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हर चौराहे पर जाम, आम आदमी हलकान
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रोडवेज स्थित नेहरू तिराहे पर लगा जाम। संवाद
- फोटो : BASTI
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हर चौराहे पर जाम, आम आदमी हलकान
शहरी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पटरी से उतरी
मुख्य चौराहा और बाजारों में जाम झेलना मजबूरी
बस्ती। जाम ने शहर को ऐसे जकड़ रखा है कि राह चलना मुश्किल हो गया है। इसका मुख्य कारण बेतरतीब पार्किंग और अतिक्रमण है। हर चौराहे पर आए दिन जाम से यात्री हलकान हैं। हालांकि, जाम से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने तमाम प्रयास किए, मगर नतीजा ढाक के तीन पात साबित हुआ।
शहर के पॉश इलाका कंपनी बाग में सिग्नल सिस्टम पर यातायात व्यवस्था संचालित होती है, मगर यहां पटरियों पर अतिक्रमण के चलते सड़क संकरी हो गई है। चौराहे पर एक ओर अतिक्रमण और दूसरी ओर टैक्सी स्टैंड है। इस चौराहे से पानी टंकी कटरा की ओर ओर राह चलना और भी मुश्किल है। क्योंकि यहां पटरियों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। सुभाष चौक पर दिनभर जाम लगा रहता है। कटरा चौराहे की भी यही स्थिति है। कुछ ऐसा ही हाल मालवीय मार्ग का है।
रौता चौराहे पर वाहनों की भीड़ रहती है। सुबह और शाम को इस चौराहे से निकलने में पसीना छूट जाता है। स्कूल की छुट्टी के समय यहां घंटों जाम लग जाता है। यहां सड़क की एक पटरी पर सब्जी की दुकान लगती है तो दूसरी तरफ ठेले व अस्थायी दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है।
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नेहरू तिराहे पर जाम के चलते दिन भर वाहन रेंगते हैं। यहां एक ओर दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है तो दूसरी ओर अवैध टैक्सी है। गांधीनगर में राजकीय इंटर कॉलेज से लेकर गुरु गोविंद सिंह चौक तक अतिक्रमण का बोलबाला है। करीब दस फीट की सड़क की पटरियों पर ठेला, सब्जी की दुकानें लगती हैं। दुकानदारों के बोर्ड सजे रहते हैं। सड़क के बीचों बीच पार्किंग है। बस्ती क्षेत्र के दक्षिण दरवाजा, स्टेशन चौराहा, नई बाजार व पांडेय बाजार का भी यही हाल है।
...
कोट
अतिक्रमण हटाने की रणनीति प्रशासन से चर्चा कर तय की जा रही है। तकनीकी कारणों के चलते अस्थायी अतिक्रमण नहीं हटाया जा पाया है। इसका कोई न कोई रास्ता नगर पालिका निकालेगी।
दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका
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शहरी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पटरी से उतरी
मुख्य चौराहा और बाजारों में जाम झेलना मजबूरी
बस्ती। जाम ने शहर को ऐसे जकड़ रखा है कि राह चलना मुश्किल हो गया है। इसका मुख्य कारण बेतरतीब पार्किंग और अतिक्रमण है। हर चौराहे पर आए दिन जाम से यात्री हलकान हैं। हालांकि, जाम से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने तमाम प्रयास किए, मगर नतीजा ढाक के तीन पात साबित हुआ।
शहर के पॉश इलाका कंपनी बाग में सिग्नल सिस्टम पर यातायात व्यवस्था संचालित होती है, मगर यहां पटरियों पर अतिक्रमण के चलते सड़क संकरी हो गई है। चौराहे पर एक ओर अतिक्रमण और दूसरी ओर टैक्सी स्टैंड है। इस चौराहे से पानी टंकी कटरा की ओर ओर राह चलना और भी मुश्किल है। क्योंकि यहां पटरियों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। सुभाष चौक पर दिनभर जाम लगा रहता है। कटरा चौराहे की भी यही स्थिति है। कुछ ऐसा ही हाल मालवीय मार्ग का है।
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रौता चौराहे पर वाहनों की भीड़ रहती है। सुबह और शाम को इस चौराहे से निकलने में पसीना छूट जाता है। स्कूल की छुट्टी के समय यहां घंटों जाम लग जाता है। यहां सड़क की एक पटरी पर सब्जी की दुकान लगती है तो दूसरी तरफ ठेले व अस्थायी दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है।
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नेहरू तिराहे पर जाम के चलते दिन भर वाहन रेंगते हैं। यहां एक ओर दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है तो दूसरी ओर अवैध टैक्सी है। गांधीनगर में राजकीय इंटर कॉलेज से लेकर गुरु गोविंद सिंह चौक तक अतिक्रमण का बोलबाला है। करीब दस फीट की सड़क की पटरियों पर ठेला, सब्जी की दुकानें लगती हैं। दुकानदारों के बोर्ड सजे रहते हैं। सड़क के बीचों बीच पार्किंग है। बस्ती क्षेत्र के दक्षिण दरवाजा, स्टेशन चौराहा, नई बाजार व पांडेय बाजार का भी यही हाल है।
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कोट
अतिक्रमण हटाने की रणनीति प्रशासन से चर्चा कर तय की जा रही है। तकनीकी कारणों के चलते अस्थायी अतिक्रमण नहीं हटाया जा पाया है। इसका कोई न कोई रास्ता नगर पालिका निकालेगी।
दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका