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कंजक्टिवाइटिस: संक्रमित को छूने भर से हो रहा है इस बार आई फ्लू
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बस्ती। आई फ्लू का प्रकोप फैल रहा है। इसके संपर्क में आने से होने के कारण बीमारी की चपेट में लोग आ रहे हैं। परिवार के कई लोग पीड़ित हो जा रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक लोग पीड़ित हो रहे हैं। इससे ड्राॅप की खपत बढ़ गई है। इसकी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य महकमा ने कार्ययोजना तैयार की है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य की टीम पहुंचकर पीड़ितों का इलाज करेगी। वहीं सूचना मिलने पर स्कूलों में भी पहुंचेगी।
इसे लेकर सभी एमओआईसी को निर्देश दिए गए हैं। वहीं लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। बारिश में कंजेक्टिवाइटिस (आई फ्लू) बीमारी फैलती है। यह बैक्टीरिया व वायरस जनित संक्रमण है। जिसे रेड आई व पिंक आई भी कहा जाता है, क्योंकि इस दशा में आंखों का रंग लाल व गुलाबी हो जाता है। परिवार के व्यक्ति को होने पर अन्य सदस्य भी चपेट में आ जा रहे हैं। स्कूल में भी एक छात्र के पीड़ित होने के बाद अन्य को दिक्कत हो जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही हाल है।
मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। बृहस्पतिवार को 1100 मरीज पहुंचे, इसमें आधे मरीज आई फ्लू से पीड़ित थे। उधर बीमारी की चपेट में आकर लोग सीएचसी, पीएचसी पहुंच रहे हैं। अस्पतालों में ड्राॅप की कमी हो जा रही है। बाहर से ड्राॅप और मरहम महंगे दाम पर लेना पड़ रहा है।
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सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र ने सभी सीएचसी, पीएचसी, हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया है। वहीं बीमारी से अधिक संख्या में पीड़ित होने वाले गांव में टीम भेजने को कहा है।
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सुरक्षित रहने के लिए बचाव जरूरी
- जिला अस्पताल के नेत्र विभाग के डॉ. शारिब सुहेल, डॉ. सीएल कन्नौजिया बताया कि आई फ्लू आंखों में बैक्टीरिया व वायरस के संक्रमण या एलर्जिक रिएक्शन के कारण होती है। इससे सुरक्षित रहने के लिए बचाव जरूरी है। इसमें आंखों में एक पारदर्शी पतली झिल्ली, कंजक्टिव होती है जो पलकों के अंदरूनी और आंखों की पुतली के सफेद भाग को कवर करती है, इसमें सूजन आने या संक्रमित हो जाता है। आंख में दिक्कत होने को गंभीरता से लें और डॉक्टर को दिखाएं। लापरवाही से दिक्कत बढ़ सकती है।
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लक्षण
- आंख का लाल या गुलाबी होना, जलन व खुजली होना
- अधिक पानी, कीचड़ आना
- आंखों में चुभन महसूस होना, सूजन होना
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यह बरतें सावधानी
- हाथों को बार-बार साबुन तथा पानी से साफ करें
- आखों तथा चेहरे को साथ करने के लिए साफ रूमाल, तौलिया का प्रयोग करें और उसकी सफाई करें
- नियमित प्रयोग किए जाने वाले चश्मे को अच्छी तरह साफ करें
- संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए काला चश्मा पहनें
-पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का प्रयोग करें
- सूरज की सीधी धूप, मिट्टी, धूल आदि से दूर रहें।
- संक्रमित व्यक्ति के प्रयोग किए जा रहे आई ड्राप, रूमाल, आंखों के मेकअप की सामग्री, तौलिया, तकिया के कवर आदि का प्रयोग न करें
- डॉक्टर की सलाह के बिना काेई आई ड्राॅप व दवा का प्रयोग न करें
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें
