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Basti News: अधर में महायोजना 2031...नहीं तैयार हो सका नए मास्टर प्लान का खाका
Sat, 30 Sep 2023 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 30 Sep 2023 01:10 AM IST
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शासन ने तीन बार ठुकराया बीडीए का प्रस्ताव, फिर भी खामियां दूर नहीं
केवल गांव कर लिए चयनित, विकसित एवं अविकसित क्षेत्र चिह्नित नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण के महायोजना-2031 का प्रस्ताव अधर में लटक गया है। चार महीने में तैयार की गई महायोजना के नए मास्टर प्लान को शासन तीन बार ठुकरा चुका है। आपत्तियों के साथ फाइल हर बार लौट आई। बावजूद इसके अब तक प्रस्ताव को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। सेटेलाइट इमेजनरी के आधार पर नगर पालिका समेत कुल 217 गांवों को शामिल कर मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया। मगर इसमें विकसित एवं अविकसित क्षेत्रों का चिह्नांकन ही नहीं किया गया।
बीडीए ने मई माह में महायोजना-2031 का प्रस्ताव तैयार कर लिया था। इसके मुताबिक नए मास्टर प्लान में तीन गुने से अधिक गांव शामिल हुए। पहले मास्टर प्लान में 69 गांव तो दूसरे में 217 गांव और एक नगर पालिका लिया गया है जिससे बीडीए का भौगोलिक दायरा भी लगभग तीन गुना बढ़ा है। नए मास्टर प्लान के मुताबिक बीडीए का क्षेत्रफल 51.12 से बढ़कर 150.76 वर्ग किमी हो गया है। मगर, सेटेलाइट इमेजनरी से कुछ भी अलग होकर नए मास्टर प्लान का खाका तैयार नहीं हो सका है।
मई माह में जब महायोजना-2031 के साथ नया मास्टर प्लान शासन में प्रस्तुत किया गया तो इसमें तीन बिंदुओं पर खामियां सामने आईं। शासन ने इस पर स्पष्ट टिप्पणी के साथ इस प्रस्ताव को अस्वीकृति कर दिया। इसके बाद भी विभाग मास्टर प्लान की खामियों को दूर नहीं कर सका। शासन की मंशा थी कि नए मास्टर प्लान में विभिन्न कैटेगरी के विकसित एवं अविकसित क्षेत्र चिह्नित होने चाहिए। इसको लेकर बीडीए तभी से उलझा हुआ है। बीच में दो बार इस प्रस्ताव को दुरुस्त कर शासन को फिर भेजा गया। मगर, इसमें भी ग्रीन लैंड, भूमि प्रकृति एवं डूब क्षेत्र स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाए जाने के कारण शासन ने हर बार प्रस्ताव को लौटा दिया। छह माह बीतने को है, लेकिन अब तक बीडीए शासन के मानक के अनुरूप नए मास्टर प्लान को तैयार नहीं कर सका है।
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इन बिंदुओं पर करना था सुधार
नए मास्टर प्लान में संशोधन का पहला बिंदु ग्रीन लैंड का चिह्नांकन करना था। हाईवे, अन्य प्रमुख मार्गों एवं नदियों के किनारे दोनों तरफ 87 मीटर की दूरी तक ग्रीन लैंड और ग्रीन बेल्ट को क्षेत्रफल के विवरण अंकित करना था। इसके अलावा राजस्व अभिलेख से मिलान कर प्राधिकरण क्षेत्र की तालाब, पोखरे, चकमार्ग, चारागाह आदि सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को भी पृथक करना था। तीसरा ऐसा क्षेत्र चिह्नित करना था जिनकी सतह नीचे होने के कारण बाढ़ ग्रस्त माना जाता है। यहां निर्माण प्रतिबंधित रखना है। इन तीनों बिंदुओं पर स्पष्ट उल्लेख न होने से नियोजित शहर बसाने की मंशा साकार नहीं होगी।
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सिंचाई विभाग चिह्नित नहीं कर सका डूब क्षेत्र
बीडीए क्षेत्र में डूब क्षेत्र की जमीनों को चिह्नित करने के लिए सिंचाई विभाग एवं उसकी बाढ़ खंड शाखा से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। मगर, अब तक सिंचाई विभाग की ओर से डूब क्षेत्र का विवरण नहीं दिया जा सका है। नतीजा इस कार्य के लिए बीडीए और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम बनाकर लगाई गई है।
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यह हैं डूब क्षेत्र
प्राधिकरण के दायरे में कुआनो नदी के किनारे के बड़ार, ऊंचीभीटी, भूअर निरंजनपुर, भूअर सराय, मिश्रौलिया, भैसहिया, भद्रेश्वरनाथ, चंदो, राजा चक समेत तीन दर्जन से अधिक गांव डूब क्षेत्र में आते हैं। इसके अलावा महदेव ताल, लैबुड़वा ताल, भेलखा ताल जैसे बड़े जलाशयों के आसपास की जमीनें भी बाढ़ प्रभावित हैं। जलभराव वाले इन्हीं क्षेत्रों के भूखंडों का चिह्नांकन नए मास्टर प्लान में सम्मिलित करना है।
