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साहित्य भूषण से सम्मानित हुए ‘जगमग’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jan 2016 12:36 AM IST
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बस्ती। हिन्दी साहित्य और हास्य व्यंग्य के क्षेत्र में देश में महत्वपूर्ण
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स्थान अर्जित करने वाले डॉ. रामकृष्णलाल ‘जगमग’ को प्रेम चंद्र साहित्य
एवं जन कल्याण संस्थान द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर में ‘साहित्य भूषण’ सम्मान
से सम्मानित किया गया। उन्हें अंग वस्त्र, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न दिए
गए।
संस्थान के अध्यक्ष सत्येंद्रनाथ मतवाला ने कहा कि आर्थिक होते समाज की संवेदना को साहित्यकार की बचा सकते हैं। जगमग उनमें से एक हैं। उनके चुटीले व्यंग्य व्यवस्था को आईना दिखाते हैं। वरिष्ठ चिकित्सक, साहित्यकार डॉ वीके वर्मा ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, लक्ष्मीनारायण लाल की धरती पर ‘जगमग जी’ साहित्य के नवांकुरों को दिशा दे रहे हैं।
श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि ‘जगमग जी’ की चाशनी प्रसिद्ध हो चुकी है। डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग ने कहा कि अपनों के बीच सम्मान का कोई आग्रह नहीं होता। अपने परिवार में सम्मानित होना दुर्लभ अवसर है। इससे और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर कवियों ने काव्य पाठ किया। हरिस्वरूप दुबे, डॉ रामचंद्रलाल श्रीवास्तव, मो. वसीम अंसारी, शव्वीर अहमद, पेशकार मिश्र, लालजी पांडेय, दीनानाथ जगदीश आदि ने ‘जगमग जी’ की साहित्यिक कृतियों पर प्रकाश डाला।
ताजिर वस्तवी, पं.चंद्रबली मिश्र, आतिश सुल्तानपुरी, रामचंद्र राजा, हरीश दरवेश, रहमान अली रहमान, रामकृष्ण पांडेय आदि ने काव्य पाठ कर वर्तमान परिदृश्य को शब्द दिया। कार्यक्रम में अनेक साहित्यकार एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोग मौजूद रहे।
संस्थान के अध्यक्ष सत्येंद्रनाथ मतवाला ने कहा कि आर्थिक होते समाज की संवेदना को साहित्यकार की बचा सकते हैं। जगमग उनमें से एक हैं। उनके चुटीले व्यंग्य व्यवस्था को आईना दिखाते हैं। वरिष्ठ चिकित्सक, साहित्यकार डॉ वीके वर्मा ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, लक्ष्मीनारायण लाल की धरती पर ‘जगमग जी’ साहित्य के नवांकुरों को दिशा दे रहे हैं।
श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि ‘जगमग जी’ की चाशनी प्रसिद्ध हो चुकी है। डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग ने कहा कि अपनों के बीच सम्मान का कोई आग्रह नहीं होता। अपने परिवार में सम्मानित होना दुर्लभ अवसर है। इससे और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर कवियों ने काव्य पाठ किया। हरिस्वरूप दुबे, डॉ रामचंद्रलाल श्रीवास्तव, मो. वसीम अंसारी, शव्वीर अहमद, पेशकार मिश्र, लालजी पांडेय, दीनानाथ जगदीश आदि ने ‘जगमग जी’ की साहित्यिक कृतियों पर प्रकाश डाला।
ताजिर वस्तवी, पं.चंद्रबली मिश्र, आतिश सुल्तानपुरी, रामचंद्र राजा, हरीश दरवेश, रहमान अली रहमान, रामकृष्ण पांडेय आदि ने काव्य पाठ कर वर्तमान परिदृश्य को शब्द दिया। कार्यक्रम में अनेक साहित्यकार एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोग मौजूद रहे।