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Basti News: वीबी-जी राम जी में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, मेट की जिम्मेदारी भी संभाल रहीं
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बस्ती। वीबी-जी राम जी योजना में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। घर की जिम्मेदारियां संभालने वाली महिलाएं अब गांव में ही रोजगार पाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं। महिला श्रमिकों के साथ महिला मेट भी कार्यस्थलों पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
जिले की 1187 ग्राम पंचायतों में 866 महिला मेट पंजीकृत हैं। इनमें 746 सक्रिय हैं और कार्यस्थलों पर मेट की जिम्मेदारी निभा रही हैं। एक कार्यस्थल पर 20 श्रमिकों के काम करने पर एक मेट की तैनाती की जाती है। महिला मेट को कार्य की निगरानी और अन्य जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है।
गांवों में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पहले मनरेगा के नाम से संचालित योजना अब वीबी-जी राम जी के नाम से चल रही है। इसके तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों में जॉब कार्डधारकों को रोजगार दिया जाता है। निर्धारित मजदूरी 252 रुपये रोजाना है। पहले 100 दिन तक रोजगार मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन किया गया है।
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जिले में करीब 2.50 लाख जॉब कार्डधारक हैं, जिनमें करीब 2.11 लाख सक्रिय हैं। योजना में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 2.22 लाख महिला श्रमिक दर्ज हैं, जबकि करीब 1.40 लाख सक्रिय हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं तालाब, मेड़बंदी समेत अन्य विकास कार्यों में पुरुष श्रमिकों के साथ काम कर रही हैं।
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20,637 महिला श्रमिकों को मिला काम
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष में 20,637 महिला श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। काम मिलने से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए गांव में ही रोजगार का अवसर मिलने से उन्हें काम के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा है।
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548 ग्राम पंचायतों में चल रहे 19,225 काम
इस वित्तीय वर्ष में योजना के तहत 5,69,570 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में जिले की 548 ग्राम पंचायतों में 19,225 कार्य चल रहे हैं। इनमें महिला श्रमिक भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रही हैं।
कोट
योजना में महिला श्रमिकों की संख्या बढ़ी है। लक्ष्य के अनुसार उन्हें काम उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
-संजय शर्मा, उपायुक्त श्रम रोजगार, बस्ती
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जिले की 1187 ग्राम पंचायतों में 866 महिला मेट पंजीकृत हैं। इनमें 746 सक्रिय हैं और कार्यस्थलों पर मेट की जिम्मेदारी निभा रही हैं। एक कार्यस्थल पर 20 श्रमिकों के काम करने पर एक मेट की तैनाती की जाती है। महिला मेट को कार्य की निगरानी और अन्य जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है।
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गांवों में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पहले मनरेगा के नाम से संचालित योजना अब वीबी-जी राम जी के नाम से चल रही है। इसके तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों में जॉब कार्डधारकों को रोजगार दिया जाता है। निर्धारित मजदूरी 252 रुपये रोजाना है। पहले 100 दिन तक रोजगार मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन किया गया है।
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जिले में करीब 2.50 लाख जॉब कार्डधारक हैं, जिनमें करीब 2.11 लाख सक्रिय हैं। योजना में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 2.22 लाख महिला श्रमिक दर्ज हैं, जबकि करीब 1.40 लाख सक्रिय हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं तालाब, मेड़बंदी समेत अन्य विकास कार्यों में पुरुष श्रमिकों के साथ काम कर रही हैं।
20,637 महिला श्रमिकों को मिला काम
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष में 20,637 महिला श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। काम मिलने से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए गांव में ही रोजगार का अवसर मिलने से उन्हें काम के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा है।
548 ग्राम पंचायतों में चल रहे 19,225 काम
इस वित्तीय वर्ष में योजना के तहत 5,69,570 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में जिले की 548 ग्राम पंचायतों में 19,225 कार्य चल रहे हैं। इनमें महिला श्रमिक भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रही हैं।
कोट
योजना में महिला श्रमिकों की संख्या बढ़ी है। लक्ष्य के अनुसार उन्हें काम उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
-संजय शर्मा, उपायुक्त श्रम रोजगार, बस्ती