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Basti News: शाेहदों के सब्जबाग में भ्रमित हो रही किशोरियां, टेंशन में अभिभावक

Thu, 30 Nov 2023 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Thu, 30 Nov 2023 11:51 PM IST
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Girls getting confused in the garden of martyrs, parents in tension
हाल के कुछ महीनों में प्यार में पड़कर नाबालिग लड़के-लड़कियों के घर से भागने की घटनाएं बढ़ गईंं हैं। फ्रेंड कल्चर से शुरू होने वाले रिश्ते के स्याह पहलू ने अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। क्योंकि आसपास के मोहल्ले, गांव, कस्बे व शहर से किसी परिवार की बेटी या बेटे के लापता होने की खबरें अक्सर सामने आ रही हैं। अभिभावकों में इस बात का डर पैदा हो गया है कि उनके सगे-संबंध में ऐसा वाकया हो गया तो समाज का सामना कैसे करेंगे। कई मामले ऐसे आ रहे हैं जिनमें पहचान बदलकर शारीरिक शोषण के लिए रिश्ते बनाए गए और बाद में किनारा कर लिया गया।
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हर महीने इस तरह के पांच से आठ मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें शोहदे भोलीभाली किशोरियों को शिकार बना रहे हैं। सही-गलत में फर्क करने की समझ कम होने का फायदा उठाकर ऐसा सब्जबाग दिखाते हैं कि किशोरियां उनके साथ जीने-मरने की कसमें खाने लगती हैं। शोहदों के इशारे पर कुछ भी करने को तैयार कई किशोरियां घर की दहलीज लांघने में भी देर नहीं लगा रही हैं। मगर, उनके पैरों तले जमीन तब सरकने लगती है जब शोहदे अपना असली रंग दिखाने लगते हैं। कई दरिंदगी की शिकार होकर जान तक गंवा रही हैं।
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केस एक

15 साल की किशोरी से उसकी कोचिंग के पास रहने वाले 25 साल के नीरू ने मदद के बहाने बातचीत शुरू की। बातचीत का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब कोचिंग के बाहर किशोरी को एक अनजान युवक ने छेड़ दिया। उस वक्त नीरू किशोरी की मदद के लिए आगे आया। धीरे-धीरे बातचीत दोस्ती से बढ़कर प्यार में तब्दील हो गई। करीब छह महीने बाद किशोरी को इस बात का पता चला कि नीरू का असली नाम इरफान है। किशोरी ने सच छिपाने का विरोध किया। आगे रिश्ते में रहने से इन्कार किया तो इरफान और उसके दोस्तों ने किशोरी के स्कूल, कोचिंग और घर के आसपास उसकी फोटो और वीडियो शेयर करने लगा।
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केस- 2

16 साल की एक किशोरी का भी इसी तरह का मामला सामने आया है। करीब डेढ़ साल पहले अंकित नाम के 34 साल के युवक ने उसे कोचिंग पढ़ाना शुरू किया। अंकित कक्षा के अन्य छात्र के जरिये बतौर ट्यूशन टीचर किशोरी के संपर्क में आया। पढ़ाई के दौरान ही अंकित ने किशोरी से दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी। दोस्ती के बहाने उसे देश-दुनिया की बातें बताना, कॅरियर के विकल्प बताना, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने समेत ऐसी कई चीजें कीं कि किशोरी के मन में यह बात बैठ गई कि वह एक अच्छा इंसान है। इसी बीच नजदीकियां बढ़ाईं और शारीरिक संबंध बनाए। उसे यह धमकी दी कि किसी को बताने पर उसका समाज में तमाशा बन जाएगा। कुछ दिन बाद अंकित ने उससे खुद ही बात करना बंद कर दिया। तनाव के चलते किशोरी को कई शारीरिक दिक्कतों ने घेर लिया। परिजनों को मनोविज्ञानी से काउंसिलिंग के दौरान मामले का पता चला।

...ताकि शिकार न हो जाएं आपकी बेटियां

मनोविज्ञानी डाॅ. वेद प्रकाश बताते हैं कि परिवार ही बच्चों की पहली पाठशाला है। अब लालन-पालन में पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है। कई अभिभावक ओपेन सोसायटी की बात बेहिचक करते हैं। कम उम्र के संतान इनके सही मायने समझे बिना ऐसी सोसायटी का हिस्सा बनने की कोशिश करते हैं। फिल्में, टीवी सीरियल भी प्यार को अलग तरह से परिभाषित करते हैं। युगल के साथ को आज की जरूरत की तरह पेश करते हैं। बेटा हो या बेटी, इन सारी चीजों का नकारात्मक प्रभाव उनके रहन-सहन, सोचने के ढंग पर पड़ता है। भटकाव की नौबत तक भी ले जाता है।

बिना संकोच सही-गलत समझाना जरूरी

समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि अशिक्षा और अनुशासन की कमी की वजह से ऐसे मामले ज्यादा सामने आते हैं। किशोरावस्था में बच्चों को सही-गलत की ज्यादा समझ नहीं होती है। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की होती है कि वे उन पर नजर रखें। उनकी हर गतिविधि का मूल्यांकन करें। बच्चों के व्यवहार में बदलाव आने पर अभिभावक को काउंसिलिंग करनी चाहिए। मित्रवत व्यवहार रखते हुए उन्हें सही और गलत की पहचान करानी चाहिए। सुविधाएं देने में खराबी नहीं है, लेकिन ध्यान रखें कि उनका दुरुपयोग न हो।

पुलिस के पास अभिभावक की शिकायत आते ही कार्रवाई की जा रही है। यह सही है कि इस तरह के नाबालिगों के मामले में बढ़ोतरी हुई है। इस बदलते सामाजिक पहलू के लिए परिवार, विद्यालय और समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
-आरके भारद्वाज, आईजी
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