{"_id":"6ab95cc9feb059ee12040f1f","slug":"markets-sluggish-during-pitru-paksha-vibrancy-to-return-with-navratri-and-the-wedding-season-basti-news-c-207-1-bst1005-167900-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: पितृपक्ष में बाजार पड़ा सुस्त, नवरात्र और सहालग से लौटेगी राैनक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: पितृपक्ष में बाजार पड़ा सुस्त, नवरात्र और सहालग से लौटेगी राैनक
विज्ञापन
बाजार में सन्नाटा जैसा हाल संवाद
बस्ती। पितृपक्ष शुरू होते ही बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई है। शुभ कार्यों और नई वस्तुओं की खरीदारी से लोग परहेज कर रहे हैं। इसका असर कपड़ा, ज्वैलरी, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार पर दिख रहा है। सामान्य दिनों में ग्राहकों से गुलजार रहने वाली दुकानों पर अब आवाजाही कम हो गई है। कारोबारियों को नवरात्र और इसके बाद शुरू होने वाली सहालग से बाजार में फिर रौनक लौटने की उम्मीद है।
पितृपक्ष में नई वस्तुओं की खरीदारी को लेकर लोग आमतौर पर सावधानी बरतते हैं। इसी वजह से कई लोगों ने शुक्रवार और शनिवार को ही जरूरी सामान खरीद लिया। इसके बाद बाजार में ग्राहकों की संख्या कम हो गई। दुकानदारों के मुताबिक, पितृपक्ष के दौरान सबसे अधिक असर कपड़ा और ज्वैलरी कारोबार पर पड़ता है। बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री भी प्रभावित होती है।
कारोबारियों राधेश्याम और अतिम ने बताया कि पितृपक्ष में बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम हो जाती है। अब नवरात्र और उसके बाद शुरू होने वाली सहालग से बाजार में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। दुकानदारों को त्योहार और शादी-विवाह के सीजन से कारोबार में तेजी आने की आस है।
विज्ञापन
-- --
15 दिन का रहेगा श्राद्ध पक्ष
इस बार पंचमी और षष्ठी तिथि का क्षय होने से पितृपक्ष 15 दिनों का रहेगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध के बाद 27 सितंबर से मुख्य श्राद्ध पक्ष शुरू हुआ और 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। पं. देवस्य मिश्रा के अनुसार, उदया तिथि के आधार पर श्राद्ध और तर्पण की तिथि निर्धारित होती है। पितृपक्ष में लोग नदी, तालाब और पोखरों में तर्पण के साथ दान-पुण्य करते हैं।
-- -- --
2026 में श्राद्ध की प्रमुख तिथियां
28 सितंबर : द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर : तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर : चतुर्थी-पंचमी श्राद्ध
1 अक्तूबर : षष्ठी श्राद्ध
2 अक्तूबर : सप्तमी श्राद्ध
3 अक्तूबर : अष्टमी श्राद्ध
4 अक्तूबर : नवमी श्राद्ध
5 अक्तूबर : दशमी श्राद्ध
6 अक्तूबर : एकादशी श्राद्ध
7 अक्तूबर : द्वादशी श्राद्ध
8 अक्तूबर : त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्तूबर : चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्तूबर : सर्वपितृ अमावस्या
-- --
ऐसे करें तर्पण
पं. देवस्य मिश्रा के अनुसार, तर्पण योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में करना चाहिए। नदी, तालाब या घर में व्यवस्था के अनुसार जौ, तिल, कुशा, गंगाजल और वस्त्र आदि सामग्री से तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष में विधि-विधान से तर्पण और दान-पुण्य करने से पितरों की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान पूरा होता है।
विज्ञापन
पितृपक्ष में नई वस्तुओं की खरीदारी को लेकर लोग आमतौर पर सावधानी बरतते हैं। इसी वजह से कई लोगों ने शुक्रवार और शनिवार को ही जरूरी सामान खरीद लिया। इसके बाद बाजार में ग्राहकों की संख्या कम हो गई। दुकानदारों के मुताबिक, पितृपक्ष के दौरान सबसे अधिक असर कपड़ा और ज्वैलरी कारोबार पर पड़ता है। बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री भी प्रभावित होती है।
विज्ञापन
कारोबारियों राधेश्याम और अतिम ने बताया कि पितृपक्ष में बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम हो जाती है। अब नवरात्र और उसके बाद शुरू होने वाली सहालग से बाजार में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। दुकानदारों को त्योहार और शादी-विवाह के सीजन से कारोबार में तेजी आने की आस है।
विज्ञापन
15 दिन का रहेगा श्राद्ध पक्ष
इस बार पंचमी और षष्ठी तिथि का क्षय होने से पितृपक्ष 15 दिनों का रहेगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध के बाद 27 सितंबर से मुख्य श्राद्ध पक्ष शुरू हुआ और 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। पं. देवस्य मिश्रा के अनुसार, उदया तिथि के आधार पर श्राद्ध और तर्पण की तिथि निर्धारित होती है। पितृपक्ष में लोग नदी, तालाब और पोखरों में तर्पण के साथ दान-पुण्य करते हैं।
2026 में श्राद्ध की प्रमुख तिथियां
28 सितंबर : द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर : तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर : चतुर्थी-पंचमी श्राद्ध
1 अक्तूबर : षष्ठी श्राद्ध
2 अक्तूबर : सप्तमी श्राद्ध
3 अक्तूबर : अष्टमी श्राद्ध
4 अक्तूबर : नवमी श्राद्ध
5 अक्तूबर : दशमी श्राद्ध
6 अक्तूबर : एकादशी श्राद्ध
7 अक्तूबर : द्वादशी श्राद्ध
8 अक्तूबर : त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्तूबर : चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्तूबर : सर्वपितृ अमावस्या
ऐसे करें तर्पण
पं. देवस्य मिश्रा के अनुसार, तर्पण योग्य ब्राह्मण के मार्गदर्शन में करना चाहिए। नदी, तालाब या घर में व्यवस्था के अनुसार जौ, तिल, कुशा, गंगाजल और वस्त्र आदि सामग्री से तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष में विधि-विधान से तर्पण और दान-पुण्य करने से पितरों की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान पूरा होता है।