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Basti News: शहर में लगी 1.26 करोड़ की लाइटों से नहीं हो पा रहा उजियारा
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रोडवेज तिराहें पर लगी हाईमास्ट लाइट खराब संवाद
बस्ती। शहर के हृदयस्थल गांधीनगर बाजार समेत प्रमुख स्थानों पर करीब 1.26 करोड़ रुपये की लागत से लगाई गई हाईमास्ट लाइटें अब बदहाल हो गई हैं। कई लाइटों के बल्ब खराब हो चुके हैं तो कहीं पोल के बिजली के बॉक्स खुले पड़े हैं। इससे पर्याप्त रोशनी नहीं हो पा रही है। खुले बॉक्स के कारण राहगीरों और आसपास घूमने वाले बच्चों व जानवरों के लिए हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
हाईमास्ट लाइटों के रखरखाव पर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया गया है। एक हाईमास्ट पर करीब नौ लाख रुपये खर्च किए गए थे और इसमें 24 बल्ब लगाए गए थे। देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे अधिकांश बल्ब खराब होते चले गए। नगर पालिका की ओर से नियमित मरम्मत नहीं होने से शहर के प्रमुख स्थानों पर लगी ये लाइटें अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं।
फव्वारा तिराहे के पास लगी हाईमास्ट लाइट की स्थिति खराब है। इसमें इक्का-दुक्का बल्ब ही जल रहे हैं। रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से तिराहे की रौनक भी फीकी नजर आती है। पोल का बिजली बॉक्स खुला पड़ा है। इससे करंट लगने का खतरा बना हुआ है। खुले बॉक्स के कारण जानवरों या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के संपर्क में आने से हादसा हो सकता है।
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शास्त्री चौक की हाईमास्ट बनी शोपीस
शास्त्री चौक पर लगी हाईमास्ट के बल्ब एक-एक कर खराब हो गए हैं। शुरुआती दौर में यह चौक दूधिया रोशनी से जगमगाता था और काफी दूर तक रोशनी दिखाई देती थी। लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण अब इसकी रोशनी बेहद कम हो गई है। हाईमास्ट अब महज शोपीस बनकर रह गई है।
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डीएम कार्यालय के पास भी बल्ब टूटे
डीएम कार्यालय के पास लगी हाईमास्ट लाइट के कुछ बल्ब टूटकर गिर चुके हैं। इससे इसकी रोशनी भी प्रभावित हुई है। महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय के पास लगी लाइट की यह स्थिति नगर पालिका की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि जब प्रमुख स्थानों की लाइटों का यह हाल है तो शहर के अन्य हिस्सों में स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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रोडवेज तिराहे की लाइट भी खराब
रोडवेज तिराहे पर लगी हाईमास्ट लाइट भी लंबे समय से खराब है। पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण रात में यहां अंधेरा रहता है। हाईमास्ट पर लगे सीसी कैमरों के अलावा इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। रोडवेज परिसर में लगी हाईमास्ट खराब होने के बाद मरम्मत के लिए नीचे उतारी जा रही थी, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया। इसके बाद से इसे दोबारा स्थापित नहीं किया गया।
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गांधीनगर में खुले पड़े बिजली के बॉक्स
गांधीनगर मुख्य बाजार के डिवाइडर पर लगी स्ट्रीट लाइटों के कई पोल के बिजली बॉक्स खुले पड़े हैं। इनमें तार दिखाई दे रहे हैं। बाजार में दिनभर भीड़ रहती है। ऐसे में खुले बॉक्स से करंट लगने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने इन बॉक्स को तत्काल बंद कराने की मांग की है।
कोट
खराब हाईमास्ट लाइटों को चिह्नित कर जल्द ठीक कराया जाएगा। जहां नई हाईमास्ट लाइट की आवश्यकता होगी, वहां भी लगाई जाएगी। खुले बिजली बॉक्स की जांच कराकर उन्हें बंद कराया जाएगा, ताकि किसी तरह का हादसा न हो।
-नेहा वर्मा, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद
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हाईमास्ट लाइटों के रखरखाव पर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया गया है। एक हाईमास्ट पर करीब नौ लाख रुपये खर्च किए गए थे और इसमें 24 बल्ब लगाए गए थे। देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे अधिकांश बल्ब खराब होते चले गए। नगर पालिका की ओर से नियमित मरम्मत नहीं होने से शहर के प्रमुख स्थानों पर लगी ये लाइटें अब सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं।
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फव्वारा तिराहे के पास लगी हाईमास्ट लाइट की स्थिति खराब है। इसमें इक्का-दुक्का बल्ब ही जल रहे हैं। रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से तिराहे की रौनक भी फीकी नजर आती है। पोल का बिजली बॉक्स खुला पड़ा है। इससे करंट लगने का खतरा बना हुआ है। खुले बॉक्स के कारण जानवरों या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के संपर्क में आने से हादसा हो सकता है।
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शास्त्री चौक की हाईमास्ट बनी शोपीस
शास्त्री चौक पर लगी हाईमास्ट के बल्ब एक-एक कर खराब हो गए हैं। शुरुआती दौर में यह चौक दूधिया रोशनी से जगमगाता था और काफी दूर तक रोशनी दिखाई देती थी। लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण अब इसकी रोशनी बेहद कम हो गई है। हाईमास्ट अब महज शोपीस बनकर रह गई है।
डीएम कार्यालय के पास भी बल्ब टूटे
डीएम कार्यालय के पास लगी हाईमास्ट लाइट के कुछ बल्ब टूटकर गिर चुके हैं। इससे इसकी रोशनी भी प्रभावित हुई है। महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय के पास लगी लाइट की यह स्थिति नगर पालिका की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि जब प्रमुख स्थानों की लाइटों का यह हाल है तो शहर के अन्य हिस्सों में स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
रोडवेज तिराहे की लाइट भी खराब
रोडवेज तिराहे पर लगी हाईमास्ट लाइट भी लंबे समय से खराब है। पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण रात में यहां अंधेरा रहता है। हाईमास्ट पर लगे सीसी कैमरों के अलावा इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। रोडवेज परिसर में लगी हाईमास्ट खराब होने के बाद मरम्मत के लिए नीचे उतारी जा रही थी, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया। इसके बाद से इसे दोबारा स्थापित नहीं किया गया।
गांधीनगर में खुले पड़े बिजली के बॉक्स
गांधीनगर मुख्य बाजार के डिवाइडर पर लगी स्ट्रीट लाइटों के कई पोल के बिजली बॉक्स खुले पड़े हैं। इनमें तार दिखाई दे रहे हैं। बाजार में दिनभर भीड़ रहती है। ऐसे में खुले बॉक्स से करंट लगने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने इन बॉक्स को तत्काल बंद कराने की मांग की है।
कोट
खराब हाईमास्ट लाइटों को चिह्नित कर जल्द ठीक कराया जाएगा। जहां नई हाईमास्ट लाइट की आवश्यकता होगी, वहां भी लगाई जाएगी। खुले बिजली बॉक्स की जांच कराकर उन्हें बंद कराया जाएगा, ताकि किसी तरह का हादसा न हो।
-नेहा वर्मा, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद