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कोरिया की अत्याधुनिक मशीन जांचेगी समलबाई
basti
Updated Tue, 13 Feb 2018 11:49 PM IST
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जांच करते डॉक्टर।
- फोटो : amar ujala
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आंखों के लिए अभिशाप समलबाई अथवा काला मोतिया तभी होता है जब आईओपी (इंट्रा आक्यूलर प्रेशर) का दबाव सामान्य से अधिक हो जाता है। इस रोग का निदान अब जिला अस्पताल में अत्याधुनिक तकनीक से होगा। अस्पताल में कोरिया की नान कांटैक्ट टोनो मीटर स्थापित हो गया है। इस मीटर की एक खूबी यह भी है कि बिना आंख छुए ही समलबाई जांची जा सकेगी, जिससे मरीज के आंखों को संक्रमण से भी निजात मिलेगी।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष नरायन त्रिपाठी ने बताया कि अक्सर मरीजों की आंख के पास भारीपन, सिर दर्द, आंखों के सामने रंगीन गोले नजर आने व बार-बार चश्मे का नंबर बदलने जैसी समस्या होती है। यह स्थिति समलबाई की प्रारंभिक लक्षण भी होते हैं। अस्पताल में इसकी जांच पुरानी पद्धति से होती थी। इस स्थिति में कई बार आंखों के संक्रमण का खतरा रहता था, जिससे आईओपी की जांच नहीं हो पाती थी और इलाज संभव नहीं होता था। नई मशीन आंखों को बगैर छुए और चीरा लगाए जांच हो सकेगा। जिन मरीजों की आंखों में संक्रमण हो अथवा जिनकी पुतली का आकार बिगड़ गया हो की आईओपी जांची जा सकेगी। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि यह कोरिया निर्मित मशीन है। बाहर इस मशीन से जांच में मरीजों को अब अनावश्यक रुपये खर्च नहीं करना पड़ेगा।
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आंखों के लिए अभिशाप समलबाई अथवा काला मोतिया तभी होता है जब आईओपी (इंट्रा आक्यूलर प्रेशर) का दबाव सामान्य से अधिक हो जाता है। इस रोग का निदान अब जिला अस्पताल में अत्याधुनिक तकनीक से होगा। अस्पताल में कोरिया की नान कांटैक्ट टोनो मीटर स्थापित हो गया है। इस मीटर की एक खूबी यह भी है कि बिना आंख छुए ही समलबाई जांची जा सकेगी, जिससे मरीज के आंखों को संक्रमण से भी निजात मिलेगी।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष नरायन त्रिपाठी ने बताया कि अक्सर मरीजों की आंख के पास भारीपन, सिर दर्द, आंखों के सामने रंगीन गोले नजर आने व बार-बार चश्मे का नंबर बदलने जैसी समस्या होती है। यह स्थिति समलबाई की प्रारंभिक लक्षण भी होते हैं। अस्पताल में इसकी जांच पुरानी पद्धति से होती थी। इस स्थिति में कई बार आंखों के संक्रमण का खतरा रहता था, जिससे आईओपी की जांच नहीं हो पाती थी और इलाज संभव नहीं होता था। नई मशीन आंखों को बगैर छुए और चीरा लगाए जांच हो सकेगा। जिन मरीजों की आंखों में संक्रमण हो अथवा जिनकी पुतली का आकार बिगड़ गया हो की आईओपी जांची जा सकेगी। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि यह कोरिया निर्मित मशीन है। बाहर इस मशीन से जांच में मरीजों को अब अनावश्यक रुपये खर्च नहीं करना पड़ेगा।
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