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गौर ब्लाक : दो वर्ष से स्थायी सीडीपीओ न होने से काम प्रभावित
Mon, 09 Jun 2025 12:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 09 Jun 2025 12:49 AM IST
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गौर। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए संचालित योजनाएं कर्मचारियों के अभाव में प्रभावित हो रही हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत सीडीपीओ की कमी से है। गौर ब्लॉक में दो वर्ष से उधार के सीडीपीओ से काम चलाया जा रहा है।
जुलाई 2023 में विक्रमजोत ब्लॉक में तैनात सीडीपीओ बलराम को गौर ब्लॉक का अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया। दो ब्लाकों का प्रभार होने से वह पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। इसका खामियाजा आंगनबाड़ी केद्रों पर नामांकित बच्चों और कार्यकर्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। गौर ब्लाक में 221 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 33 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हैं। लगभग 55 से 60 केंद्रों में सहायिका के पद रिक्त हैं। 12 केंद्रों में कार्यकर्ताओं के पद खाली हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है की सबसे ज्यादा दिक्कत सीडीपीओ को लेकर हो रही है। ब्लॉक पर स्थापित बाल विकास परियोजना कार्यालय जाने पर पता चलता है कि सीडीपीओ आए ही नहीं हैं। एक काम के लिए कई दिनों तक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। इसी तरह आम जनता को भी छोटे से कार्य के लिए कई दिनों तक भाग दौड़ करनी पड़ती है। डीपीओ राकेश कुमार ने बताया कि जिले में सीडीपीओ की कमी है फिर भी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे कोई भी योजना और कार्य प्रभावित न हो।
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जुलाई 2023 में विक्रमजोत ब्लॉक में तैनात सीडीपीओ बलराम को गौर ब्लॉक का अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया। दो ब्लाकों का प्रभार होने से वह पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। इसका खामियाजा आंगनबाड़ी केद्रों पर नामांकित बच्चों और कार्यकर्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। गौर ब्लाक में 221 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 33 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हैं। लगभग 55 से 60 केंद्रों में सहायिका के पद रिक्त हैं। 12 केंद्रों में कार्यकर्ताओं के पद खाली हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है की सबसे ज्यादा दिक्कत सीडीपीओ को लेकर हो रही है। ब्लॉक पर स्थापित बाल विकास परियोजना कार्यालय जाने पर पता चलता है कि सीडीपीओ आए ही नहीं हैं। एक काम के लिए कई दिनों तक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। इसी तरह आम जनता को भी छोटे से कार्य के लिए कई दिनों तक भाग दौड़ करनी पड़ती है। डीपीओ राकेश कुमार ने बताया कि जिले में सीडीपीओ की कमी है फिर भी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे कोई भी योजना और कार्य प्रभावित न हो।
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