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Basti News: धार्मिक व मनोरंजक पुस्तकों से सजेगी कारागार की लाइब्रेरी
Sun, 21 Apr 2024 04:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 21 Apr 2024 04:40 AM IST
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200 किताबों के साथ अस्थाई तौर पर पुस्तकालय शुरू
कारागार में निरुद्ध 650 बंदियों-कैदियों को मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती,। सलाखों के पीछे पहुंचने वाले बंदियों-कैदियों को अब न सिर्फ धार्मिक, बल्कि मनोरंजन से जुड़ी पुस्तकों को पढ़ने का मौका मिलेगा। इसके लिए जिला कारागार में लाइब्रेरी खोली जाएगी। जेल अधीक्षक के प्रयास से जल्द ही बंदियों को पढ़ने के लिए पुस्तकें मिलनी शुरू हो जाएंगी।
इसके पीछे जेलअधीक्षक अंकेक्षिता श्रीवास्तव का मकसद है कि जेल से छूटने के बाद बंदी बाहर जाएं तो उनके जीवन में सुधार आ सके। अपराधी प्रवृत्ति से दूर होकर ऐसे काम करें, ताकि उनके जीवन में भी खुशियां आए। मौजूदा समय में जिला कारागार में करीब 650 बंदी-कैदी निरुद्ध हैं। बंदी भी पुस्तकों को पढ़ सके, इसके लिए जेल प्रशासन ने लाइब्रेरी खोलने का खाका तैयार किया है।
स्वयं सेवी संस्थाओं की मदद से जेल के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। जो पुस्तकें बंदियों को पढ़ने के लिए दी जाएंगी, उसमें धार्मिक पुस्तकों के अलावा मनोरंजन से संबंधित रहेंगी। अधीक्षक ने बताया कि जेल में लाइब्रेरी खोलने का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेज दिया गया है। लाइब्रेरी खोलने की तैयारी कर ली गई है। अस्थाई तौर पर 200 किताबें जुटा ली गई हैं। लाइब्रेरी नहीं होने के कारण अभी बंदियों के बैरक में किताबें भिजवाई जा रही हैं।
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कारागार में निरुद्ध 650 बंदियों-कैदियों को मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती,। सलाखों के पीछे पहुंचने वाले बंदियों-कैदियों को अब न सिर्फ धार्मिक, बल्कि मनोरंजन से जुड़ी पुस्तकों को पढ़ने का मौका मिलेगा। इसके लिए जिला कारागार में लाइब्रेरी खोली जाएगी। जेल अधीक्षक के प्रयास से जल्द ही बंदियों को पढ़ने के लिए पुस्तकें मिलनी शुरू हो जाएंगी।
इसके पीछे जेलअधीक्षक अंकेक्षिता श्रीवास्तव का मकसद है कि जेल से छूटने के बाद बंदी बाहर जाएं तो उनके जीवन में सुधार आ सके। अपराधी प्रवृत्ति से दूर होकर ऐसे काम करें, ताकि उनके जीवन में भी खुशियां आए। मौजूदा समय में जिला कारागार में करीब 650 बंदी-कैदी निरुद्ध हैं। बंदी भी पुस्तकों को पढ़ सके, इसके लिए जेल प्रशासन ने लाइब्रेरी खोलने का खाका तैयार किया है।
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स्वयं सेवी संस्थाओं की मदद से जेल के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। जो पुस्तकें बंदियों को पढ़ने के लिए दी जाएंगी, उसमें धार्मिक पुस्तकों के अलावा मनोरंजन से संबंधित रहेंगी। अधीक्षक ने बताया कि जेल में लाइब्रेरी खोलने का प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेज दिया गया है। लाइब्रेरी खोलने की तैयारी कर ली गई है। अस्थाई तौर पर 200 किताबें जुटा ली गई हैं। लाइब्रेरी नहीं होने के कारण अभी बंदियों के बैरक में किताबें भिजवाई जा रही हैं।
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