फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   healt problem in humen body

Basti News: सात दुर्लभ बीमारियां, दवाओं से चल रहीं सांसें

Mon, 27 Feb 2023 06:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Mon, 27 Feb 2023 06:14 PM IST
विज्ञापन
healt problem in humen body
दुर्लभ रोग पर दिवस-
विज्ञापन

गिलवार्ड सिंड्रोम, जेन्यूवीनी, म्यूकोपोलिसेकेडोसिस, मैसक्यूलर डिस्ट्राफी, प्रोजेरिया, थैलेसीमिया मेजर
व मानइर समेत कई बीमारियां सक्रिय
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दुर्लभ बीमारियां, यानी एक लाख में कोई एक किसी विशेष बीमारी का शिकार। ऐसी ही दुर्लभ श्रेणी की सात बीमारियों से अपने जिले में 15 बच्चे और जवान पीड़ित हैं। इनकी सांसों की डोर दवा ने थाम रखी है। इनकी दवाएं भी बेहद महंगी हैं। चिकित्सकों के अनुसार, मैसक्यूलर डिस्ट्राफी नामक मर्ज जब घातक होने लगता है तब एक विशेष तरह का इंजेक्शन ही मरीज को जीवन दे पाता है। इसकी कीमत 16 करोड़ रुपये है। इतना महंगा इलाज हर किसी के बस की बात नहीं।
-----------
ये हैं दुर्लभ बीमारियां
चिकित्सक डॉ. पीके श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में सात दुर्लभ बीमारियों के मरीज आते हैं। इनका इलाज चल रहा है। इन बीमारियों में मरीज की सांस दवा के सहारे ही चलती है।
विज्ञापन

गिलवार्ड सिंड्रोम:
- चिकित्सक के अनुसार, जिले में इस रोग से पीड़ित चार लोग हैं। यह बीमारी जिंस में गड़बड़ी के चलते होती है। यह पीलिया जैसे ही होती है। इसमें दवा ही इलाज है। खून में अधिक ज्वाइंडिस पर दिमाग व लिवर को यह बीमारी प्रभावित करती है। मगर दवा से पीलिया कम हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------
जेन्यूवीनी सिंड्रोम
इस बीमारी के जिले में महज दो रोगी हैं। बीमारी से ग्रसित व्यक्ति शरीर तो सामान्य रहता है, मगर हाथ व पैर का विकास नहीं हो पाता, जिससे वह छोटे रह जाते हैं। बीमारी से ग्रस्त लोग बौने जैसे नजर आते हैं। इसका कोई इलाज नहीं है, मगर इसकी दवा लेनी जरूरी है।
-------
म्यूकोपोलिसेकेडोसिस
शरीर में ग्लूकोज के बाद की श्रेणी ग्लाइकोजन होती है। इसके बिगड़ने पर दुर्लभ बीमारी म्यूकोपोलिसेकेडोसिस होती है। बीमारी में शरीर का हीमोग्लोबिन प्रभावित हो जाता है। जिले में इस बीमारी से ग्रसित तीन लोगों का इलाज किया जा रहा है।
-----
मैसक्यूलर डिस्ट्राफी
इस बीमारी में नर्व व मसल्स धीरे-धीरे एक दूसरे से टूट कर अलग हो जाते हैं। इससे मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। इसका इंजेक्शन करीब 16 करोड़ रुपये का है। इस बीमारी से पीड़ित की जिंदगी 13 से 14 साल तक ही रहती है। सांस की मांसपेशियां कमजोर पड़ कर दम तोड़ देती हैं।
-------------
प्रोजेरिया सिंड्रोम
चिकित्सक बताते हैं कि यह बीमारी बच्चों को होती है। कम उम्र में ही बीमारी बच्चे को बूढ़ा बना देती है। इसके चलते बच्चों की शारीरिक संरचना में तेजी से बदलाव आ जाता है। वह कम उम्र में ही दम तोड़ देता है।

------
थैलेसीमिया मेजर व मानइर
यह दुर्लभ रोग है। इसमें हीमोग्लोबिन की गड़बड़ी से फिटेल हीमोग्लोबिन ज्यादा हो जाता है और एडल्ट हीमोग्लोबिन कम होता है। असंतुलन के कारण खून ठीक ढंग से बन नहीं पाता है। ऐसे में बीमार को हमेशा खून चढ़ाकर बचाया जाता है। कभी-कभार शरीर से आयरन अधिक होने के कारण उसे निकालना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed