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Basti News: अलविदा की नमाज आज, मस्जिदों-ईदगाहों में की गई तैयारी
Fri, 28 Mar 2025 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 28 Mar 2025 12:54 AM IST
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नगर बाजार(बस्ती)। रमजान के आखिरी जुमा अलविदा की नमाज शहर से लेकर गांव तक की मस्जिदों में पढ़ी जाएगी। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है।
जामा मस्जिद नगर बाजार के इमाम हाफिज नसीरुद्दीन ने बताया कि अलविदा का अर्थ है किसी खास चीज से रुखशत होना। रमज़ान का पाक महीना साल में एक ही बार आता है।
इस महीने के आखिरी हफ्ते का जुमा (शुक्रवार) बहुत खास माना जाता है। माहे-रमज़ान के आखिरी जुमे को नमाज अदा कर इस पाक महीना को अलविदा कहा जाता है। इसे अलविदा की नमाज कहते हैं।
हाफिज के अनुसार माहे-रमजान के आखिरी जुमा को ‘जुमा-तुल-विदा’ भी कहते हैं। वैसे तो, इस पाक महीने का हर जुमा नायाब और अहमियत वाला होता है। लेकिन, इस महीने के आखिरी जुमा की फ़ज़ीलत सबसे खास होती है। इस जुमा को और दिनों का सरदार कहा जाता है, इसलिए इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। चूंकि, रमज़ान में इस जुमा के बाद और कोई जुमा नहीं आता है, इसलिए इसे अलविदा जुमा कहते हैं।
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जामा मस्जिद नगर बाजार के इमाम हाफिज नसीरुद्दीन ने बताया कि अलविदा का अर्थ है किसी खास चीज से रुखशत होना। रमज़ान का पाक महीना साल में एक ही बार आता है।
इस महीने के आखिरी हफ्ते का जुमा (शुक्रवार) बहुत खास माना जाता है। माहे-रमज़ान के आखिरी जुमे को नमाज अदा कर इस पाक महीना को अलविदा कहा जाता है। इसे अलविदा की नमाज कहते हैं।
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हाफिज के अनुसार माहे-रमजान के आखिरी जुमा को ‘जुमा-तुल-विदा’ भी कहते हैं। वैसे तो, इस पाक महीने का हर जुमा नायाब और अहमियत वाला होता है। लेकिन, इस महीने के आखिरी जुमा की फ़ज़ीलत सबसे खास होती है। इस जुमा को और दिनों का सरदार कहा जाता है, इसलिए इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। चूंकि, रमज़ान में इस जुमा के बाद और कोई जुमा नहीं आता है, इसलिए इसे अलविदा जुमा कहते हैं।
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