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Basti News: गेहूं और सरसों की फसल में माहू लगने की आशंका
Sat, 04 Feb 2023 12:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 04 Feb 2023 12:13 AM IST
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गेहूं और सरसों की फसल में माहू लगने की आशंका
- कृषि वैज्ञानिक किसानों को सतर्कता बरने की दे रहे सलाह
- वातावरण में गर्मी बढ़ने पर बढ़ जाते हैं माहू
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मौसम बदल रहा है। दिन में तेज धूप और सुबह शाम ठंड के कारण सरसों व गेहूं में माहू कीट लगने की आशंका बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिक फरवरी में किसानों को सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। माहू पौधों की पत्तियों का रस चूसकर सूखा देता है। जिससे फसल खराब हो जाती है।
मौसम में आए दिन कुछ न कुछ बदलाव हो रहा है। कभी बादल छाए रहते हैं तो कभी सुबह घना कोहरा हो रहा है। दिन में तेज धूप होने के कारण कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। कृषि रक्षा विशेषज्ञ अजय कुमार तिवारी बताते हैं कि जनवरी और फरवरी में माहू अधिक लगते हैं। बताते हैं कि यह कीट हल्के काले रंग का होता है। देर से बोई गई गेहूं और सरसों की फसल में अधिक लगते हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए एजाडिरैक्टीन 0.15 प्रतिशत ईसी की 2.5 लीटर मात्रा को 400 से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इसके अलावा डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी अथवा क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी की एक लीटर मात्रा को 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। अन्य जानकारी के लिए किसान रोग या कीट लगी हुई फसल का फोटो, नाम, पता व मोबाइल नंबर सहित 9452247111 या 9452257111 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं।
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- कृषि वैज्ञानिक किसानों को सतर्कता बरने की दे रहे सलाह
- वातावरण में गर्मी बढ़ने पर बढ़ जाते हैं माहू
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मौसम बदल रहा है। दिन में तेज धूप और सुबह शाम ठंड के कारण सरसों व गेहूं में माहू कीट लगने की आशंका बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिक फरवरी में किसानों को सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। माहू पौधों की पत्तियों का रस चूसकर सूखा देता है। जिससे फसल खराब हो जाती है।
मौसम में आए दिन कुछ न कुछ बदलाव हो रहा है। कभी बादल छाए रहते हैं तो कभी सुबह घना कोहरा हो रहा है। दिन में तेज धूप होने के कारण कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है। कृषि रक्षा विशेषज्ञ अजय कुमार तिवारी बताते हैं कि जनवरी और फरवरी में माहू अधिक लगते हैं। बताते हैं कि यह कीट हल्के काले रंग का होता है। देर से बोई गई गेहूं और सरसों की फसल में अधिक लगते हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए एजाडिरैक्टीन 0.15 प्रतिशत ईसी की 2.5 लीटर मात्रा को 400 से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। इसके अलावा डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी अथवा क्लोरोपायरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी की एक लीटर मात्रा को 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। अन्य जानकारी के लिए किसान रोग या कीट लगी हुई फसल का फोटो, नाम, पता व मोबाइल नंबर सहित 9452247111 या 9452257111 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं।
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