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महापंचायत के लिए किसान एकजुट
basti
Updated Sun, 10 Dec 2017 12:24 AM IST
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Farmer Shimla
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मुंडेरवा।
1998 में बंद हुई मुंडेरवा चीनी मिल को लेकर 2002 के आंदोलन में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए 11 को प्रदेश के किसान फिर एकजुट होंगे। भाकियू ने शहीद मेले को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। शहीद मेले में मिल को जल्द चालू कराने की मांग उठेगी।
वर्ष 2002 में गन्ना मूल्य को बढ़ाने और चीनी मिल को चलाने की मांग को भाकियू के आंदोलन में हुई पुलिस फायरिंग में 11 दिसंबर को जिले के दो किसान बद्री प्रसाद चौधरी, धर्मराज तथा संतकबीर नगर के तिलक राज चौधरी शहीद हुए थे। कई किसान और व्यवसायी घायल हुए थे। इसके बाद भाकियू ने चीनी मिल तिराहे पर तीनों किसानों की प्रतिमा स्थापित कराई है। प्रतिवर्ष 11 दिसंबर को शहीद किसानों की याद में मेला और भाकियू की महापंचायत लगती है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीवान चंद्र चौधरी ने बताया कि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिल चलाने के लिए धन्यवाद दिया गया है। मुख्यमंत्री ने पहले ही बजट में मुंडेरवा शुगर मिल की नई इकाई के लिए 270 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। कहा कि जिस प्रकार पिपराइच शुगर मिल का शिलान्यास मुख्यमंत्री ने किया। ठीक उसी प्रकार जल्द ही मुंडेरवा शुगर मिल को शिलान्यास कर जल्द ही शुरू कराने की उम्मीद है।
घाटे के चलते 1998 से बंद है
मुंडेरवा शुगर मिल की चिमनियों से वर्ष 1998 सें धुआं नहीं निकला। राज्य चीनी निगम लिमिटेड ने इस औद्योगिक इकाई को लगातार घाटे के कारण बंद कर दिया। मिल बंद हो जाने से आसपास के क्षेत्र की भी प्रगति के पहिए थम गए। इसे लेकर धरना-प्रदर्शन, आंदोलन होते आए हैं। इन 19 वर्षों में मिल की मशीनें, ईंट, लोहा या तो दूसरे मिलों में भेज दी गए या गायब हो गए। भवन के खिड़की दरवाजे तक एक-एक कर गायब हो गए।
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चुनावी मुद्दा बनती रही मिल
मिल को चलाने के लिए पिछले 19 वर्षों में चुनावी मुद्दा हर कोई बनाता रहा। यह बात अलग रही कि किसानों का दर्द सियासतदानों के राजनीतिक शोर के बीच खो गई। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने चीनी मिल चलवाने का वादा किया था।
शहीद किसान मेला पर चर्चा
बनकटी। ब्लॉक मुख्यालय पर मुंडेरवा में 11 दिसंबर को प्रस्तावित शहीद किसान मेला पर चर्चा के लिए शनिवार को बैठक हुई। बैठक में खाद-बीज और गन्ना तथा धान विक्रय को लेकर किसानों को आ रही समस्याओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने किसानों का आह्वान किया कि वे प्रस्तावित मेले में पहुंचे। किसान नेता रामफेर चौधरी ने ग्रामीण इलाकों में विद्युत दरों में वृद्धि को वापस लेने, धान खरीद को व्यवस्थित करने, समितियों पर निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने की मांग रखी। ब्लॉक अध्यक्ष घनश्याम चौधरी ने विभिन्न कारणों से गन्ना तौल और पर्ची देने में आ रहे व्यवधान को दूर करने की बात कही। इस मौके पर परमात्मा चौधरी, दीनदयाल चौधरी, रामकेश चौधरी, मुहम्मद मुर्तजा, दानबहादुर, जोखन चौधरी, उषा, रामदौड़, घनश्याम, रामललित, मोतीलाल आदि उपस्थित रहे।