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बारिश में कंजेक्टिवाइटिस फैला है। इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ी है। इससे बचने के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। साफ-सफाई पर ध्यान तथा पीड़ित से दूरी बनाकर रहने की जरूरत है। दिक्कत होने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। सीएचसी, पीएचसी पर दवा उपलब्ध है। पीड़ितों की संख्या अधिक होने पर टीम गांव में जाकर इलाज करेगी।
-डॉ. आरपी मिश्र, सीएमओ, बस्ती
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इसे लेकर सभी एमओआईसी को निर्देश दिए गए हैं। वहीं लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। बारिश में कंजेक्टिवाइटिस (आई फ्लू) बीमारी फैलती है। यह बैक्टीरिया व वायरस जनित संक्रमण है। जिसे रेड आई व पिंक आई भी कहा जाता है, क्योंकि इस दशा में आंखों का रंग लाल व गुलाबी हो जाता है। परिवार के व्यक्ति को होने पर अन्य सदस्य भी चपेट में आ जा रहे हैं। स्कूल में भी एक छात्र के पीड़ित होने के बाद अन्य को दिक्कत हो जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही हाल है।
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मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। बृहस्पतिवार को 1100 मरीज पहुंचे, इसमें आधे मरीज आई फ्लू से पीड़ित थे। उधर बीमारी की चपेट में आकर लोग सीएचसी, पीएचसी पहुंच रहे हैं। अस्पतालों में ड्राॅप की कमी हो जा रही है। बाहर से ड्राॅप और मरहम महंगे दाम पर लेना पड़ रहा है।
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सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र ने सभी सीएचसी, पीएचसी, हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया है। वहीं बीमारी से अधिक संख्या में पीड़ित होने वाले गांव में टीम भेजने को कहा है।
सुरक्षित रहने के लिए बचाव जरूरी
- जिला अस्पताल के नेत्र विभाग के डॉ. शारिब सुहेल, डॉ. सीएल कन्नौजिया बताया कि आई फ्लू आंखों में बैक्टीरिया व वायरस के संक्रमण या एलर्जिक रिएक्शन के कारण होती है। इससे सुरक्षित रहने के लिए बचाव जरूरी है। इसमें आंखों में एक पारदर्शी पतली झिल्ली, कंजक्टिव होती है जो पलकों के अंदरूनी और आंखों की पुतली के सफेद भाग को कवर करती है, इसमें सूजन आने या संक्रमित हो जाता है। आंख में दिक्कत होने को गंभीरता से लें और डॉक्टर को दिखाएं। लापरवाही से दिक्कत बढ़ सकती है।
लक्षण
- आंख का लाल या गुलाबी होना, जलन व खुजली होना
- अधिक पानी, कीचड़ आना
- आंखों में चुभन महसूस होना, सूजन होना
यह बरतें सावधानी
- हाथों को बार-बार साबुन तथा पानी से साफ करें
- आखों तथा चेहरे को साथ करने के लिए साफ रूमाल, तौलिया का प्रयोग करें और उसकी सफाई करें
- नियमित प्रयोग किए जाने वाले चश्मे को अच्छी तरह साफ करें
- संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए काला चश्मा पहनें
-पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का प्रयोग करें
- सूरज की सीधी धूप, मिट्टी, धूल आदि से दूर रहें।
- संक्रमित व्यक्ति के प्रयोग किए जा रहे आई ड्राप, रूमाल, आंखों के मेकअप की सामग्री, तौलिया, तकिया के कवर आदि का प्रयोग न करें
- डॉक्टर की सलाह के बिना काेई आई ड्राॅप व दवा का प्रयोग न करें
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें
बारिश में कंजेक्टिवाइटिस फैला है। इन दिनों मरीजों की संख्या बढ़ी है। इससे बचने के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। साफ-सफाई पर ध्यान तथा पीड़ित से दूरी बनाकर रहने की जरूरत है। दिक्कत होने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। सीएचसी, पीएचसी पर दवा उपलब्ध है। पीड़ितों की संख्या अधिक होने पर टीम गांव में जाकर इलाज करेगी।
-डॉ. आरपी मिश्र, सीएमओ, बस्ती