फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   If reluctant to pay the facility fee, will keep wandering

Basti News: सुविधा शुल्क में की आनाकानी तो चक्कर काटते रह जाएंगे

Sat, 29 Apr 2023 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 29 Apr 2023 01:04 AM IST
विज्ञापन
If reluctant to pay the facility fee, will keep wandering
बस्ती। यदि आपने किसी भूमि की रजिस्ट्री (बैनामा) कराई है, तो उस पर काबिज होना भी आसान नहीं है। हो सकता है कि आप उस भूमि को सुरक्षित करने के लिए चहारदीवारी बनाने जाएं, तो कोई आकर रोक दे। कहने लगे कि आप उसकी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। ऐसे में आप की परेशानी बढ़ सकती है क्योंकि इसके पीछे भी बड़ा खेल है। समस्या आने पर आपको स्थानीय लेखपाल से मिलना पड़ेगा। वह पैमाइश के लिए आने के लिए आपसे कुछ फरमाइश करेंगे। उनकी बात मान लेंगे तो शायद मामला सुलट जाएगा वरना तहसील के चक्कर काटते-काटते महीनों गुजर जाएंगे। तहसील में ऐसे लगभग ढाई हजार से अधिक मामले हैं, जिनके निस्तारण के लिए तारीख लग रही है।
विज्ञापन

भूमि का बैनामा कराने के बाद खारिज दाखिल की प्रक्रिया होती है। भूमि खरीदने वाले लोगों का नाम चढ़ने के बाद खतौनी जारी होती है। इसके बाद खरीदार जब भूमि पर कब्जा करने पहुंचते हैं, तो उनको कई समस्याओं का सामना करना पढ़ता है। अक्सर ऐसे प्रकरण सामने आते हैं, जिनमें अगल-बगल के लोग नए भू स्वामी को कब्जा नहीं करने देते जिस भूमि की रजिस्ट्री हुई रहती है। उस पर किसी तरह का निर्माण कार्य शुरू होने पर उसमें अपनी भूमि का हिस्सा बताकर आपत्ति जताते हुए काम रोक देते हैं। कहते हैं कि बिना पैमाइश के इस पर कोई काम नहीं हो सकेगा। पैमाइश कराकर पहले पत्थर नसब कराइए। इसके बाद ही निर्माण होने देंगे। यह मामला शुरू में थाने पहुंचता है। संपूर्ण समाधान दिवस और थाना समाधान दिवस पर अधिकारियों के आदेश पर पुलिस बल के साथ लेखपाल कानूनगो भूमि की माप करा देते हैं। इस दौरान यदि मामला नहीं खत्म हुआ, तो फिर तहसील का चक्कर लगाने की नौबत आ जाती है।
विज्ञापन

----
दावों के निस्तारण में गुजर जाते हैं कई महीने
वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि पक्की पैमाइश के लिए भू स्वामी को बाद दाखिल करना पड़ता है। अधिवक्ता श्याम नारायण सिंह के मुताबिक, राजस्व संहिता 2006/16 की धारा 24 के तहत पक्की पैमाइश (पत्थर नसब) के लिए एसडीएम कोर्ट में दावा दाखिल करना होता है। वहां से दावे को निस्तारण के लिए तहसील पर भेज दिया जाता है। उस दावे पर कानूनगो और लेखपाल की रिपोर्ट लगती है। इसमें ही खेल होता है। मामले के त्वरित निस्तारण के लिए फरमाइश करते हैं। उनकी बात मान ली गई, तो जल्दी काम हो जाएगा वरना कोई न कोई कमी बताकर पैमाइश में पेच में फंसा देते हैं, जिससे बाद चलता रहता है। पक्की पैमाइश के लिए प्रति गाटा एक हजार रुपये का ट्रेजरी चालान जमा कराने का नियम है।
विज्ञापन
विज्ञापन

