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Basti News: 2434 की जांच में गड़बड़ मिले 239 दुकानदार
Sat, 16 Dec 2023 12:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 16 Dec 2023 12:01 AM IST
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बस्ती। बाट-माप विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के नौवें महीने नवबंर तक जिले के कुल 2434 दुकानों का निरीक्षण किया, जिनमें 239 दुकानों में खामियां पाई हैं और उनसे कुल 52 लाख 38 हजार रुपये बतौर जुर्माना व राजस्व आय वसूल किए गए हैं। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह दुकानदारों के हाथों भोले-भाले उपभोक्ता ठगे जा रहे थे।
जिला मुख्यालय स्थित कार्य मानक प्रयोगशाला, विधिक माप विज्ञान बाट-माप को चालू वित्तीय वर्ष में 58.97 लाख रुपए राजस्व वसूल करने का लक्ष्य दिया गया है। विभाग के कर्मचारियों ने नवंबर माह तक कुल 52.38 लाख रुपए राजस्व वसूल कर लिया है। इस अभियान के तहत जिले में कुल 239 दुकानदार ऐसे मिले जिनके बाट-माप या तो मानक के अनुसार नहीं पाए गए या फिर उन्होंने अपने बाट-माप का मुद्रांकन नहीं कराया था। इनमें सबसे अधिक 132 दुकानें किराने की पाई गईं, जहां ग्राहक अपनी रोजमर्रा की जरूरतें खरीदते थे।
विभाग के वरिष्ठ सहायक कौशिक चौधरी के अनुसार यह दुकानदार सीलबंद पैकेट के सामान में पीसीआर (पैकैज्ड कमोडिटीज रूल्स) के नियमों का उलंघन करते पाए गए। वहीं मिठाई की चार दुकानों पर ऐसी अनियमितताएं पाई गई, जहां डिब्बे सहित मिठाई तौली जा रही थी या फिर उनके बाट-माप सत्यापित नहीं कराए गए थे। बताया कि कोटेदारों, आटा चक्की व कई दर्जन फल व सब्जी के दुकानदारों के भी बाट-माप नहीं दुरुस्त पाए गए थे। इनमें कुल 129 दुकानदारों के प्रकरणों को शमन कर दिया गया है और इन सभी दुकानों पर कुल 8 लाख 67 हजार 500 रुपए जुर्माना वसूल किया गया है।
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यह है पीसीआर अधिनियम 2011
बाट-माप विभाग के वरिष्ठ सहायक कौशिक चौधरी के अनुसार पीसीआर यानी कि पैकैज्ड कमोडिटीज रूल्स 2011 के तहत सीलबंद पैकेट पर निर्माण व एक्सपायरी डेट के अलावा रेट प्रिंट होना अनिवार्य है। यही नहीं कंपनी का पता व हेल्प लाइन नंबर भी प्रिंट होना आवश्यक है। इसका उल्लंघन करने वाले दुकानदार की पुष्टि होने पर जुर्माना व सजा दोनों का प्रावधान है।
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बाट-माप का मुद्रांकन जरूरी
बाट-माप विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक आदित्य किशोर ने बताया कि सभी दुकानों पर बाट-माप का साल में एक बार मुद्रांकन करवाना जरूरी होता है। इसके लिए उपकरणों की संख्या व उपयोगिता के आधार पर 375 रुपए व उससे अधिक का शुल्क निर्धारित किया गया है। बताया कि बाट-माप के निरीक्षण के लिए जिले में तकरीबन दर्जन भर से अधिक पर्यवेक्षक लगाए गए हैं, जो दुकानों का निरीक्षण कर कार्रवाई करते हैं।
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जिला मुख्यालय स्थित कार्य मानक प्रयोगशाला, विधिक माप विज्ञान बाट-माप को चालू वित्तीय वर्ष में 58.97 लाख रुपए राजस्व वसूल करने का लक्ष्य दिया गया है। विभाग के कर्मचारियों ने नवंबर माह तक कुल 52.38 लाख रुपए राजस्व वसूल कर लिया है। इस अभियान के तहत जिले में कुल 239 दुकानदार ऐसे मिले जिनके बाट-माप या तो मानक के अनुसार नहीं पाए गए या फिर उन्होंने अपने बाट-माप का मुद्रांकन नहीं कराया था। इनमें सबसे अधिक 132 दुकानें किराने की पाई गईं, जहां ग्राहक अपनी रोजमर्रा की जरूरतें खरीदते थे।
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विभाग के वरिष्ठ सहायक कौशिक चौधरी के अनुसार यह दुकानदार सीलबंद पैकेट के सामान में पीसीआर (पैकैज्ड कमोडिटीज रूल्स) के नियमों का उलंघन करते पाए गए। वहीं मिठाई की चार दुकानों पर ऐसी अनियमितताएं पाई गई, जहां डिब्बे सहित मिठाई तौली जा रही थी या फिर उनके बाट-माप सत्यापित नहीं कराए गए थे। बताया कि कोटेदारों, आटा चक्की व कई दर्जन फल व सब्जी के दुकानदारों के भी बाट-माप नहीं दुरुस्त पाए गए थे। इनमें कुल 129 दुकानदारों के प्रकरणों को शमन कर दिया गया है और इन सभी दुकानों पर कुल 8 लाख 67 हजार 500 रुपए जुर्माना वसूल किया गया है।
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यह है पीसीआर अधिनियम 2011
बाट-माप विभाग के वरिष्ठ सहायक कौशिक चौधरी के अनुसार पीसीआर यानी कि पैकैज्ड कमोडिटीज रूल्स 2011 के तहत सीलबंद पैकेट पर निर्माण व एक्सपायरी डेट के अलावा रेट प्रिंट होना अनिवार्य है। यही नहीं कंपनी का पता व हेल्प लाइन नंबर भी प्रिंट होना आवश्यक है। इसका उल्लंघन करने वाले दुकानदार की पुष्टि होने पर जुर्माना व सजा दोनों का प्रावधान है।
बाट-माप का मुद्रांकन जरूरी
बाट-माप विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक आदित्य किशोर ने बताया कि सभी दुकानों पर बाट-माप का साल में एक बार मुद्रांकन करवाना जरूरी होता है। इसके लिए उपकरणों की संख्या व उपयोगिता के आधार पर 375 रुपए व उससे अधिक का शुल्क निर्धारित किया गया है। बताया कि बाट-माप के निरीक्षण के लिए जिले में तकरीबन दर्जन भर से अधिक पर्यवेक्षक लगाए गए हैं, जो दुकानों का निरीक्षण कर कार्रवाई करते हैं।