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गजलकार का दर्द कल्पना नहीं यथार्थ : डाॅ. राम नरेश

Tue, 10 Dec 2024 12:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 10 Dec 2024 12:36 AM IST
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Ghazalkar's pain is not imaginary but real: Dr. Ram Naresh
बस्ती। प्रेस क्लब सभागार में वरिष्ठ कवि डाॅ. अजीत कुमार श्रीवास्तव ‘राज’ कृत गजल संग्रह ‘‘शब्दों को जोड़ जोड़ के’’ का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर अनेक वरिष्ठ रचनाकारों ने अपनी रचनाए पढ़ी और गजल संग्रह की समीक्षा की।
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कार्यक्रम का संचालन प्रेस क्लब अध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय ने किया। डाॅ. अजीत श्रीवास्तव ने पाठकों के बीच लाने में मिले सहयोग व अपनी गजल यात्रा पर विस्तार से अपने अनुभव साझा किए।
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डॉ. अजीत ने सलीम बस्तवी व हरीश दरवेश को अपना प्रेरणास्रोत बताया। अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर रघुवंश मणि ने कहा कि गजल लिखना कठिन कार्य है, लेकिन अजीत श्रीवास्तव ने यह जोखिम उठाया है। अरबी फारसी को संदर्भित करते हुए हिंदी गजल पर प्रकाश डाला।
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मुख्य अतिथि साहित्य भूषण डॉ. राम नरेश सिंह ’मंजुल’ ने कहा यह रचना गजल की कसौटी को परिभाषित करती है। गजलकार की पहली शर्त भोगकर लिखना है, वह अजीत गजल में देखने को मिलता है। उनका दर्द कल्पना नहीं बल्कि यथार्थ का है। डॉ. मुकेश मिश्र, हरीश दरवेश, डॉ. वीके वर्मा ने अपनी बातें रखीं।
इस मौके पर श्याम प्रकाश शर्मा, चंद्र बली मिश्र, बीएन शुक्ल, डॉ. राम कृष्ण लाल जगमग, तव्वाबअली, परमानंद श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।
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