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1998 में बंद हुई मुंडेरवा चीनी मिल को लेकर 2002 के आंदोलन में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए 11 को प्रदेश के किसान फिर एकजुट होंगे। भाकियू ने शहीद मेले को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। शहीद मेले में मिल को जल्द चालू कराने की मांग उठेगी।
वर्ष 2002 में गन्ना मूल्य को बढ़ाने और चीनी मिल को चलाने की मांग को भाकियू के आंदोलन में हुई पुलिस फायरिंग में 11 दिसंबर को जिले के दो किसान बद्री प्रसाद चौधरी, धर्मराज तथा संतकबीर नगर के तिलक राज चौधरी शहीद हुए थे। कई किसान और व्यवसायी घायल हुए थे। इसके बाद भाकियू ने चीनी मिल तिराहे पर तीनों किसानों की प्रतिमा स्थापित कराई है। प्रतिवर्ष 11 दिसंबर को शहीद किसानों की याद में मेला और भाकियू की महापंचायत लगती है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीवान चंद्र चौधरी ने बताया कि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिल चलाने के लिए धन्यवाद दिया गया है। मुख्यमंत्री ने पहले ही बजट में मुंडेरवा शुगर मिल की नई इकाई के लिए 270 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। कहा कि जिस प्रकार पिपराइच शुगर मिल का शिलान्यास मुख्यमंत्री ने किया। ठीक उसी प्रकार जल्द ही मुंडेरवा शुगर मिल को शिलान्यास कर जल्द ही शुरू कराने की उम्मीद है।
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घाटे के चलते 1998 से बंद है
मुंडेरवा शुगर मिल की चिमनियों से वर्ष 1998 सें धुआं नहीं निकला। राज्य चीनी निगम लिमिटेड ने इस औद्योगिक इकाई को लगातार घाटे के कारण बंद कर दिया। मिल बंद हो जाने से आसपास के क्षेत्र की भी प्रगति के पहिए थम गए। इसे लेकर धरना-प्रदर्शन, आंदोलन होते आए हैं। इन 19 वर्षों में मिल की मशीनें, ईंट, लोहा या तो दूसरे मिलों में भेज दी गए या गायब हो गए। भवन के खिड़की दरवाजे तक एक-एक कर गायब हो गए।
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चुनावी मुद्दा बनती रही मिल
मिल को चलाने के लिए पिछले 19 वर्षों में चुनावी मुद्दा हर कोई बनाता रहा। यह बात अलग रही कि किसानों का दर्द सियासतदानों के राजनीतिक शोर के बीच खो गई। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने चीनी मिल चलवाने का वादा किया था।
शहीद किसान मेला पर चर्चा
बनकटी। ब्लॉक मुख्यालय पर मुंडेरवा में 11 दिसंबर को प्रस्तावित शहीद किसान मेला पर चर्चा के लिए शनिवार को बैठक हुई। बैठक में खाद-बीज और गन्ना तथा धान विक्रय को लेकर किसानों को आ रही समस्याओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने किसानों का आह्वान किया कि वे प्रस्तावित मेले में पहुंचे। किसान नेता रामफेर चौधरी ने ग्रामीण इलाकों में विद्युत दरों में वृद्धि को वापस लेने, धान खरीद को व्यवस्थित करने, समितियों पर निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने की मांग रखी। ब्लॉक अध्यक्ष घनश्याम चौधरी ने विभिन्न कारणों से गन्ना तौल और पर्ची देने में आ रहे व्यवधान को दूर करने की बात कही। इस मौके पर परमात्मा चौधरी, दीनदयाल चौधरी, रामकेश चौधरी, मुहम्मद मुर्तजा, दानबहादुर, जोखन चौधरी, उषा, रामदौड़, घनश्याम, रामललित, मोतीलाल आदि उपस्थित रहे।