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Basti News: फिर बजने लगा कानफोडू डीजे
Tue, 03 Oct 2023 01:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 03 Oct 2023 01:26 AM IST
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निर्धारित सीमा से अधिक तीब्र आवाज में बजाए जा रहे डीजे व लाउडस्पीकर
- तीन दिन के भीतर पुलिस की जांच में पकड़ में आई निर्देश की अवहेलना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। डीजे और धार्मिक स्थलों पर निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध है। बावजूद इसके तमाम मंदिर,मस्जिदों पर धुआंधार तेज आवाज में लाउडस्पीकर बज रहे हैं। धार्मिक या अन्य आयोजनों में कानफोडू डीजे बजाए जा रहे हैं। रविवार को जांच की गई तो सिर्फ एक क्षेत्र के 13 स्थलों पर निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजते पाए गए। आईजी आरके भारद्वाज के अनुसार, इसे लेकर रेंज के सभी थाना क्षेत्रों में जांच कराई जा रही है।
रविवार को पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र के धार्मिक स्थलों पर लगे अनाधिकृत लाउडस्पीकर उतरवाने का अभियान चलाया गया था। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मंदिर-मस्जिद हो जलसा-जुलूस, किसी भी आयोजनों में कानफोडू डीजे या लाउडस्पीकर के शोर को अब अनसुना नहीं किया जाएगा। इसे लेकर एक बार फिर सख्ती शुरू हो गई है। नवरात्र, दशहरा, दुगार्पूजा के दौरान ध्वनि प्रदूषण रोकने और सामाजिक सौहार्द के लिए इस पर लगाम लगाई जा रही है। तीन दिन के भीतर ही पुलिस प्रशासन ने इसे लेकर मंशा जाहिर कर दी है।
शनिवार को गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान डीजे बजाने वाले छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। जबकि रविवार को 13 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवा दिए गए। 25 मई को ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने सूबे की कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान इस संबंध में बस्ती के आईजी, एसपी समेत सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए। कहा गया था कि प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर फिर से तीब्र ध्वनि से लाउस्पीकर बजने लगे हैं। इसलिए इस पर सख्ती बरती जाए।
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यह है ध्वनि का मानक
एक लाउडस्पीकर की साउंड ध्वनि ही निर्धारित मानक व्यावसायिक एरिया में 55 से 60 डेसिबल तक पर्याप्त मानी है। आवासीय एरिया में 45 से 55 डेसिबल तक आवाज मान्य है। अगर कोई धार्मिक स्थल अपने परिसर में निर्धारित मानक के अंदर दो लाउडस्पीकर बजा सकता है तो वहां के साउंड सिस्टम का परीक्षण कराने के बाद उसे दो लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इन लाउडस्पीकरों का मुंह परिसर के अंदर ही रहेगा। किसी भी धार्मिक स्थल या निजी समारोह में निर्धारित मानक से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजने की शिकायत पर आवाज का परीक्षण कराने के बाद तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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विशेषज्ञ बोले-50 डेसिबल तक सुरक्षित
एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 50 डेसिबल तक की ध्वनि सहन करने लायक होती है, लेकिन डीजे की ध्वनि की तीव्रता करीब 500 डेसिबल तक पहुंच जाती है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एसएस कन्नौजिया का कहना है कि तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है। डीजे के तेज आवाज मस्तिष्क में तनाव पैदा करती है। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। रक्तचाप बढ़ जाता है। खून में शर्करा बढ़ने लगती है। हृदय की धड़कन तेज हो जाती है। तेज आवाज के कारण कार्यक्षमता घटती है और एकाग्रता नष्ट हो जाती है। गर्भपात की शिकायत बढ़ती है तथा मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे पैदा हो सकते हैं।
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धर्मगुरू भी शोर के खिलाफ
गायत्री मंदिर पीठ के परिव्राजक पं. राम प्रसाद त्रिपाठी कहते हैं कि डीजे धुन नहीं बल्कि उपद्रव का प्रतीक है। गीत व संगीत का स्वर मधुर होता है, जिससे मन मस्तिष्क को शांति मिलती है, मगर डीजे का शोर सनातन संस्कृति के विपरीत है। इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
