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Basti News: जगह-जगह पानी एकत्र, संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा
Sun, 06 Aug 2023 11:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 06 Aug 2023 11:20 PM IST
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बस्ती। जेई एईएस व डेंगू के लिए जिला संवेदनशील है, लेकिन इसका प्रभाव अधिकारियों पर नहीं है। केवल कागजी कोरम पूरी कर यह लोग अपना काम चला रहे हैं। शहरी क्षेत्र के विभिन्न मुहल्लों में पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में नाले से लेकर नाली तक जलजमाव है। यही नहीं यहां खाली जमीन में भी पानी भर रहा है, जिससे मच्छर पनप रहे हैं। तमाम जागरूकता कार्यक्रम चलाने के बाद भी खतरे को लेकर सतर्कता नहीं है।
संक्रामक रोग यानी जेई- एईएस व डेंगू के अलावा बुखार के मरीज मिल रहे हैं। जिले में जून से अब तक इन रोगों के 28 मरीज मिले हैं। हालांकि यह सभी ठीक होकर अपने घर चले गए हैं, मगर मौसम की तल्खी संक्रामक रोगों को बढ़ावा देने के लिए माकूल बनी हुई है। ऐसे में संक्रामक बीमारी के खतरे की आशंका बढ़ गई है।
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यह क्षेत्र हैं संवेदनशील
शहर के अलावा गौर, सल्टौआ, हर्रैया व कुदरहा क्षेत्र स्वास्थ्य विभाग की सूची में संवेदनशील हैं। इन स्थानों के अलावा जिले भर में छिड़काव व फाॅगिंग को लेकर ब्लाॅक व ग्राम पंचायत स्तर पर व्यवस्था बनाई गई है, मगर सब कुछ कागजों में दौड़ रहा है।
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इस वर्ष सल्टौआ में मिला जेई का एक केस
इस वर्ष जून में सल्टौआ क्षेत्र में जापानी मस्तिष्क ज्वर का एक मरीज मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिस गांव में मरीज मिला था वहां निरोधात्मक कार्रवाई की गई है।
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जेई-एईएस व डेंगू के अब तक मिले 28 मरीज
जिले में अब तक जेई, एईएस व डेंगू के 28 मरीज मिले हैं। इसमें जून में जेई का एक मरीज मिला है, जबकि एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के 16 जबकि डेंगू के 11 मरीज मिले हैं। यह मरीज अप्रैल से लेकर अब तक आए हैं।
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एडीज से डेंगू तो क्यूलेक्स मच्छर जेई व एईएस का वाहन
डेंगू का कारक एडीज मच्छर है, जबकि जेई-एईएस क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। पानी से भी एईएस होता है। ऐसे में स्वच्छ पानी का प्रयोग सभी को करना चाहिए।
-आईए अंसारी, जिला मलेरिया अधिकारी
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स्वच्छ पानी से ही बीमारी से बच सकते हैं
डीएमओ ने कहा कि पानी एईएस का कारक है। ऐसे में इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा यदि संभव हो तो आरओ का उपयोग करें अन्यथा पानी को उबाल कर ठंडा करने के बाद पीएं।
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संक्रामक से रोग बचने के उपाय
- घर के आसपास पानी एकत्रित न होने दें
- सुअर को आबादी से दूर रखें
- गंदगी के आसपास अथवा घास के मैदान में शरीर को पूरा ढक कर रखें
- तेज बुखार होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें
- बिना डॉक्टर की सलाह कोई दवा न लें।
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शहरी क्षेत्र में छिड़काव व फाॅगिंग कराई जा चुकी है। नाला व नालियों में पानी का बहाव दुरुस्त करने का प्रयास पालिका कर रही है। जल्दी ही इससे निजात मिल जाएगी। वैसे सभी मुहल्लों में सफाई कर्मियों को सफाई के लिए लगाया गया है।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका परिषद
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ग्रामीण इलाकों में ब्लाकवार व ग्राम पंचायत वार फागिंग व छिड़काव की व्यवस्था बनाई गई है। गांवों में अभियान चलाकर इसे कराया गया है।
-डॉ. राजेश प्रजापति, सीडीओ
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संक्रामक रोग यानी जेई- एईएस व डेंगू के अलावा बुखार के मरीज मिल रहे हैं। जिले में जून से अब तक इन रोगों के 28 मरीज मिले हैं। हालांकि यह सभी ठीक होकर अपने घर चले गए हैं, मगर मौसम की तल्खी संक्रामक रोगों को बढ़ावा देने के लिए माकूल बनी हुई है। ऐसे में संक्रामक बीमारी के खतरे की आशंका बढ़ गई है।
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यह क्षेत्र हैं संवेदनशील
शहर के अलावा गौर, सल्टौआ, हर्रैया व कुदरहा क्षेत्र स्वास्थ्य विभाग की सूची में संवेदनशील हैं। इन स्थानों के अलावा जिले भर में छिड़काव व फाॅगिंग को लेकर ब्लाॅक व ग्राम पंचायत स्तर पर व्यवस्था बनाई गई है, मगर सब कुछ कागजों में दौड़ रहा है।
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इस वर्ष सल्टौआ में मिला जेई का एक केस
इस वर्ष जून में सल्टौआ क्षेत्र में जापानी मस्तिष्क ज्वर का एक मरीज मिला है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिस गांव में मरीज मिला था वहां निरोधात्मक कार्रवाई की गई है।
जेई-एईएस व डेंगू के अब तक मिले 28 मरीज
जिले में अब तक जेई, एईएस व डेंगू के 28 मरीज मिले हैं। इसमें जून में जेई का एक मरीज मिला है, जबकि एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के 16 जबकि डेंगू के 11 मरीज मिले हैं। यह मरीज अप्रैल से लेकर अब तक आए हैं।
एडीज से डेंगू तो क्यूलेक्स मच्छर जेई व एईएस का वाहन
डेंगू का कारक एडीज मच्छर है, जबकि जेई-एईएस क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। पानी से भी एईएस होता है। ऐसे में स्वच्छ पानी का प्रयोग सभी को करना चाहिए।
-आईए अंसारी, जिला मलेरिया अधिकारी
स्वच्छ पानी से ही बीमारी से बच सकते हैं
डीएमओ ने कहा कि पानी एईएस का कारक है। ऐसे में इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी प्रयोग करना चाहिए। इसके अलावा यदि संभव हो तो आरओ का उपयोग करें अन्यथा पानी को उबाल कर ठंडा करने के बाद पीएं।
संक्रामक से रोग बचने के उपाय
- घर के आसपास पानी एकत्रित न होने दें
- सुअर को आबादी से दूर रखें
- गंदगी के आसपास अथवा घास के मैदान में शरीर को पूरा ढक कर रखें
- तेज बुखार होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें
- बिना डॉक्टर की सलाह कोई दवा न लें।
शहरी क्षेत्र में छिड़काव व फाॅगिंग कराई जा चुकी है। नाला व नालियों में पानी का बहाव दुरुस्त करने का प्रयास पालिका कर रही है। जल्दी ही इससे निजात मिल जाएगी। वैसे सभी मुहल्लों में सफाई कर्मियों को सफाई के लिए लगाया गया है।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका परिषद
ग्रामीण इलाकों में ब्लाकवार व ग्राम पंचायत वार फागिंग व छिड़काव की व्यवस्था बनाई गई है। गांवों में अभियान चलाकर इसे कराया गया है।
-डॉ. राजेश प्रजापति, सीडीओ