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अमेरिका के वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित हुआ बस्ती के हर्षित का शोध पत्र
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अमेरिका के वैज्ञानिक जर्नल में जनपद के हर्षित का शोध पत्र प्रकाशित
बस्ती। न्यायिक सदस्य कटरा निवासी अखिलेश कुमार पांडेय के पुत्र हर्षित अंबेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित वैज्ञानिक शोध जर्नल अमेरिका की जूनिपर पत्रिका में प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
हर्षित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय विकलांग पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ में ऑडियोलॉजिस्ट विषय पर अध्ययन कर रहे हैं। हर्षित अंबेश प्रोफेसर नेहा तिवारी और सीआरसी लखनऊ के निदेशक रमेश पांडेय के मार्ग दर्शन में एक 78 वर्षीय बुजुर्ग के परकिंसन नामक मानसिक रोग पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया है।
अखिलेश कुमार पांडेय ने बताया कि हर्षित अंबेश के शोध को दुनिया भर के चिकित्सकों, वैज्ञानिकों ने अपनाई गई विधि को नवाचार मानते हुए सराहा है। उनका शोध पत्र कैलिफोर्निया (अमेरिका) के साइंटिफिक जर्नल जूनिपर ने प्रमुख स्थान देते हुए प्रोत्साहित किया। शोध में बताया गया है कि परकिंसन बीमारी बुजुर्गों में होती है, जिसके कारण वे मानसिक विकलांगता की स्थिति में आ जाते हैं। बताया कि हर्षित ने मुंबई के 78 वर्षीय वृद्ध पर ऑनलाइन चिकित्सा एवं शोध किया जिससे वे स्वस्थ हो गए। इस नई तकनीक को चिकित्सकों, वैज्ञानिकों ने नवाचार की संज्ञा दी। उनके इस उपलब्धि चिकित्सक डॉ. बीएन शुक्ला, डॉ. बीके शुक्ला, सत्यदेव शुक्ला, आमोद पांडेय, मुकेश मिश्रा आदि ने इस प्रयास की सराहना की है।
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बस्ती। न्यायिक सदस्य कटरा निवासी अखिलेश कुमार पांडेय के पुत्र हर्षित अंबेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित वैज्ञानिक शोध जर्नल अमेरिका की जूनिपर पत्रिका में प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
हर्षित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय विकलांग पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ में ऑडियोलॉजिस्ट विषय पर अध्ययन कर रहे हैं। हर्षित अंबेश प्रोफेसर नेहा तिवारी और सीआरसी लखनऊ के निदेशक रमेश पांडेय के मार्ग दर्शन में एक 78 वर्षीय बुजुर्ग के परकिंसन नामक मानसिक रोग पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया है।
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अखिलेश कुमार पांडेय ने बताया कि हर्षित अंबेश के शोध को दुनिया भर के चिकित्सकों, वैज्ञानिकों ने अपनाई गई विधि को नवाचार मानते हुए सराहा है। उनका शोध पत्र कैलिफोर्निया (अमेरिका) के साइंटिफिक जर्नल जूनिपर ने प्रमुख स्थान देते हुए प्रोत्साहित किया। शोध में बताया गया है कि परकिंसन बीमारी बुजुर्गों में होती है, जिसके कारण वे मानसिक विकलांगता की स्थिति में आ जाते हैं। बताया कि हर्षित ने मुंबई के 78 वर्षीय वृद्ध पर ऑनलाइन चिकित्सा एवं शोध किया जिससे वे स्वस्थ हो गए। इस नई तकनीक को चिकित्सकों, वैज्ञानिकों ने नवाचार की संज्ञा दी। उनके इस उपलब्धि चिकित्सक डॉ. बीएन शुक्ला, डॉ. बीके शुक्ला, सत्यदेव शुक्ला, आमोद पांडेय, मुकेश मिश्रा आदि ने इस प्रयास की सराहना की है।
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