{"_id":"677d75bd7d96144c950ca474","slug":"moinuddin-chishti-was-one-of-the-important-propagators-of-islam-basti-news-c-207-1-sgkp1006-130044-2025-01-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: इस्लाम के महत्वपूर्ण प्रचारकों में से एक थे मोइनुद्दीन चिश्तीे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: इस्लाम के महत्वपूर्ण प्रचारकों में से एक थे मोइनुद्दीन चिश्तीे
Wed, 08 Jan 2025 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 08 Jan 2025 12:13 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नगर बाजार(बस्ती)। कस्बा स्थित जामा मस्जिद में ख्वाजा गरीब का 813वां उर्स धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान फातिहा खानी और लंगर का आयोजन किया गया।
जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती अब्दुलहई ने कहा कि मोइनुद्दीन चिश्ती 12वीं और 13वीं सदी में भारत में इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण प्रचारकों में से एक थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई गरीब लोगों की मदद की। इसी वजह से उन्हें ख्वाजा गरीब नवाज या गरीबों का हितैषी भी कहा जाता है।
उन्होंने इस्लाम की शिक्षाओं को फैलाने के लिए पूरी दुनिया की यात्रा की। आखिरकार, मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में रहने का फैसला किया। 13वीं सदी में उनकी मृत्यु के बाद, उनके शिष्यों ने अजमेर में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एक मकबरा बनाने का फैसला किया। 1465 में सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी ने दरगाह का निर्माण करवाया। यह दरगाह आज भी मुसलमानों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। इस दरगाह ने भारत में इस्लाम के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ख्वाजा गरीब नवाज के प्रति आस्था महज मुसलमानों में नहीं है, बल्कि सभी धर्म के लोग दरगाह शरीफ की चौखट पर शीश झुकाते हैं।
विज्ञापन
नगर बाजार(बस्ती)। कस्बा स्थित जामा मस्जिद में ख्वाजा गरीब का 813वां उर्स धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान फातिहा खानी और लंगर का आयोजन किया गया।
जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती अब्दुलहई ने कहा कि मोइनुद्दीन चिश्ती 12वीं और 13वीं सदी में भारत में इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण प्रचारकों में से एक थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई गरीब लोगों की मदद की। इसी वजह से उन्हें ख्वाजा गरीब नवाज या गरीबों का हितैषी भी कहा जाता है।
उन्होंने इस्लाम की शिक्षाओं को फैलाने के लिए पूरी दुनिया की यात्रा की। आखिरकार, मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में रहने का फैसला किया। 13वीं सदी में उनकी मृत्यु के बाद, उनके शिष्यों ने अजमेर में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एक मकबरा बनाने का फैसला किया। 1465 में सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी ने दरगाह का निर्माण करवाया। यह दरगाह आज भी मुसलमानों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। इस दरगाह ने भारत में इस्लाम के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विज्ञापन
ख्वाजा गरीब नवाज के प्रति आस्था महज मुसलमानों में नहीं है, बल्कि सभी धर्म के लोग दरगाह शरीफ की चौखट पर शीश झुकाते हैं।