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एक दशक मरम्मत की राह देख रहा गौर-शिवाघाट मार्ग
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एक दशक मरम्मत की राह देख रहा गौर-शिवाघाट मार्ग
गौर (बस्ती)। शिवाघाट-गौर मार्ग एक दशक से जर्जर है। सड़क की उखड़ चुकी गिट्टियां राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। पिछले दस माह से सड़क पर गिट्टी डालकर छोड़ दिया गया, लेकिन अभी तक पिच नहीं हो सका जिससे आने जाने वाली लोगों एवं वाहनों को दिक्कत उठानी पड़ती है।इसड़क निर्माण न होने से स्थानीय स्तर पर व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।
वर्ष 2008-09 में गौर-शिवाघाट मार्ग का निर्माण प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत कराया गया था। तब व्यावसायिक और आर्थिक रूप से पिछड़े इस इलाके को विकास की मुख्यधारा में आने की राह दिखने लगी। पर ऐसा नहीं हुआ। करीब चार साल तक यह मार्ग ठीक रहा। उसके बाद टूटना शुरू हो गया और धीरे-धीरे यह पूरी तरह से खराब हो गया। यह मार्ग उत्तर में पैकोलिया, गौर बाजार, शिवाघाट होते हुए भानपुर, डुमरियागंज के रास्ते नेपाल को जोड़ता है। जबकि दक्षिण और पश्चिम में अमारी बाजार, विक्रमजोत होते हुए नेशनल हाईवे के रास्ते धार्मिक स्थल अयोध्या, बाराबंकी, लखनऊ व बभनान बाजार के रास्ते स्वामीनारायण छपिया, मसकनवा, मनकापुर के रास्ते गोंडा, बहराइच को जोड़ता है। बावजूद इसके यह मार्ग उपेक्षित है।
स्थानीय लोगों ने इसके पुनर्निर्माण की मांग को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन किए लेकिन हालत सुधरने के बजाय बदतर हो गया। अवर अभियंता आरपी यादव ने बताया कि बहुत पहले गिट्टी डालकर रोलर चलाया गया था जो इस समय टूट गया है। स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है धन स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ करा दिया जाएगा।
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लोग बोले- आश्वासन के बाद भी नहीं बनी सड़क
अंबरपुर गांव के विनोद कुमार, डुहवा के देवी यादव ने बताया कि मार्ग के खराबी के चलते पूरे क्षेत्र का विकास रुक सा गया है। बारह साल से अधिक हो गया। लेकिन, इसकी मरम्मत के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। पूरा क्षेत्र उपेक्षा का शिकार है।
बेलवा राजा गांव के क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय यादव, तरैनी गांव के राम तौल मौर्य ने बताया कि इसी सड़क से बच्चे विद्यालय आते हैं और मरीजों का गौर अस्पताल पर आना-जाना होता है लेकिन सड़क की दशा खराब होने से वाहन से कौन कहे, पैदल चलना दूभर हो गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूल आने जाने वाले बच्चों को होती है। कभी-कभार छोटे बच्चे गिरकर चोटिल भी हो जाते हैं।
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गौर (बस्ती)। शिवाघाट-गौर मार्ग एक दशक से जर्जर है। सड़क की उखड़ चुकी गिट्टियां राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। पिछले दस माह से सड़क पर गिट्टी डालकर छोड़ दिया गया, लेकिन अभी तक पिच नहीं हो सका जिससे आने जाने वाली लोगों एवं वाहनों को दिक्कत उठानी पड़ती है।इसड़क निर्माण न होने से स्थानीय स्तर पर व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।
वर्ष 2008-09 में गौर-शिवाघाट मार्ग का निर्माण प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत कराया गया था। तब व्यावसायिक और आर्थिक रूप से पिछड़े इस इलाके को विकास की मुख्यधारा में आने की राह दिखने लगी। पर ऐसा नहीं हुआ। करीब चार साल तक यह मार्ग ठीक रहा। उसके बाद टूटना शुरू हो गया और धीरे-धीरे यह पूरी तरह से खराब हो गया। यह मार्ग उत्तर में पैकोलिया, गौर बाजार, शिवाघाट होते हुए भानपुर, डुमरियागंज के रास्ते नेपाल को जोड़ता है। जबकि दक्षिण और पश्चिम में अमारी बाजार, विक्रमजोत होते हुए नेशनल हाईवे के रास्ते धार्मिक स्थल अयोध्या, बाराबंकी, लखनऊ व बभनान बाजार के रास्ते स्वामीनारायण छपिया, मसकनवा, मनकापुर के रास्ते गोंडा, बहराइच को जोड़ता है। बावजूद इसके यह मार्ग उपेक्षित है।
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स्थानीय लोगों ने इसके पुनर्निर्माण की मांग को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन किए लेकिन हालत सुधरने के बजाय बदतर हो गया। अवर अभियंता आरपी यादव ने बताया कि बहुत पहले गिट्टी डालकर रोलर चलाया गया था जो इस समय टूट गया है। स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है धन स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ करा दिया जाएगा।
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लोग बोले- आश्वासन के बाद भी नहीं बनी सड़क
अंबरपुर गांव के विनोद कुमार, डुहवा के देवी यादव ने बताया कि मार्ग के खराबी के चलते पूरे क्षेत्र का विकास रुक सा गया है। बारह साल से अधिक हो गया। लेकिन, इसकी मरम्मत के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। पूरा क्षेत्र उपेक्षा का शिकार है।
बेलवा राजा गांव के क्षेत्र पंचायत सदस्य संजय यादव, तरैनी गांव के राम तौल मौर्य ने बताया कि इसी सड़क से बच्चे विद्यालय आते हैं और मरीजों का गौर अस्पताल पर आना-जाना होता है लेकिन सड़क की दशा खराब होने से वाहन से कौन कहे, पैदल चलना दूभर हो गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूल आने जाने वाले बच्चों को होती है। कभी-कभार छोटे बच्चे गिरकर चोटिल भी हो जाते हैं।