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Basti News: मनरेगा का बकाया दे रहा दर्द, मजदूरों के साथ सामान देने वाले भी परेशान

Sat, 07 Mar 2026 12:56 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 07 Mar 2026 12:56 AM IST
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MNREGA dues are causing pain, and those who provide supplies along with laborers are also troubled.
बस्ती। गांव में जरूरतमंद रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए मनरेगा में काम तो करते हैं मगर, उन्हें भुगतान समय से नहीं मिल पा रहा है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घड़ी करीब आने के साथ ही मनरेगा में उधारी बढ़ने से ग्राम प्रधानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में दो चालू वित्तीय साल का 199 करोड़ 28 लाख नौ हजार रुपये की उधारी है। इससे संकट बढ़ गया है। मनरेगा के तहत सामग्री मद में वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14776.96 लाख, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5151.13 लाख रुपये बकाया है। इसमें श्रमिकों की मजदूरी भी है। विभाग के अनुसार, मनरेगा के तहत प्रत्येक दिवस मजदूरी की दर 252 रुपये है। प्रत्येक परिवार को प्रत्येक वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है।
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मजदूरी का भुगतान राज्य स्तरीय अकाउंट से पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के जरिए होता है। स्टेट अकाउंट में बजट उपलब्ध होने पर उसे भुगतान के लिए खोला जाता है। 14 दिवस के भीतर भुगतान की व्यवस्था बनाई गई है। अब एसएनए स्पर्श से भुगतान की कार्रवाई चल रही है। मगर, निर्माण सामग्री का भुगतान न होने से फर्म संचालक काफी परेशान हैं।
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दुकानदार भी सामग्री देकर फंस गए हैं। वहीं प्रधानों का कहना है कि चुनावी साल में भी भुगतान नहीं हो रहा है।
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