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Basti News: घाट पर आस्था का सैलाब... अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य
Fri, 08 Nov 2024 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 08 Nov 2024 12:25 AM IST
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अमहट घाट पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देती व्रती महिलाएं
निर्जला व्रत रख तीसरे दिन परिवार के साथ वेदी पर पहुंची माताएं, जलाई गई अखंड ज्योति
नदियों, सरोवरों में घुटने भर पानी में घुसकर महिलाओं ने की डूबते हुए सूर्य की उपासना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सूर्य उपासना का महापर्व छठ की पूजा बृहस्पतिवार की शाम लोक उत्सव में बदल गया। चहुंओर छठ की छटा देखते बन रही थी। नदियों, सरोवरों के तट श्रद्धालुओं से भर गए। घाट-घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ा। निर्जला काया लिए महिलाओं ने पानी में घुसकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। उनसे परिवार एवं संतान के मंगल जीवन एवं दीर्घायु के लिए कामना की गई।
बुधवार की शाम खरना के बाद से ही महिलाओं ने 36 घंटे के लिए निर्जला उपवास रखा है। तीसरे दिन बृहस्पतिवार की शाम व्रती महिलाओं का हुजूम घाट की ओर चल पड़ा। उनके साथ पूजा की डलियां एवं अन्य साज-सज्जा एवं प्रसाद सामग्री भी पहुंची। छठ मइया की आराधना में सोलह शृंगार से सजी-धजी महिलाओं के साथ पूरा परिवार शामिल हुआ। शाम चार बजे के बाद से ही घाट पर श्रद्धालुओं की एकत्र होने लगी।
एक-एक वेदी पर कई व्रती महिलाएं घेरा बनाकर बैठ गईं। पूजन सामग्रियों से वेदी को सजाया गया। सभी ने आस्था की अखंड ज्योति जलाई। वेदी दीयों की रोशनी से जगमग हो गई। श्रद्धालुओं से भरे घाट का सौंदर्य देखते बन रहा था। मांग भर सिंदूर, हाथों में चटख मेहंदी, पैरों में मेहावर का चटख रंग, आकर्षक ज्वेलरी महिलाओं के स्वरूप को दिव्य बना दिया था। शाम पांच बजे के बाद जब दिन ढलने को हुआ तो इस लोक पर्व की भव्यता और बढ़ गई।
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मंगल गान के बीच व्रती महिलाएं बांस की बहंगी लिए घाट से नदी और सरोवरों मेंं उतर गईं। घुटने भर पानी में जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को कच्चे सूत में बधे पात्र से अर्घ्य देने का विधान पूरा किया गया। शहर से सटे कुआनो नदी का अमहट घाट हजारों श्रद्धालुओं से भर गया। यहां अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाओं की लंबी कतार देखी गई। महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी एक साथ इस विहंगम छटा को ऐसे निहारते रहे मानो लोक मंगल के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा हो। छठ मइया के पारंपरिक गीत इस पर्व की दिव्यता में चार चांद लगा रही थी। यहां भोजपुरी कलाकारों ने एक से बढ़कर एक पूजा गीत प्रस्तुत कर छाए रहे। तमाम श्रद्धालु आकर्षक भजनों पर नृत्य करने को विवश होते रहे। पूरा माहौल उमंग, उत्साह, माधुर्य और भक्ति से भर गया।
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निर्मली कुंड पर भी बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु
शहर के निर्मली कुंड मंदिर परिसर भी छठ उत्सव से जगमग हो उठा। व्रती महिलाएं शाम होते ही यहां परिवार के साथ पहुंच गईं। सरोवर के तट पर खड़ी होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर संतान के कुशल-मंगल की कामना की गई। मन में मनोरथ, हाथ में अर्घ्य का पात्र और पूजा की डलिया में जल रहे दीप की परछाई सरोवर भी सतरंगी छटा बिखेरने लगा। घाट पर मौजूद लोग इस पवित्र दृश्य से अपने को अलग नहीं कर सकें। हर कोई वेदी के सामने शीश नवाता रहा। डूबते सूर्य की लालिमा को भी श्रद्धा भाव से नमन किया गया। सरोवर में दीप दान किया गया।
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सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
शहर के अमहट घाट और निर्मली कुंड पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। एडीएम प्रतिपाल सिंह चौहान, एएसपी ओपी सिंह, एसडीएम सदर शत्रुहन पाठक, प्रभारी ईओ सुनिष्ठा सिंह के अलावा बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रही। मेला क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर निगरानी बढ़ा दी गई थी। ड्रोन कैमरे भी लगाए गए थे। कंट्रोल रूम से शरारती तत्वों पर नजर रखी गई। अर्घ्य देने का विधान पूरा होने के बाद प्रशासनिक टीम ने राहत की सांस ली। दोनों जगहों पर बैरिकेडिंग की गई थी, ताकि कोई भी श्रद्धालु गहरे पानी में न जा सकें।
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नदियों, सरोवरों में घुटने भर पानी में घुसकर महिलाओं ने की डूबते हुए सूर्य की उपासना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सूर्य उपासना का महापर्व छठ की पूजा बृहस्पतिवार की शाम लोक उत्सव में बदल गया। चहुंओर छठ की छटा देखते बन रही थी। नदियों, सरोवरों के तट श्रद्धालुओं से भर गए। घाट-घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ा। निर्जला काया लिए महिलाओं ने पानी में घुसकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। उनसे परिवार एवं संतान के मंगल जीवन एवं दीर्घायु के लिए कामना की गई।
बुधवार की शाम खरना के बाद से ही महिलाओं ने 36 घंटे के लिए निर्जला उपवास रखा है। तीसरे दिन बृहस्पतिवार की शाम व्रती महिलाओं का हुजूम घाट की ओर चल पड़ा। उनके साथ पूजा की डलियां एवं अन्य साज-सज्जा एवं प्रसाद सामग्री भी पहुंची। छठ मइया की आराधना में सोलह शृंगार से सजी-धजी महिलाओं के साथ पूरा परिवार शामिल हुआ। शाम चार बजे के बाद से ही घाट पर श्रद्धालुओं की एकत्र होने लगी।
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एक-एक वेदी पर कई व्रती महिलाएं घेरा बनाकर बैठ गईं। पूजन सामग्रियों से वेदी को सजाया गया। सभी ने आस्था की अखंड ज्योति जलाई। वेदी दीयों की रोशनी से जगमग हो गई। श्रद्धालुओं से भरे घाट का सौंदर्य देखते बन रहा था। मांग भर सिंदूर, हाथों में चटख मेहंदी, पैरों में मेहावर का चटख रंग, आकर्षक ज्वेलरी महिलाओं के स्वरूप को दिव्य बना दिया था। शाम पांच बजे के बाद जब दिन ढलने को हुआ तो इस लोक पर्व की भव्यता और बढ़ गई।
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मंगल गान के बीच व्रती महिलाएं बांस की बहंगी लिए घाट से नदी और सरोवरों मेंं उतर गईं। घुटने भर पानी में जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को कच्चे सूत में बधे पात्र से अर्घ्य देने का विधान पूरा किया गया। शहर से सटे कुआनो नदी का अमहट घाट हजारों श्रद्धालुओं से भर गया। यहां अर्घ्य देने के लिए व्रती महिलाओं की लंबी कतार देखी गई। महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी एक साथ इस विहंगम छटा को ऐसे निहारते रहे मानो लोक मंगल के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा हो। छठ मइया के पारंपरिक गीत इस पर्व की दिव्यता में चार चांद लगा रही थी। यहां भोजपुरी कलाकारों ने एक से बढ़कर एक पूजा गीत प्रस्तुत कर छाए रहे। तमाम श्रद्धालु आकर्षक भजनों पर नृत्य करने को विवश होते रहे। पूरा माहौल उमंग, उत्साह, माधुर्य और भक्ति से भर गया।
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निर्मली कुंड पर भी बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु
शहर के निर्मली कुंड मंदिर परिसर भी छठ उत्सव से जगमग हो उठा। व्रती महिलाएं शाम होते ही यहां परिवार के साथ पहुंच गईं। सरोवर के तट पर खड़ी होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर संतान के कुशल-मंगल की कामना की गई। मन में मनोरथ, हाथ में अर्घ्य का पात्र और पूजा की डलिया में जल रहे दीप की परछाई सरोवर भी सतरंगी छटा बिखेरने लगा। घाट पर मौजूद लोग इस पवित्र दृश्य से अपने को अलग नहीं कर सकें। हर कोई वेदी के सामने शीश नवाता रहा। डूबते सूर्य की लालिमा को भी श्रद्धा भाव से नमन किया गया। सरोवर में दीप दान किया गया।
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सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
शहर के अमहट घाट और निर्मली कुंड पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। एडीएम प्रतिपाल सिंह चौहान, एएसपी ओपी सिंह, एसडीएम सदर शत्रुहन पाठक, प्रभारी ईओ सुनिष्ठा सिंह के अलावा बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रही। मेला क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर निगरानी बढ़ा दी गई थी। ड्रोन कैमरे भी लगाए गए थे। कंट्रोल रूम से शरारती तत्वों पर नजर रखी गई। अर्घ्य देने का विधान पूरा होने के बाद प्रशासनिक टीम ने राहत की सांस ली। दोनों जगहों पर बैरिकेडिंग की गई थी, ताकि कोई भी श्रद्धालु गहरे पानी में न जा सकें।
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