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Basti News: फीस बढ़ोत्तरी ने बिगाड़ा बजट, कई बच्चों ने बदले स्कूल

Mon, 15 Apr 2024 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Mon, 15 Apr 2024 12:00 AM IST
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Fee increase spoiled the budget, many children changed schools
मध्यम वर्ग के बच्चों को पढ़ाना हुआ मुश्किल्र
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शिक्षा बना व्यापार, साल दर साल हो रही फीस बढ़ोत्तरी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अप्रैल के पहले सप्ताह से स्कूल खुल गए हैं। स्कूल खुलते ही चारों तरफ फीस और किताबों की कीमत पर चर्चा हो रही है। करीब सभी स्कूलों में किताब-कॉपियों के दाम दोगुने से अधिक हो गए हैं। वहीं सालाना फीस में बढ़ोत्तरी हो गई है। इससे मध्यम वर्ग का बजट बिगाड़ गया है। हालात ये है कि सामाजिक प्रतिष्ठा के चलते अभिभावक खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। कई अभिभावकों ने स्कूल से बच्चों का नाम कटा कर दूसरे स्कूल में दाखिला कराया या निकालने की तैयारी कर रहे है।
एक परिवार में औसतन दो बच्चे होने पर करीब 20 से 25 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ सिर्फ स्कूलों का बढ़ गया है। अन्य खर्च निकालने में अभिभावकों का पसीना छूट रहा है।
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बलकटी की नेहा कहती हैं कि समझ में नहीं आ रहा कि सीमित आय में इतने रुपयों का कैसे इंतजाम करें। फीस और किताब-कॉपियां इतनी महंगी होती जा रहीं कि खरीदने में घर का बजट बिगड़ जा रहा है।
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गांधीनगर में कपड़े की छोटी सी दुकान चलाने वाले राम प्रकाश के दो बच्चे शहर के प्रतिष्ठित कॉन्वेंट स्कूल पढ़ते थे। हर साल फीस वृद्धि और साल-दर-साल किताबों की बड़ी कीमतों ने उनके हौसले को तोड़ दिया । मजबूरी में उन्हें अपने बच्चों का प्रवेश दूसरे स्कूल में कराना पड़ा।

निजी स्कूल के शिक्षक राकेश पांडेय की बेटी प्रतिष्ठित कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा थी। आर्थिक समस्या आई तो फीस भरने में देरी हो गई। प्रिंसिपल ने पहले छमाही और फिर वार्षिक परीक्षा में उसे नहीं बैठने दिया। राकेश ने किसी तरह फीस जमा किया तो परीक्षा दे सकी। मजबूरी में उन्होंने बेटी का नाम कटा कर सरकारी स्कूल में लिखा दिया।
कटरा निवासी प्रियंका के दो बच्चे शहर के नामी स्कूल के छात्र थे। कोरोना काल में पति की मृत्यु के बाद फीस जमा नहीं हो पाई। इसके कारण मजबूरी में बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूल में कराना पड़।

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शिक्षा बना व्यापार, साल-दर साल हो रही फीस बढ़ोत्तरी

मेधा के संयोजक दीनदयाल त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा एक व्यापार बन गया है। साल-दर-साल व्यापार बढ़ रहा है। यदि कोई एक स्कूल खोलता है देखते-देखते उसके कई स्कूल हो जाते हैं। वहीं प्रबंधकों की मनमानी के कारण कक्षा 10 से 12 तक के विद्याथियों के शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाती। जबकि शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए कोर्ट का आदेश है। निजी स्कूल फीस, ड्रेस, काॅपी-किताब की कीमतों में मनमानी बढ़ोत्तरी कर रखी है। इसके लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया जाएगा।
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कोट
स्कूलों की मनमानी की अगर शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
अनूप कुमार, बीएसए
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