---------
- चाचा के निधन के बाद उनका हिस्सा मुझे मिलना है। 2013 से वरासत के लिए परेशान हैं। विपक्षी के प्रभाव में आकर अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। दो साल पहले हाईकोर्ट से डायरेक्शन लेकर आया था। तब लगा कि अब काम हो जाएगा। इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। पीठासीन अधिकारी उच्च न्यायालय का आदेश तक नहीं मानते। दुखी होकर उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की है। उसमें 12 अप्रैल की तारीख मिली थी। इसके बावजूद पीठासीन अधिकारी की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। -राममूर्ति, अमीनडीह
-----
- मेरे बाबा जिनका नाम डेंगर था। उन्होंने मेरे नाम रजिस्टर्ड वसीयत की थी। उनके मरने के बाद 2016 में नायब तहसीलदार सदर हर्रैया के न्यायालय में नामांतरण वाद दाखिल किया। तब से मामला लटका हुआ है। दो साल पहले हाईकोर्ट से आदेश भी लाया था। इसके बावजूद अभी पीठासीन अधिकारी ने कोई आदेश पारित नहीं किया है। अब अवमानना याचिका की तैयारी कर रहा हूं। -अशोक, दुबौलिया।
----
वर्ष 2009 में मेरे भाई श्रीपत सिंह की मृत्यु के बाद उनके हिस्से की दो बीघा जमीन का वरासत भाई श्याम बहादुर सिंह व जगन्नाथ सिंह तथा भतीजे मनीष सिंह व रजनीश सिंह के बीच होना था, लेकिन जिम्मेदारों को सुविधा शुल्क न देने से मामला लटका रहा। प्रकरण को लेकर कई बार उपजिलाधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक के दरवाजे खटखटाया गए लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। दिसंबर 2022 में एसडीएम ने मौखिक रूप से इसके संबंध में कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए निर्देशित किया था, लेकिन कर्मचारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगा। -श्याम बहादुर सिंह गनवरिया कला रुधौली
-------
वरासत और वसीयत के मामलों को तेजी से निस्तारित कराया जा रहा है। सभी पीठासीन अधिकारियों को निर्देश भी दिए गए हैं कि पुराने मामलों के निस्तारण में तेजी लाएं। इसके बावजूद यदि कहीं लापरवाही की जा रही है तो इसका संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी। -गुलाब चंद्र, एसडीएम, हर्रैया
----
45 दिन का है नियम, लोग महीनों लगाते हैं चक्कर
अधिवक्ता राकेश पांडेय के अनुसार, पैमाइश का आवेदन होने पर 45 दिन में प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। ऐसे प्रकरण में लेखपाल और कानूनगो सीधे आवेदक (भूस्वामी) से संपर्क साधते हैं। यदि उनके मुताबिक आवेदक ने काम किया, तो जल्दी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। वरना किसी न किसी बहाने इसमें महीनों लग जाएंगे। इस चक्कर में आवेदक महीनों तहसील, लेखपाल और कानूनगो के चक्कर लगाते रहेंगे। ऐसे तमाम मामले हैं जिनमें लोग महीनों से चक्कर काट रहे हैं। जल्दी काम करने के लिए रुपयों की मांग की जाती है।

-----
क्या है पक्की पैमाइश
तहसील के अधिवक्ताओं के मुताबिक, भूमि के जिस गाटा संख्या की पैमाइश होती है। उसका नक्शा खसरा और खतौनी दावे में दाखिल किया जाता है। इसी के आधार पर लेखपाल की रिपोर्ट लगती है। संबंधित गाटा की पैमाइश करने के लिए अगल-बगल के लोगों को नोटिस दिया जाता है। इस दौरान नक्शा और जैसे कोई पुराना कुंआ, मंदिर, भवन, सड़क इत्यादि के आधार पर नापी होती है। नक्शा और अन्य चीजें दुरुस्त होने पर लेखपाल रिपोर्ट लगा देते हैं। इसको कच्ची पैमाइश कहते हैं। इस रिपोर्ट पर जब कोई आपत्ति नहीं आती है, तो एसडीएम इसे सत्यापित कर देते हैं। उनके सत्यापन के बाद भूमि की पक्की पैमाइश (पत्थर नबस) की प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed