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दर्दनाक हादसा: खुशियां खरीदने गई थी बाजार, घर पहुंचा मातम का संदेश, मां- बेटी की सड़क हादसे में मौत

Sun, 04 Jun 2023 01:41 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती Published by: Digvijay Singh Updated Sun, 04 Jun 2023 01:41 PM IST
सार

स्कूटी सवार मां बेटी की कार दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। फिर क्या कुछ ही दूर पर स्थित गांव केशवपुर में कोहराम मच गया। चीख पुकार सुनकर हर कोई दौड़ पड़ा।

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Mother-daughter died in a painful road accident in Basti
घटना के बाद परिजनों में पसरा मातम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

क्या पता खुशियां खरीदने गई मां-बेटी की रास्ते में ही मौत हो जाएगी। हुआ वही। हाईवे की रफ्तार ने पल भर में दोनों की जिंदगी एक साथ छीन ली। घर पर तीन और मासूमों को इंतजार था कि बहन के साथ मम्मी अभी बाजार से आती होंगी। साथ में खट्टे, मीठे स्वाद भरे सामान के थैले भी लाएंगी। शायद विधाता को यह मंजूर नहीं था। उनकी खिलखिलाती बगिया पल भर में उजड़ गई। एक बेटी मां के साथ काल के गाल में समा गई तो अन्य तीन मासूमों के सिर से ममता का आंचल हमेशा के लिए उठ गया। अब उनकी दुनिया उजड़ गई है।

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वाकया शनिवार का है। घटनास्थल हाईवे का संसारीपुर चौराहा है। जब बाजार से स्कूटी सवार मां बेटी की कार दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। फिर क्या कुछ ही दूर पर स्थित गांव केशवपुर में कोहराम मच गया। चीख पुकार सुनकर हर कोई दौड़ पड़ा। समाचार ऐसा कि सुनते ही कलेजा मुंह को आ गया। घर की खुशियां बिल्कुल गायब हो गई। घूंघट की ओट में सिसकियां थीं। मासूम चेहरों पर बह रहे मोती सरीखे आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहे थे। घर के समझदार शून्य में निहार रहे थे कि आखिर हुआ क्या? हां मातम का संदेश पहुंचने के बाद सुनीता के घर का मंजर कुछ ऐसा ही था। शाम को गांव में शादी थी। वहीं पहुंचने की ललक सुनीता और उनके मासूम बच्चों में सुबह से ही थी। साज-ए-शौकत कह लीजिए या फिर बच्चों के मन बहलाने वाले कुछ सामान खरीदने के लिए सुनीता अपनी बड़ी बेटी त्रिस्या (12) के साथ स्कूटी से महाराजगंज बाजार चली गई। 

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घर पर मौजूद अपनी दो अन्य संतान पल्लवी (6) सिद्धार्थ (3) को भरोसा दिया कि कुछ ही देर बाद वह सामान लेकर लौट आएंगी। मगर हुआ उलटा। लौटने के समय पर मां-बेटी के मौत का संदेश पहुंचा। संयोग से दूसरे नंबर की बेटी प्रियांशी (10) घर पर मौजूद नहीं थी। वह स्कूल की तरफ से समर कैंप में हिस्सा लेने आगरा गई थी। परिजनों की सूचना पर वह भी शिक्षकों के साथ चल पड़ी है। सुनीता अपने चार बच्चों के साथ घर पर रहती थी। पति सुरेश कुमार मुंबई में शटरिंग का कार्य करते हैं। पति की कमाई के बल पर वह अपने चार बच्चों के पालन पोषण का जिम्मा निभा रही थीं। घर की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उसने पिछले साल स्कूटी ली थी ताकि हाट बाजार के लिए किसी का मुंह न ताकना पड़े। 

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हंसी खुशी के साथ चल रही सुनीता की गृहस्थी पर काल का ऐसा हथौड़ा चला कि अब न सुनीता रहीं और न उनकी बड़ी बेटी त्रिस्या। बहन और मां की मौत की खबर सुनकर घर पर मौजूद पल्लवी मामा के साथ थाने तक चली आई। दोनों के शव को देखकर वह फफक-फफक कर रो पड़ी। मौजूद लोग भी उसके करुण क्रंदन पर पिघल गए। वहीं तीन वर्षीय सिद्धार्थ कुछ खास तो नहीं व्यक्त कर पा रहा था, लेकिन आसपास का मंजर उसे सूनी हो चुकी दुनिया का बार-बार एहसास करा रहा था।


 
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