैंस के गोबर से पूजा घर में दीवार पर हर छठ माता का चित्र बनाया और उनकी पूजा अर्चना की। इसके साथ ही भगवान गणेश और माता गौरी की पूजा की गई। इस व्रत को धारण करने वाली माताएं तालाब के किनारे पूजा की वेदी बनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चन की। हलषष्ठी की पूजा करते हुए बुजुर्ग महिलाओं ने पर्व की कथा और महत्व को बताते हुए कहा कि भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म भादों मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को हुआ था। बलराम को हल और मूसल से खास प्रेम था। यही उनके प्रमुख अस्त्र भी थे। इसलिए इस दिन किसान हल, मूसल और बैल की पूजा करते हैं। इसे किसानों के त्योहार के रूप में भी देखा जाता है।
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माताओं ने की पुत्र के दीर्घायु होने की कामना
बनकटी। महिलाओं ने संतान के दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि के लिए पूरे आस्था के साथ हलषष्ठी का व्रत रखा तथा व्रती महिलाओं ने अपने अपने गांव के पोखरे व तालाबों पर समूह में पहुंचकर छठ माता की कथा सुनी और पूजन अर्चन किया। वहीं बनकटी के गांधीनगर वार्ड सभासद ने हर घर तिरंगा अभियान के तहत पूजा स्थल से लौट रही महिलाओं व बेटियों को तिरंगा वितरित किया। नगर पंचायत गांधीनगर, चंद्रनगर व अंबेडकर नगर सहित विकास खंड के गांवों व वार्डों के पोखरों समेत क्षेत्र के पक्कवा बाजार, बरहुआ, डेल्हापार, दौलतपुर, खोरिया, बानपुर, पसड़ा, खरवनिया सजहरा आदि गांवों के मंदिरों व पोखरों तथा दरवाजों पर जगह जगह सगरी बनाकर माताओं ने टोली के साथ पूरे विधि विधान से शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की।
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माताओं ने भैंस के गोबर से पूजा घर में दीवार पर हर छठ माता का चित्र बनाया और उनकी पूजा अर्चना की। इसके साथ ही भगवान गणेश और माता गौरी की पूजा की गई। इस व्रत को धारण करने वाली माताएं तालाब के किनारे पूजा की वेदी बनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चन की। हलषष्ठी की पूजा करते हुए बुजुर्ग महिलाओं ने पर्व की कथा और महत्व को बताते हुए कहा कि भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म भादों मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को हुआ था। बलराम को हल और मूसल से खास प्रेम था। यही उनके प्रमुख अस्त्र भी थे। इसलिए इस दिन किसान हल, मूसल और बैल की पूजा करते हैं। इसे किसानों के त्योहार के रूप में भी देखा जाता है।
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माताओं ने की पुत्र के दीर्घायु होने की कामना
बनकटी। महिलाओं ने संतान के दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि के लिए पूरे आस्था के साथ हलषष्ठी का व्रत रखा तथा व्रती महिलाओं ने अपने अपने गांव के पोखरे व तालाबों पर समूह में पहुंचकर छठ माता की कथा सुनी और पूजन अर्चन किया। वहीं बनकटी के गांधीनगर वार्ड सभासद ने हर घर तिरंगा अभियान के तहत पूजा स्थल से लौट रही महिलाओं व बेटियों को तिरंगा वितरित किया। नगर पंचायत गांधीनगर, चंद्रनगर व अंबेडकर नगर सहित विकास खंड के गांवों व वार्डों के पोखरों समेत क्षेत्र के पक्कवा बाजार, बरहुआ, डेल्हापार, दौलतपुर, खोरिया, बानपुर, पसड़ा, खरवनिया सजहरा आदि गांवों के मंदिरों व पोखरों तथा दरवाजों पर जगह जगह सगरी बनाकर माताओं ने टोली के साथ पूरे विधि विधान से शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की।

शहर के पिकौरा शिवगुलाम मोहल्ले में पूजा करतीं षष्ठी व्रती महिलाएं।
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