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- तीन दिन के भीतर पुलिस की जांच में पकड़ में आई निर्देश की अवहेलना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। डीजे और धार्मिक स्थलों पर निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजाने पर प्रतिबंध है। बावजूद इसके तमाम मंदिर,मस्जिदों पर धुआंधार तेज आवाज में लाउडस्पीकर बज रहे हैं। धार्मिक या अन्य आयोजनों में कानफोडू डीजे बजाए जा रहे हैं। रविवार को जांच की गई तो सिर्फ एक क्षेत्र के 13 स्थलों पर निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजते पाए गए। आईजी आरके भारद्वाज के अनुसार, इसे लेकर रेंज के सभी थाना क्षेत्रों में जांच कराई जा रही है।
रविवार को पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र के धार्मिक स्थलों पर लगे अनाधिकृत लाउडस्पीकर उतरवाने का अभियान चलाया गया था। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मंदिर-मस्जिद हो जलसा-जुलूस, किसी भी आयोजनों में कानफोडू डीजे या लाउडस्पीकर के शोर को अब अनसुना नहीं किया जाएगा। इसे लेकर एक बार फिर सख्ती शुरू हो गई है। नवरात्र, दशहरा, दुगार्पूजा के दौरान ध्वनि प्रदूषण रोकने और सामाजिक सौहार्द के लिए इस पर लगाम लगाई जा रही है। तीन दिन के भीतर ही पुलिस प्रशासन ने इसे लेकर मंशा जाहिर कर दी है।
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शनिवार को गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान डीजे बजाने वाले छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। जबकि रविवार को 13 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवा दिए गए। 25 मई को ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने सूबे की कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान इस संबंध में बस्ती के आईजी, एसपी समेत सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए। कहा गया था कि प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर फिर से तीब्र ध्वनि से लाउस्पीकर बजने लगे हैं। इसलिए इस पर सख्ती बरती जाए।
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यह है ध्वनि का मानक
एक लाउडस्पीकर की साउंड ध्वनि ही निर्धारित मानक व्यावसायिक एरिया में 55 से 60 डेसिबल तक पर्याप्त मानी है। आवासीय एरिया में 45 से 55 डेसिबल तक आवाज मान्य है। अगर कोई धार्मिक स्थल अपने परिसर में निर्धारित मानक के अंदर दो लाउडस्पीकर बजा सकता है तो वहां के साउंड सिस्टम का परीक्षण कराने के बाद उसे दो लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इन लाउडस्पीकरों का मुंह परिसर के अंदर ही रहेगा। किसी भी धार्मिक स्थल या निजी समारोह में निर्धारित मानक से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजने की शिकायत पर आवाज का परीक्षण कराने के बाद तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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विशेषज्ञ बोले-50 डेसिबल तक सुरक्षित
एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 50 डेसिबल तक की ध्वनि सहन करने लायक होती है, लेकिन डीजे की ध्वनि की तीव्रता करीब 500 डेसिबल तक पहुंच जाती है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एसएस कन्नौजिया का कहना है कि तीव्र ध्वनि की वजह से प्रजनन क्षमता घट जाती है। डीजे के तेज आवाज मस्तिष्क में तनाव पैदा करती है। इससे चिड़चिड़ापन बढ़ता है। रक्तचाप बढ़ जाता है। खून में शर्करा बढ़ने लगती है। हृदय की धड़कन तेज हो जाती है। तेज आवाज के कारण कार्यक्षमता घटती है और एकाग्रता नष्ट हो जाती है। गर्भपात की शिकायत बढ़ती है तथा मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चे पैदा हो सकते हैं।
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धर्मगुरू भी शोर के खिलाफ
गायत्री मंदिर पीठ के परिव्राजक पं. राम प्रसाद त्रिपाठी कहते हैं कि डीजे धुन नहीं बल्कि उपद्रव का प्रतीक है। गीत व संगीत का स्वर मधुर होता है, जिससे मन मस्तिष्क को शांति मिलती है, मगर डीजे का शोर सनातन संस्कृति के विपरीत है। इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।