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डीएपी के लिए व्यवस्था का खामियाजा भुगत रहे किसान

Mon, 29 Nov 2021 11:33 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Nov 2021 11:33 PM IST
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Farmers suffering the brunt of the system
डीएपी के लिए व्यवस्था का खामियाजा भुगत रहे किसान
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10 वाहनों से हो रही समितियों को डीएपी आपूर्ति
बस्ती। साधन सहकारी समितियों से किसानों को पर्याप्त डीएपी नहीं मिल पा रहा है। किल्लत के समय में समितियों को डीएपी भेजने की सुविधा भी नहीं बढ़ाई जा रही है।
जिले की सक्रिय 97 समितियों को उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए 10 ट्रक लगाए गए हैं। जिले में करीब 140000 हेक्टेयर भूमि पर रबी फसलों की खेती की जा रही है। रबी फसलों की बुआई में सबसे अधिक डीएपी का उपयोग किया जाता है, लेकिन चालू सीजन में किसानों को डीएपी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सहकारिता विभाग की मानें तो प्रतिदिन 70 समितियों को डीएपी भेजी जा रही, जबकि तमाम समितियों से हर दिन सैकड़ों किसान डीएपी न मिलने से बैरंग लौट जाते हैं। गौर ब्लॉक के चौधरी मोहम्मद इश्हिाक बताते हैं कि गेहूं की बुआई के लिए दो बोरी डीएपी मिली है। जबकि जरूरत पांच की है।
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पीसीएफ भंडार नायक केसी चौधरी ने बताया कि समितियों को उर्वरक आपूर्ति का काम ठेकेदार के माध्यम से कराया जाता है। आपूर्ति के लिए 10 ट्रक लगाए गए हैं। वाहनों की संख्या बढ़ाने के निर्देश ठेकेदार को दिए गए हैं। जल्द ही वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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डीएपी पहुंचने में लगता है तीन दिन
साधन सहकारी समितियों पर उर्वरक खत्म होने के बाद पहुंचने में तीन दिन लग जाते हैं। नया स्टाक पाने के लिए पहले सचिवों को पहले रुपये जमा करने पड़ते हैं। धनराशि जमा होने के तीसरे दिन समितियों को डीएपी पहुंचती है। इसका कारण वाहनों की कमी है।
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