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Basti News: कानपुर और गोंडा से बसों में... छोटी गाड़ियों में बाजार में पहुंचता है खोआ

Thu, 26 Feb 2026 12:51 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 12:51 AM IST
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Khoya reaches the market in buses from Kanpur and Gonda... in small vehicles
बस्ती। त्योहारों पर मिलावटी खोआ का खेल कोई नया नहीं हैं। धंधेबाज भी वही होते हैं, पर इनकी जड़ें इतनी मजबूत हो गई हैं कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग इन्हें तोड़ नहीं पा रहा है। होली करीब आते ही मिलावटी खोआ का खेल फिर तेजी से पनपने लगा है। कानपुर और गोंडा जिले के नवाबगंज से क्विंटलों के खेप रोजाना बस्ती में मिलावटी खोआ की खेप भेजी जा रही है। परिवहन का सबसे सुलभ साधन रोडवेज बस या फिर हाईवे पर दौड़ने वालीं लग्जरी बसें हैं।
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जानकारी के अनुसार धंधेबाज मिलावटी खोआ को बसों में लादकर पहले से तय प्वाइंट की पर्ची थमा देते हैं। उसपर खोआ लेने वाला का मोबाइल नंबर भी लिखा होता है। बस चालक या परिचालक तय प्वाइंट पर पहुंचने से पहले उपलब्ध कराए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क साधकर खोआ की खेप को उतारकर आगे बढ़ जाते हैं। दूर खड़ा लोकल एजेंट यह सबकुछ देखता रहता है। माहौल अनुकूल होने पर छोटे वाहनों पर खोआ लादकर तय स्थान पर पहुंचा देता है।
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ऐसे में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को भनक तक नहीं लग पता है। विभाग सिर्फ नमूना भरने और कभी-कभार सटीक मुखबिरी के आधार पर मिलावटी खोआ और पनीर पकड़ कर खुद का पीठ थपथपाने के अलावा और कुछ नहीं कर पाता है। सहालग चल रहा है, एक सप्ताह बाद होली है और इसके बाद ईद आ जाएगा।
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विभाग की मानें तो सहालग की वजह से खोआ और पनीर की सबसे ज्यादा खपत है। इस मौके का लाभ उठाने के लिए धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। इन पर शिकंजा कसने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा अयोध्या-गोरखपुर हाईवे पर भी सचल टीम लगाई गई है। खोआ उतरने वाले कुछ जगहों को चिह्नित किया गया है।
सूत्र बताते हैं कि धंधेबाजों ने विभाग में भी भेदिया पाल रखे हैं। यही वजह है कि विभाग की चाल की धंधेबाजों को पहले ही भनक लग जाती है और खोआ की खेप पहुंचाने का रूट या साधन बदल देते हैं। जैसे बस की जगह छोटी गाड़ियों का इस्तेमाल करने लगते हैं। विभागीय अधिकारी बसों पर टकटकी लगाए रखते हैं और छोटी गाड़ी से मिलावटी खोआ अपने स्थान पर पहुंच चुका होता है।
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बस्ती डिपो ने खोआ ढोने पर लगाई रोक
कुछ दिनों पहले रोडवेज की दो बसों से साढ़े 11 क्विंटल मिलावटी खोआ उतराने के बाद बस्ती डिपो के एआरएम आयुष भटनागर ने अपने डिपो की बस खोआ ढोने पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अभी उन्हें यह जानकारी नहीं उपलब्ध कराई है कि किस डिपो की बस से खोआ लाया गया था। यदि विभाग यह जानकारी उपलब्ध करा दे तो किस डिपो की बस थी तो वहां के अधिकारियों को पत्र लिखकर संबंधित चालक-परिचालक पर कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि जिस दिन यह मामला प्रकाश में आया था, उस दिन कानपुर से आने वाली बस्ती डिपो की सभी बसों की छानबीन कराई गई तो पता चला कि खोआ की लोडिंग नहीं हुई थी।


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मिलावटी खोआ-पनीर से लिवर और किड़नी को खतरा
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. वीके वर्मा ने बताया कि मिलावटी खोआ तैयार करने के लिए शकरकंदी, सिंघाड़े का आटा, आलू और मैदे का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा वजन बढ़ाने के लिए स्टार्च, आयोडीन, आलू और आटा आदि मिलाया जाता है। असली खोआ की तरह दिखने के लिए इसमें कुछ केमिकल मिलाए जाते हैं। मिल्क पाउडर में वनस्पति घी मिलाकर भी तैयार किया जाता है। यह सेहत के लिए बहुत हानिकारक है। मिलावटी खोआ और पनीर के सेवन से लिवर-किड़नी डैमेज हो सकता है। शुद्ध खोआ-पनीर की पहचान कर ही इसका सेवन करें।
कोट
मिलावटखोरों पर अंकुश लगाने के लिए विभाग लगातार छापा मार रहा है। पकड़े जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-चितरंजन कुमार सिंह, जिला अभिहित अधिकारी
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