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भूमि की प्रकृति का स्पष्ट उल्लेख होने से होंगे ये फायदे
नए मास्टर प्लान में विकसित क्षेत्र एवं अविकसित क्षेत्र का मापदंड निर्धारित होने से बड़े फायदे हैं। अनियोजित शहर के बसने पर काफी हद तक अंकुश लगेगा। अविकसित क्षेत्र में ग्रीन लैंड, ग्रीन बेल्ट, डूब क्षेत्र आदि भूमि के प्रकार हैं। इनका चिह्नांकन होने से इन जमीनों पर निर्माण का नक्शा नहीं पास हो सकेगा। आवेदन होते ही बीडीए को नए मास्टर प्लान से संबंधित भूखंड का मिलान करते ही भूमि की प्रकृति का तत्काल पता चल जाएगा।
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35 प्रतिशत ग्रीन जोन में पहले से हुआ है निर्माण कार्य
बीडीए मानचित्र में चिह्नित ग्रीन जोन या पार्कों की जमीन पर 35 प्रतिशत निर्माण पहले से ही हो चुका है। इसकी मुख्य वजह यही रही कि पुराने मास्टर प्लान में इन जमीनों का स्पष्ट चिह्नांकन नहीं हुआ था। इससे कुछ जगहों पर नक्शे भी पास कर दिए गए। प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 16 स्थान पार्क या ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित है जिनका क्षेत्रफल 1096.54 हेक्टेयर है। सर्वे के दौरान पता चला कि इसमें से 35 प्रतिशत हिस्से में निर्माण हो चुका है।
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वर्ष 2016 में तैयार हुई थी पहली महायोजना
प्राधिकरण के गठन के समय वर्ष 2016 में पहली महायोजना तैयार की गई थी। इसमें नगर पालिका समेत 69 गांव शामिल किए गए थे। उस समय बीडीए का क्षेत्रफल 51 वर्ग किमी निर्धारित हुआ था। इसका मास्टर प्लान वर्ष 2021 में लागू हुआ। वहीं महायोजना 2031 के मास्टर प्लान को अभी तैयार किया जा रहा है। इसका दायरा 51.12 से बढ़कर 150.76 वर्ग किमी हो गया है।
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कोट
नए मास्टर प्लान के लिए केवल डूब क्षेत्र को चिह्नित किए जाने का कार्य शेष रह गया है। इसके लिए बीडीए और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम गठित कर दी गई है। चिह्नांकन का कार्य तेजी से चल रहा है। कुछ ही दिन में नए मास्टर प्लान को अपडेट कर शासन को प्रेषित कर दिया जाएगा।
संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए
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केवल गांव कर लिए चयनित, विकसित एवं अविकसित क्षेत्र चिह्नित नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण के महायोजना-2031 का प्रस्ताव अधर में लटक गया है। चार महीने में तैयार की गई महायोजना के नए मास्टर प्लान को शासन तीन बार ठुकरा चुका है। आपत्तियों के साथ फाइल हर बार लौट आई। बावजूद इसके अब तक प्रस्ताव को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। सेटेलाइट इमेजनरी के आधार पर नगर पालिका समेत कुल 217 गांवों को शामिल कर मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया। मगर इसमें विकसित एवं अविकसित क्षेत्रों का चिह्नांकन ही नहीं किया गया।
बीडीए ने मई माह में महायोजना-2031 का प्रस्ताव तैयार कर लिया था। इसके मुताबिक नए मास्टर प्लान में तीन गुने से अधिक गांव शामिल हुए। पहले मास्टर प्लान में 69 गांव तो दूसरे में 217 गांव और एक नगर पालिका लिया गया है जिससे बीडीए का भौगोलिक दायरा भी लगभग तीन गुना बढ़ा है। नए मास्टर प्लान के मुताबिक बीडीए का क्षेत्रफल 51.12 से बढ़कर 150.76 वर्ग किमी हो गया है। मगर, सेटेलाइट इमेजनरी से कुछ भी अलग होकर नए मास्टर प्लान का खाका तैयार नहीं हो सका है।
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मई माह में जब महायोजना-2031 के साथ नया मास्टर प्लान शासन में प्रस्तुत किया गया तो इसमें तीन बिंदुओं पर खामियां सामने आईं। शासन ने इस पर स्पष्ट टिप्पणी के साथ इस प्रस्ताव को अस्वीकृति कर दिया। इसके बाद भी विभाग मास्टर प्लान की खामियों को दूर नहीं कर सका। शासन की मंशा थी कि नए मास्टर प्लान में विभिन्न कैटेगरी के विकसित एवं अविकसित क्षेत्र चिह्नित होने चाहिए। इसको लेकर बीडीए तभी से उलझा हुआ है। बीच में दो बार इस प्रस्ताव को दुरुस्त कर शासन को फिर भेजा गया। मगर, इसमें भी ग्रीन लैंड, भूमि प्रकृति एवं डूब क्षेत्र स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाए जाने के कारण शासन ने हर बार प्रस्ताव को लौटा दिया। छह माह बीतने को है, लेकिन अब तक बीडीए शासन के मानक के अनुरूप नए मास्टर प्लान को तैयार नहीं कर सका है।
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इन बिंदुओं पर करना था सुधार
नए मास्टर प्लान में संशोधन का पहला बिंदु ग्रीन लैंड का चिह्नांकन करना था। हाईवे, अन्य प्रमुख मार्गों एवं नदियों के किनारे दोनों तरफ 87 मीटर की दूरी तक ग्रीन लैंड और ग्रीन बेल्ट को क्षेत्रफल के विवरण अंकित करना था। इसके अलावा राजस्व अभिलेख से मिलान कर प्राधिकरण क्षेत्र की तालाब, पोखरे, चकमार्ग, चारागाह आदि सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को भी पृथक करना था। तीसरा ऐसा क्षेत्र चिह्नित करना था जिनकी सतह नीचे होने के कारण बाढ़ ग्रस्त माना जाता है। यहां निर्माण प्रतिबंधित रखना है। इन तीनों बिंदुओं पर स्पष्ट उल्लेख न होने से नियोजित शहर बसाने की मंशा साकार नहीं होगी।
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सिंचाई विभाग चिह्नित नहीं कर सका डूब क्षेत्र
बीडीए क्षेत्र में डूब क्षेत्र की जमीनों को चिह्नित करने के लिए सिंचाई विभाग एवं उसकी बाढ़ खंड शाखा से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। मगर, अब तक सिंचाई विभाग की ओर से डूब क्षेत्र का विवरण नहीं दिया जा सका है। नतीजा इस कार्य के लिए बीडीए और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम बनाकर लगाई गई है।
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यह हैं डूब क्षेत्र
प्राधिकरण के दायरे में कुआनो नदी के किनारे के बड़ार, ऊंचीभीटी, भूअर निरंजनपुर, भूअर सराय, मिश्रौलिया, भैसहिया, भद्रेश्वरनाथ, चंदो, राजा चक समेत तीन दर्जन से अधिक गांव डूब क्षेत्र में आते हैं। इसके अलावा महदेव ताल, लैबुड़वा ताल, भेलखा ताल जैसे बड़े जलाशयों के आसपास की जमीनें भी बाढ़ प्रभावित हैं। जलभराव वाले इन्हीं क्षेत्रों के भूखंडों का चिह्नांकन नए मास्टर प्लान में सम्मिलित करना है।
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भूमि की प्रकृति का स्पष्ट उल्लेख होने से होंगे ये फायदे
नए मास्टर प्लान में विकसित क्षेत्र एवं अविकसित क्षेत्र का मापदंड निर्धारित होने से बड़े फायदे हैं। अनियोजित शहर के बसने पर काफी हद तक अंकुश लगेगा। अविकसित क्षेत्र में ग्रीन लैंड, ग्रीन बेल्ट, डूब क्षेत्र आदि भूमि के प्रकार हैं। इनका चिह्नांकन होने से इन जमीनों पर निर्माण का नक्शा नहीं पास हो सकेगा। आवेदन होते ही बीडीए को नए मास्टर प्लान से संबंधित भूखंड का मिलान करते ही भूमि की प्रकृति का तत्काल पता चल जाएगा।
35 प्रतिशत ग्रीन जोन में पहले से हुआ है निर्माण कार्य
बीडीए मानचित्र में चिह्नित ग्रीन जोन या पार्कों की जमीन पर 35 प्रतिशत निर्माण पहले से ही हो चुका है। इसकी मुख्य वजह यही रही कि पुराने मास्टर प्लान में इन जमीनों का स्पष्ट चिह्नांकन नहीं हुआ था। इससे कुछ जगहों पर नक्शे भी पास कर दिए गए। प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 16 स्थान पार्क या ग्रीन जोन के रूप में चिह्नित है जिनका क्षेत्रफल 1096.54 हेक्टेयर है। सर्वे के दौरान पता चला कि इसमें से 35 प्रतिशत हिस्से में निर्माण हो चुका है।
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वर्ष 2016 में तैयार हुई थी पहली महायोजना
प्राधिकरण के गठन के समय वर्ष 2016 में पहली महायोजना तैयार की गई थी। इसमें नगर पालिका समेत 69 गांव शामिल किए गए थे। उस समय बीडीए का क्षेत्रफल 51 वर्ग किमी निर्धारित हुआ था। इसका मास्टर प्लान वर्ष 2021 में लागू हुआ। वहीं महायोजना 2031 के मास्टर प्लान को अभी तैयार किया जा रहा है। इसका दायरा 51.12 से बढ़कर 150.76 वर्ग किमी हो गया है।
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कोट
नए मास्टर प्लान के लिए केवल डूब क्षेत्र को चिह्नित किए जाने का कार्य शेष रह गया है। इसके लिए बीडीए और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम गठित कर दी गई है। चिह्नांकन का कार्य तेजी से चल रहा है। कुछ ही दिन में नए मास्टर प्लान को अपडेट कर शासन को प्रेषित कर दिया जाएगा।
संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए