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Basti News: ऋण योजनाओं की भरमार, फिर भी दौड़ भाग कर लौट जा रहे बेरोजगार

Wed, 30 Aug 2023 01:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Wed, 30 Aug 2023 01:09 AM IST
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industrial estate development
औद्योगिक क्षेत्र बस्ती
बस्ती। उद्योग एवं उद्यम से बस्ती गुलजार नहीं हो पा रही है। शासन से ऋण योजनाओं की भरमार है, फिर भी उद्यम की राह पर चलना आसान नहीं है। लघु उद्योगों के क्षेत्र में स्थापित होना तो सबसे कठिन है। नए बेरोजगारों को इस क्षेत्र में अवसर नहीं मिल पा रहा है। विभिन्न ऋण योजनाएं उन्हें लुभा रही हैं, मगर हकीकत से वाकिफ होने के बाद वह सुस्त पड़ जा रहे हैं। अमूमन पुराने उद्यमी ही इन योजनाओं से लाभ उठा रहे हैं।
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स्वावलंबी बनने के लिए शासन स्तर से पुरजोर कोशिश चल रही है। ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के प्रदेश स्तरीय आयोजन से प्रत्येक जनपद को जोड़े जाने की कवायद चल रही है। ताकि हर ओर उद्योगों की बहार हो सके। इंवेस्टर्स समिट के तहत बड़े उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं लघु उद्योग के लिए जनपद स्तर पर छूट के साथ ऋण योजनाएं संचालित हो रही हैं। इसमें नए उद्योग लगाने के लिए शासन स्तर से प्रोत्साहन धनराशि भी मुहैया कराई जा रही है। प्रधान राेजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना और एक जनपद- एक उत्पाद योजना बेरोजगारों के लिए सुनहरा अवसर प्रदान करने वाली है।
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इसमें उद्यमी को 25 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है। इससे आकर्षित होकर विभिन्न क्षेत्रों में मिनी उद्योग लगाने की रुचि रखने वाले लोग आवेदन भी कर रहे हैं। विडंबना यह कि दौड़ भाग करने के बाद निराश होकर घर बैठ जाने वालों की लंबी फेहरिस्त है। खासकर नए लोगों के लिए इन योजनाओं से लाभ उठा पाना संभव नहीं हो पा रहा है। वर्तमान वित्तीय सत्र में जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से लघु उद्योग के लिए जिले में क्रियान्वित इन तीनों योजनाओं के तहत 273 आवेदन विभिन्न बैंकों को ऋण देने के लिए प्रेषित किए गए। अभी तक केवल 78 फाइलों पर ही बैंकों से ऋण की स्वीकृति मिल पाई है। शेष 195 फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। योजनावार स्थिति काफी चिंताजनक है।
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ओडी-ओपी में केवल 17 लोगों का ऋण स्वीकृत
एक जनपद- एक उत्पाद योजना में इस वर्ष 22 लघु उद्योग इकाइयों को स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित है। इन पर सब्सिडी के रूप में 66 लाख रुपये अनुदान की व्यवस्था है। विभाग ने कुल 35 आवेदन स्वीकार किए। जिन्हें ऋण मुहैया कराने के लिए विभिन्न बैंकों में प्रेषित किया गया। बैंकों की ओर से केवल 17 आवेदकों के ऋण को स्वीकृति मिली है। जिन पर 43.88 लाख रुपये सब्सिडी दी गई है। 18 आवेदन बैंकों ने लौटा दिए हैं।
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अधर में लटकी एमवाईएसवाई की 58 ऋण फाइलें
मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में इस बार 58 ऋण फाइलें अधर में लटकी हैं। इसमें 111 इकाइयों का भौतिक और 215.34 लाख रुपये का वित्तीय लक्ष्य निर्धारित है। इसके सापेक्ष 98 लोगों का आवेदन ऋण के लिए बैंकों में भेजा गया। केवल 51 फाइलों को ही स्वीकृति मिली। इसमें भी महज 40 फाइलों पर अभी तक ऋण मुहैया कराया गया है।
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पीएमईजीपी में 102 फाइलें लंबित
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 88 फाइल अस्वीकृत कर दी गई है। 69 इकाइयों के लक्ष्य के सापेक्ष विभाग ने 140 आवेदन स्वीकार किए। जिन्हें ऋण हेतु बैंकों में भेजा गया। बैंकों ने महज 52 पर ही स्वीकृति की मुहर लगाई। ऋण केवल 21 लोगों को ही मिल पाया है। 24 फाइलों पर केवीआईसी की जांच बैठ गई है, जबकि सात फाइलों पर अभी सब्सिडी नहीं मिली है।
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जानिए, क्यों निरस्त हो रहीं की फाइलें
शासन के अनुसार रोजगार परक योजनाओं में ऋण के लिए किसी तरह की बंधक संपत्तियों की अनिवार्यता नहीं है। इसमें लाभार्थी को मार्जिन मनी के रूप में 25 प्रतिशत सब्सिडी अनुमन्य है। मगर बैंकों के नियम इसके ठीक उलट हैं। ऋण के लिए पहली शर्त आवेदक को आयकर रिटर्न का ब्योरा देना होता है। यह बिल्कुल युवा बेरोजगारों के लिए संभव नहीं है। दूसरी शर्त ऋण धनराशि के बराबर की संपत्ति को बैंक में बंधक रखना अनिवार्य है। इसी के समकक्ष हैसियत के सगे संबंधी की गारंटी भी देनी होती है। बैंक की यह जटिल प्रक्रिया नए आवेदक नहीं पूरा कर पाते हैं, जिससे उनका आवेदन रिजेक्ट कर दिया जाता है। अंत में इन योजनाओं का लाभ पुराने कारोबारियों को मिल पाता है।
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केस- एक
हमने ओडी- ओपी योजना में फर्नीचर उद्योग के लिए आवेदन किया था। उद्योग विभाग ने मेरे आवेदन को पीएनबी में ऋण के लिए प्रेषित किया। वहां का नियम जानकर पीछे हट गए। न मेरे बंधक रखने के लिए संपत्ति है और न ही कोई अच्छी हैसियत का गारंटर।
-मोहम्मद इरफान, मीर मझौआ।
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केस- दो
ऋण योजनाएं अच्छी हैं। पढ़ाई के बाद स्वावलंबी बनने के शोर में उद्योग लगाने की इच्छा हुई। सरसों तेल की फैक्ट्री के लिए प्रस्ताव तैयार कराया। मेरा आवेदन बैंक में प्रेषित हो गया। वहां गारंटर, आयकर रिटर्न और बंधक योग्य संपत्ति के प्रपत्रों की डिमांड की गई। जब हम अभी नए हैं और उद्योग शुरू करने जा रहे हैं, तो यह दस्तावेज कहां से उपलब्ध करा सकते हैं। इसलिए हम दौड़ भागकर चुप हो गए।
-श्यामाकांत मिश्र, मंझरिया।
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वर्जन-
योजनावार लाभार्थियों का चयन हर बार किया जाता है। उन्हें विभिन्न तरह के प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था है। सभी योजनाओं में ऋण के लिए आवेदन बैंकों में भेज दिए गए हैं। ऋण मुहैया कराने की जिम्मेदारी बैंक की होती है। विभाग केवल सब्सिडी देता है।

-हरेंद्र कुमार, उपायुक्त उद्योग।
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वर्जन-
ऋण संबंधी फाइलों पर पूरा ध्यान दिया जाता है। इसमें बैंक की भी भूमिका है। यह उसे तय करना होता है कि लाभार्थी लिए गए ऋण को कैसे वापस करेगा। यदि इस मानक के अनुरूप लाभार्थी नहीं मिलते हैं तो उनकी फाइलें अस्वीकृति कर दी जाती है। फिलहाल अधिक से अधिक लोगों को ऋण योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है।
-आरएन मौर्या, लीड बैंक मैनेजर।
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