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‘स्वतंत्रता सेनानियों से सीख लें’
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Mon, 30 Jan 2017 11:24 PM IST
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महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर छावनी के शहीद स्थल पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। छात्र - छात्राओं ने विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दे शहीदों की याद दिलाई।
एसडीएम हरिश्चंद्र और सीओ कृष्णमुरारी की मौजूदगी में पुलिस के जवानों ने शहीद स्थल पर शहीदों को सलामी दी। बच्चों ने कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह गर्व होता है कि आजादी की लड़ाई में छावनी क्षेत्र अग्रणी रहा। हम लोगों को इस बात की जरुरत है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आदर्शों का अनुकरण कर अच्छे समाज की स्थापना करें। जिससे भावी पीढ़ी यहां की संस्कृति व सभ्यता को आत्मसात कर सके। पूर्व प्रमुख देवधर वैद्य ने कहा कि यह दिन आत्म चिंतन, आत्म मंथन एवं आत्म अवलोकन का है। नौजवानों को चाहिए कि वह अपनी शक्ति पहचाने और देश की एकता व सर्वांगीण विकास के लिए रचनात्मक कदम उठाएं।
शहीद स्मारक समिति के संयोजक मंशूर आलम कहा कि यह चिंतनीय है कि आजादी के इतने दिन बाद भी शहीद स्थल का जितना विकास होना चाहिए था उसकी अपेक्षा बहुत कम हुआ। प्रतिभागी बच्चों को मुख्यअतिथि ने पुरस्कृत किया। गुलाम गौश खां, रामेश्वर दत्त ओझा, घनश्याम सिंह, राजन सिंह, एसपी शुक्ला, एके सिंह, सभाराज सिंह आदि रहे।
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एसडीएम हरिश्चंद्र और सीओ कृष्णमुरारी की मौजूदगी में पुलिस के जवानों ने शहीद स्थल पर शहीदों को सलामी दी। बच्चों ने कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह गर्व होता है कि आजादी की लड़ाई में छावनी क्षेत्र अग्रणी रहा। हम लोगों को इस बात की जरुरत है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आदर्शों का अनुकरण कर अच्छे समाज की स्थापना करें। जिससे भावी पीढ़ी यहां की संस्कृति व सभ्यता को आत्मसात कर सके। पूर्व प्रमुख देवधर वैद्य ने कहा कि यह दिन आत्म चिंतन, आत्म मंथन एवं आत्म अवलोकन का है। नौजवानों को चाहिए कि वह अपनी शक्ति पहचाने और देश की एकता व सर्वांगीण विकास के लिए रचनात्मक कदम उठाएं।
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शहीद स्मारक समिति के संयोजक मंशूर आलम कहा कि यह चिंतनीय है कि आजादी के इतने दिन बाद भी शहीद स्थल का जितना विकास होना चाहिए था उसकी अपेक्षा बहुत कम हुआ। प्रतिभागी बच्चों को मुख्यअतिथि ने पुरस्कृत किया। गुलाम गौश खां, रामेश्वर दत्त ओझा, घनश्याम सिंह, राजन सिंह, एसपी शुक्ला, एके सिंह, सभाराज सिंह आदि रहे।
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