{"_id":"5910afac4f1c1b6002851505","slug":"five-person-ill","type":"story","status":"publish","title_hn":"केसरई में चिकन पॉक्स का प्रकोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केसरई में चिकन पॉक्स का प्रकोप
बस्ती ब्यूरो
Updated Mon, 08 May 2017 11:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गौर विकास खंड के केसरई गांव में पिछले कई दिनों से चिकन पॉक्स का प्रकोप है। यहां के पांच लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। हालांकि सोमवार को टीम ने गांव में पहुंच कर दवा आदि वितरित कर दिया। इसके अलावा नलों को विसंक्रमित कर जगह-जगह एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया।
गांव की 10 वर्षीय लक्ष्मी, 26 वर्षीय विजय, 24 वर्षीय गुड़िया, 14 वर्षीय मीरा व 17 वर्षीय कन्हैया को कई दिनों से तेज बुुखार है। उनके शरीर पर दाने भी निकल आए। परिजनों ने इसे देवी का प्रकोप मानकर पूजा पाठ शुरू कर दी। इसी बीच रविवार की शाम कंट्रोल रूम को किसी ने सूचना दी। सूचना के बाद प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रजनीश के नेतृत्व में स्वास्थ्य निरीक्षक बीएल मिश्र की टीम गांव में सुबह पहुंची। बीमारों का परीक्षण करने के बाद दवा आदि वितरित किया। इसके बाद क्लोरिनेशन तथा नलों को विसंक्रमित करने के बाद एंटी लार्वा का पूरे गांव में छिड़काव कराया।
संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. राकेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि चिकन पॉक्स का प्रभाव मौसम के चलते होता है। गांवों में गंदगी व पानी भी रोग को बढ़ावा देती है। ऐसे में जरूरी है कि लोग पानी को उबाल कर ठंडा करने के बाद पीएं। जहां भी सूचनाएं मिल रही हैं। टीम को मौके पर भेजा जा रहा है। सभी सीएचसी पीएचसी पर कंट्रोल रूम स्थापित है।
विज्ञापन
वहीं गांव के लोगों का कहना है कि साफ-सफाई नही होने के चलते लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। केसरई गांव में बीमारी का प्रकोप गंदगी की ही देन है। गांव केे लोगों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से गांव में खसरा और चिकन पाक्स फैला है। इस संबंध में एडीओ पंचायत गौर राम तेज वर्मा कहते हैं कि तैनात सफाई कर्मी अपनी नियुक्ति स्थल पर नहीं जाते हैं, तो गांव वालों की शिकायत पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
दूषित पानी से एक की मौत
वाल्टरगंज।
प्रदूषित पानी से होने वाली जलोदर बीमारी ने 19 वर्षीय शहजाद की जान ले ली। उसका जिला चिकित्सालय व ओपेक चिकित्सालय कैली से इलाज चल रहा था।
क्षेत्र के पचमोहनी ग्रामपंचायत के सावत पुरवा के शहजाद के परिवार वालों का कहना है कि पिछले तीन साल से दवा करा रहे थे। जिला अस्पताल में ठीक नहीं होने पर कैली व निजी चिकित्सकों के यहां भी इलाज कराया गया लेकिन ठीक होने के बजाए बीमारी गंभीर होती गई। डॉक्टरों का कहना था कि शहजाद को जलोदर हुआ है। आर्थिक तंगी के कारण बड़े अस्पतालों में समुचित इलाज नहीं करा सका। शहजाद तीन भाइयों में छोटा था एक बहन भी है। बहन साफिया वमां शाहजहां, भाई लालबाबू ने रोते हुए बताया कि हम लोग छोटे हैंडपंप के पानी का प्रयोग करते हैं। पुरवे में एक भी इंडिया मार्क-2 हैंडपंप नहीं लगा है। मजबूरन प्रदूषित पानी पी रहे हैं।
इस संबंध में सल्टौआ के चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन चौधरी का कहना है कि जलोदर की बीमारी प्रदूषित जल पीने से ही होती है। जिसमें मरीज का लीवर संक्रमित हो जाता है। बीमारी लंबे समय तक बनी रहे तो मरीज के पेट में पानी भर जाता है लीवर काम करना बंद कर देता है।
विज्ञापन
गांव की 10 वर्षीय लक्ष्मी, 26 वर्षीय विजय, 24 वर्षीय गुड़िया, 14 वर्षीय मीरा व 17 वर्षीय कन्हैया को कई दिनों से तेज बुुखार है। उनके शरीर पर दाने भी निकल आए। परिजनों ने इसे देवी का प्रकोप मानकर पूजा पाठ शुरू कर दी। इसी बीच रविवार की शाम कंट्रोल रूम को किसी ने सूचना दी। सूचना के बाद प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रजनीश के नेतृत्व में स्वास्थ्य निरीक्षक बीएल मिश्र की टीम गांव में सुबह पहुंची। बीमारों का परीक्षण करने के बाद दवा आदि वितरित किया। इसके बाद क्लोरिनेशन तथा नलों को विसंक्रमित करने के बाद एंटी लार्वा का पूरे गांव में छिड़काव कराया।
विज्ञापन
संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. राकेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि चिकन पॉक्स का प्रभाव मौसम के चलते होता है। गांवों में गंदगी व पानी भी रोग को बढ़ावा देती है। ऐसे में जरूरी है कि लोग पानी को उबाल कर ठंडा करने के बाद पीएं। जहां भी सूचनाएं मिल रही हैं। टीम को मौके पर भेजा जा रहा है। सभी सीएचसी पीएचसी पर कंट्रोल रूम स्थापित है।
विज्ञापन
वहीं गांव के लोगों का कहना है कि साफ-सफाई नही होने के चलते लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। केसरई गांव में बीमारी का प्रकोप गंदगी की ही देन है। गांव केे लोगों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से गांव में खसरा और चिकन पाक्स फैला है। इस संबंध में एडीओ पंचायत गौर राम तेज वर्मा कहते हैं कि तैनात सफाई कर्मी अपनी नियुक्ति स्थल पर नहीं जाते हैं, तो गांव वालों की शिकायत पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
दूषित पानी से एक की मौत
वाल्टरगंज।
प्रदूषित पानी से होने वाली जलोदर बीमारी ने 19 वर्षीय शहजाद की जान ले ली। उसका जिला चिकित्सालय व ओपेक चिकित्सालय कैली से इलाज चल रहा था।
क्षेत्र के पचमोहनी ग्रामपंचायत के सावत पुरवा के शहजाद के परिवार वालों का कहना है कि पिछले तीन साल से दवा करा रहे थे। जिला अस्पताल में ठीक नहीं होने पर कैली व निजी चिकित्सकों के यहां भी इलाज कराया गया लेकिन ठीक होने के बजाए बीमारी गंभीर होती गई। डॉक्टरों का कहना था कि शहजाद को जलोदर हुआ है। आर्थिक तंगी के कारण बड़े अस्पतालों में समुचित इलाज नहीं करा सका। शहजाद तीन भाइयों में छोटा था एक बहन भी है। बहन साफिया वमां शाहजहां, भाई लालबाबू ने रोते हुए बताया कि हम लोग छोटे हैंडपंप के पानी का प्रयोग करते हैं। पुरवे में एक भी इंडिया मार्क-2 हैंडपंप नहीं लगा है। मजबूरन प्रदूषित पानी पी रहे हैं।
इस संबंध में सल्टौआ के चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन चौधरी का कहना है कि जलोदर की बीमारी प्रदूषित जल पीने से ही होती है। जिसमें मरीज का लीवर संक्रमित हो जाता है। बीमारी लंबे समय तक बनी रहे तो मरीज के पेट में पानी भर जाता है लीवर काम करना बंद कर देता है।