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पारे की उछाल, सब हुए बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो बस्ती
Updated Wed, 20 Apr 2016 11:25 PM IST
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गर्मी अप्रैल माह में अब नए रिकॉर्ड बना रही है। बुधवार को पारा 44 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचकर इसे महीने का सबसे गर्म दिन बना गया। सूरज की किरणें मानो आग बरसाने पर तुली हों और हवा के थपेड़े झुलसाने पर आमादा।
सुबह नौ बजे से ही गर्मी सितम ढाना शुरू कर दिया था। लू के थपेड़े सुबह से शुरू हुए तो शाम पांच बजे तक झुलसाते रहे।
अप्रैल माह में के दूसरे सप्ताह से ही पारा बढ़ने लगा था। 15 अप्रैल को पारा 43 डिग्री सेल्सियस था। इसके बाद पारा में कमी दर्ज की जा रही थी। इसी बीच अचानक 20 अप्रैल को गर्मी का सितम और बढ़ गया।
पारा उछाल मारते हुए 44 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। पूरे दिन गर्म पछुआ हवाएं शरीर को झुलसाने को आतुर लगीं।
इस बीच धूप का सितम भी पूरे जोर पर था। दोपहर में तो सूरज की किरणें इतनी तीखी थीं कि लोगों को घरों और दफ्तरों में ही रहने को मजबूर कर दिया। सूरज की तपिश से बचने के लिए लोग हर संभव उपाय करते नजर आए।
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जो लोग घरों और कार्यालयों से बाहर निकले वह अपने चेहरे और शरीर को पूरी तरह ढके नजर आए। किसी ने अंगोछे से अपने सिर और चेहरे को पूरी तरह ढके रखा तो किसी ने टोपी और रुमाल का सहारा लिया। खीरे, कंकड़ी, तरबूज, गन्ने और बेल का शरबत आदि प्रयोग कर भी लोग लू से बचने की कोशिश करते रहे।
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सुबह नौ बजे से ही गर्मी सितम ढाना शुरू कर दिया था। लू के थपेड़े सुबह से शुरू हुए तो शाम पांच बजे तक झुलसाते रहे।
अप्रैल माह में के दूसरे सप्ताह से ही पारा बढ़ने लगा था। 15 अप्रैल को पारा 43 डिग्री सेल्सियस था। इसके बाद पारा में कमी दर्ज की जा रही थी। इसी बीच अचानक 20 अप्रैल को गर्मी का सितम और बढ़ गया।
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पारा उछाल मारते हुए 44 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। पूरे दिन गर्म पछुआ हवाएं शरीर को झुलसाने को आतुर लगीं।
इस बीच धूप का सितम भी पूरे जोर पर था। दोपहर में तो सूरज की किरणें इतनी तीखी थीं कि लोगों को घरों और दफ्तरों में ही रहने को मजबूर कर दिया। सूरज की तपिश से बचने के लिए लोग हर संभव उपाय करते नजर आए।
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जो लोग घरों और कार्यालयों से बाहर निकले वह अपने चेहरे और शरीर को पूरी तरह ढके नजर आए। किसी ने अंगोछे से अपने सिर और चेहरे को पूरी तरह ढके रखा तो किसी ने टोपी और रुमाल का सहारा लिया। खीरे, कंकड़ी, तरबूज, गन्ने और बेल का शरबत आदि प्रयोग कर भी लोग लू से बचने की कोशिश करते रहे।