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Basti News: 2013 में 84 कोसी परिक्रमा पर लगी थी रोक, तत्कालीन सरकार से हुई थी साधु- संतों की टकराहट

Thu, 11 Jan 2024 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Thu, 11 Jan 2024 12:06 AM IST
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In 2013, there was a ban on 84 Kosi Parikrama, there was a clash between saints and sages with the then government.
बस्ती। राम मंदिर आंदोलन की लौ बुझने नहीं पाई। 90 के दशक में कारसेवकों पर गोली चली बाद में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ। इसके बाद भी हिंदू वादी संगठनों के नेता, कार्यकर्ता और साधु- संत चुप नहीं बैठे। 2013 में साधु- संतों से तत्कालीन प्रदेश सरकार की फिर तनातनी हो गई थी।
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84 कोसी परिक्रमा मार्ग के आगाज पर सरकार ने रोक लगा थी। साधु- संत इसे मानने को तैयार नहीं थे। नतीजा मखौड़ा से लेकर परिक्रमा मार्ग तक पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की गारद उतार दी गई थी। साधु- संतों को उनके आश्रम से ही गिरफ्तार कर लिया गया। उस समय तत्कालीन गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ (वर्तमान में मुख्यमंत्री) ने लोकसभा में साधु- संतों की तरफ से आवाज बुलंद की थी। तत्कालीन सत्ता पक्ष के लोगों से उनकी करारा बहस हुई थी। दरअसल राम मंदिर निर्माण के निमित्त विश्व हिंदू परिषद द्वारा 25 अगस्त 2013 को मखौड़ा धाम से 84 कोसी परिक्रमा शुरू करने का ऐलान किया। तत्कालीन सरकार इस ऐलान के बाद सकते में आ गई।
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विहिप के अनुरोध पत्र को अस्वीकार कर दिया गया। इसी के बाद सरकार से हिंदुवादी संगठनों और साधु- संतों की सरकार से टकराहट बढ़ गई। साधु- संत परिक्रमा करने को लेकर अड़े रहे। सरकार ने मखौड़ा से लेकर परिक्रमा मार्ग तक पुलिस एवं अन्य सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा लगा दिया। अयोध्या और बस्ती अंचल में एक बार फिर 1990 और 1992 जैसे हालात बन गए। अंदर ही अंदर बड़े आंदोलन की नींव तैयार होने लगी। इसकी भनक लगते ही साधु- संत, विहिप एवं अन्य हिंदू वादी संगठनों के बड़े चेहरे तलाशे जाने लगे।
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कुछ महंत और नेता मंदिरों व घरों में नजरबंद किए गए तो कुछ लोगों को हिरासत में भी रखा गया। अंतत: परिक्रमा शुरू नहीं हो पाई थी। उस समय गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ भी साधु- संतों के पक्ष में मुखर हो गए थे। उन्होंने सदन में तत्कालीन प्रदेश सरकार का घेराव किया। सत्ता पक्ष के लोगों से उनकी जमकर बहस हुई थी।
यह था घटनाक्रम

30 जुलाई 2013 को विहिप ने 25 अगस्त से अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा का ऐलान किया। 17 अगस्त को तत्कालीन प्रदेश सरकार से इसकी अनुमति मांगी गई। दो दिन बाद 19 अगस्त को यूपी सरकार ने परिक्रमा पर रोक लगा दी। इसी के बाद टकराहट बढ़ गई। विहिप 25 अगस्त से 13 सितंबर के बीच परिक्रमा पर अड़ा हुआ थी। इसी के बाद विहिप के शीर्ष नेताओं और साधु- संतों की गिरफ्तारी शुरू हो गई।

चश्मदीद बताते हैं गांव- गांव हो रही थी संतों की तलाश
मखौड़ा निवासी प्रभुनाथ पांडेय उन दिनों को याद कर सिहर जाते हैं। बताया कि अगस्त 2013 में मखौड़ा पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। मंदिर से लेकर सड़क कड़ा पहरा था। आने- जाने वालों की सघन तलाशी ली जा रही थी। लोग दहशत में रह रहे थे। विहिप कार्यकर्ताओं और साधु- संतों के तलाश में पुलिस गांव- गांव खाक छान रही थी। मखौड़ा राम जानकी मंदिर के पुजारी सूर्य नारायण दास वैदिक ने बताया परिक्रमा की शुरूआत और समापन की तिथि निकट आते ही मंदिर परिसर और आसपास के स्थल पुलिस, पीएसी और रैपिड एक्शन फोर्स से भर गई थी। क्षेत्र के करनपुर से विहिप कार्यकर्ता को हिरासत में ले लिया गया। अयोध्या के संत राम विलाश वेदांती को उनके शिष्य के घर से हिरासत में लिया गया। इसके अलावा अन्य गिरफ्तारियां भी हुई थी।
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