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Basti News: मिट्टी की जांच शुरू, 3.14 करोड़ से बनेगा बाढ़ शरणालय
Mon, 04 Mar 2024 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 04 Mar 2024 12:42 AM IST
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बाढ़ हटने के बाद इन शरणालयों में बजेगी शहनाई व साल भर होगा सदुपयोग
बाढ़ प्रभावित मंडल के तीनों जिलों में स्थापित होगा बाढ़ शरणालय, आरक्षित हुई भूमि
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दुबौलिया ब्लाॅक के बरसांव गांव में बाढ़ शरणालय के लिए मिट्टी का परीक्षण शुरू हो चुका है। अगर यहां की चार हजार वर्ग मीटर भूमि शरणालय के लिए उपयोगी साबित हुई तो बहुत जल्द करीब सवा तीन करोड़ रुपये खर्च कर बाढ़ शरणालय का निर्माण शुरू कराया जाएगा। इसके लिए शासन ने धन आवंटित कर दिया है। कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी भवन खंड ने टेंडर की प्रक्रिया चालू कर दी है। इस शरणालय को बाढ़ की त्रासदी समाप्त होने के बाद स्थानीय लोग अन्य कार्यों जैसे दुकान, कॉम्यूनिटी, बाजार व शादी-विवाह स्थल के रूप में उपयोग कर सकेंगे।
प्रदेश के 40 जिले प्रतिवर्ष बाढ़ की भयावह स्थिति से गुजरते हैं। बाढ़ के दौरान कई गांवों मे जलभराव के कारण ग्रामीणों को विस्थापित कर सुरक्षित अस्थायी बाढ़ शरणालयों में ले जाने की आवश्यकता पड़ती है। इसके लिए शासन ने स्थायी तौर पर बहुद्देशीय प्रयोजन को देखते हुए बाढ़ शरणालय को स्थापित करने का निर्णय लिया है। सभी 40 जिलों से भूमि चिह्नित कर बड़ी योजना तैयार की गई है। प्रथम चरण में बस्ती, अयोध्या, आंबेडकरनगर, बाराबंकी, गोरखपुर, बलिया, मऊ व देवरिया जिले में शरणालय निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है।
राहत आयुक्त की ओर से राजस्व अनुभाग के विशेष सचिव के पत्र के अनुसार, बाढ़ शरणालय की 300 लोगों की क्षमता होगी। बस्ती, बलिया, मऊ व देवरिया में प्रत्येक शरणालय पर 150 व्यक्तियों की क्षमता के लिए 3.14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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तीनों जिलों में उपलब्ध कराई गई जमीन
मंडल के तीनों जिले बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर सरयू, राप्ती, कुआनो, मनोरमा, आमी व अन्य नदी-नालों की उफान से प्रभावित होते हैं। लिहाजा तीनों जिलों के प्रशासन ने जनवरी में ही तीन से लेकर चार हजार वर्ग मीटर भूमि शासन को उपलब्ध करवा दी है। जहां पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की ओर से जारी मैप के अनुसार शरणालय की स्थापना की जाएगी।
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कोट
पंचायती राज विभाग से समन्वय स्थापित कर बाढ़ शरणालय को बाढ़ के दिनों के अलावा अन्य कार्यों में उपयोग किया जाएगा। शरणालय के निर्माण के लिए स्वीकृति व धन मिल चुका है। जमीन परीक्षण का कार्य व टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- सत्यपाल, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी भवन खंड, बस्ती।
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बाढ़ प्रभावित मंडल के तीनों जिलों में स्थापित होगा बाढ़ शरणालय, आरक्षित हुई भूमि
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दुबौलिया ब्लाॅक के बरसांव गांव में बाढ़ शरणालय के लिए मिट्टी का परीक्षण शुरू हो चुका है। अगर यहां की चार हजार वर्ग मीटर भूमि शरणालय के लिए उपयोगी साबित हुई तो बहुत जल्द करीब सवा तीन करोड़ रुपये खर्च कर बाढ़ शरणालय का निर्माण शुरू कराया जाएगा। इसके लिए शासन ने धन आवंटित कर दिया है। कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी भवन खंड ने टेंडर की प्रक्रिया चालू कर दी है। इस शरणालय को बाढ़ की त्रासदी समाप्त होने के बाद स्थानीय लोग अन्य कार्यों जैसे दुकान, कॉम्यूनिटी, बाजार व शादी-विवाह स्थल के रूप में उपयोग कर सकेंगे।
प्रदेश के 40 जिले प्रतिवर्ष बाढ़ की भयावह स्थिति से गुजरते हैं। बाढ़ के दौरान कई गांवों मे जलभराव के कारण ग्रामीणों को विस्थापित कर सुरक्षित अस्थायी बाढ़ शरणालयों में ले जाने की आवश्यकता पड़ती है। इसके लिए शासन ने स्थायी तौर पर बहुद्देशीय प्रयोजन को देखते हुए बाढ़ शरणालय को स्थापित करने का निर्णय लिया है। सभी 40 जिलों से भूमि चिह्नित कर बड़ी योजना तैयार की गई है। प्रथम चरण में बस्ती, अयोध्या, आंबेडकरनगर, बाराबंकी, गोरखपुर, बलिया, मऊ व देवरिया जिले में शरणालय निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है।
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राहत आयुक्त की ओर से राजस्व अनुभाग के विशेष सचिव के पत्र के अनुसार, बाढ़ शरणालय की 300 लोगों की क्षमता होगी। बस्ती, बलिया, मऊ व देवरिया में प्रत्येक शरणालय पर 150 व्यक्तियों की क्षमता के लिए 3.14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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तीनों जिलों में उपलब्ध कराई गई जमीन
मंडल के तीनों जिले बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर सरयू, राप्ती, कुआनो, मनोरमा, आमी व अन्य नदी-नालों की उफान से प्रभावित होते हैं। लिहाजा तीनों जिलों के प्रशासन ने जनवरी में ही तीन से लेकर चार हजार वर्ग मीटर भूमि शासन को उपलब्ध करवा दी है। जहां पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की ओर से जारी मैप के अनुसार शरणालय की स्थापना की जाएगी।
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कोट
पंचायती राज विभाग से समन्वय स्थापित कर बाढ़ शरणालय को बाढ़ के दिनों के अलावा अन्य कार्यों में उपयोग किया जाएगा। शरणालय के निर्माण के लिए स्वीकृति व धन मिल चुका है। जमीन परीक्षण का कार्य व टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- सत्यपाल, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी भवन खंड, बस्ती।