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Basti News: सरकारी संस्था के समकक्ष खोली थी फर्जी पैरा मेडिकल फैकल्टी
Sat, 14 Oct 2023 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 14 Oct 2023 12:35 AM IST
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पैरा मेडिकल घोटाला
बरेली के बीके यादव ने लखनऊ में बनाया था फर्जी संस्था का मुख्यालय
प्रदेश के कई जिलों में फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेजों को दी थी मान्यता
मान्यता लेकर बस्ती में चल रहे थे दो फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेज
गाजियाबाद के पीयूष पांडेय की गिरफ्तारी के बाद खुला है राज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेज खोलकर बेरोजगारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के मामले में एक और खुलासा हुआ है। बृहस्पतिवार को गिरफ्तार गाजियाबाद के पीयूष ने एसआईटी को बताया है कि जेल में बंद बरेली के बीके यादव ने पैरा मेडिकल काॅलेजों को मान्यता देने वाली सरकारी संस्था के समकक्ष फर्जी पैरा मेडिकल फैकल्टी खोली थी। प्रदेश के कई जिलों में उसने इस फैकल्टी से मान्यता देकर फर्जी पैरा मेडिकल कॉलेज खुलवाया था।
हर्दिया स्थित सत्यप्रकाश पटेल का सरदार पटेल हॉस्पिटल एंड सत्यांजलि पैरा मेडिकल इंस्टीट्यूट और कप्तानगंज में चल रहे कृष्ण कुमार चौधरी के सरदार पटेल पैरा मेडिकल काॅलेज व उत्कर्ष पैरा मेडिकल काॅलेज को उसी ने मान्यता दी है।
यूपी में पैरा मेडिकल काॅलेजों को मान्यता देने से लेकर परीक्षा कराने से लेकर प्रमाणपत्र देने और उन पर निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल फैकल्टी की स्थापना की गई थी। इसके तहत प्रदेश में करीब 1700 मान्यता प्राप्त पैरा मेडिकल काॅलेज चल रहे हैं। मगर, बरेली के बीके यादव ने एक अलग उत्तर प्रदेश पैरा मेडिकल फैकल्टी नाम से संस्था बना ली थी।
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फर्जी संस्था खोलने के बाद बीके यादव प्रदेश के दूसरे छोटे-छोटे पैरा मेडिकल काॅलेजों से संपर्क करने लगा जो बड़े यूनिवर्सिटी से संबद्ध होकर विद्यार्थियों को कोर्स करवा रहे थे। उन्हें समझाता था कि उसकी फैकल्टी सभी जगह मान्य है। वह संबद्ध कर मान्यता दे सकता है। झांसा देने में कामयाब होने पर मोटी रकम लेकर खुद मान्यता देने लगा। इसका साथी स्वतंत्र श्रीवास्तव छात्र-छात्राओं का इस तरह फर्जी नामांकन करता था, ताकि जांच करने पर वेबसाइट पर नाम और नामांकन संख्या दिखाई दे। पुलिस के अनुसार बृहस्पतिवार को पकड़ा गया पीयूष पांडेय और राम अशीष यादव फर्जी मार्कशीट तैयार करते थे।
...
भेद खुलने पर अच्छे संस्थानों में करा देते थे प्रवेश
फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेज चलाने वाले ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं का प्रवेश लेते थे। इसलिए ज्यादातर बच्चे समझ नहीं पाते थे कि उन्हें फर्जी मार्कशीट थमा दी गई है। अगर कोई अभिभावक समझ जाता था या फर्जीवाड़ा पकड़कर शिकायत करता था, तो उसे समझा-बुझाकर यह लोग बड़े संस्थानों में प्रवेश करा देते थे। हालांकि, यह अंधेरगर्दी ज्यादा दिन नहीं चल पाई और विद्यार्थियों ने बगावत कर भांडाफोड़ कर दिया।
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बरेली के बीके यादव ने लखनऊ में बनाया था फर्जी संस्था का मुख्यालय
प्रदेश के कई जिलों में फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेजों को दी थी मान्यता
मान्यता लेकर बस्ती में चल रहे थे दो फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेज
गाजियाबाद के पीयूष पांडेय की गिरफ्तारी के बाद खुला है राज
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेज खोलकर बेरोजगारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के मामले में एक और खुलासा हुआ है। बृहस्पतिवार को गिरफ्तार गाजियाबाद के पीयूष ने एसआईटी को बताया है कि जेल में बंद बरेली के बीके यादव ने पैरा मेडिकल काॅलेजों को मान्यता देने वाली सरकारी संस्था के समकक्ष फर्जी पैरा मेडिकल फैकल्टी खोली थी। प्रदेश के कई जिलों में उसने इस फैकल्टी से मान्यता देकर फर्जी पैरा मेडिकल कॉलेज खुलवाया था।
हर्दिया स्थित सत्यप्रकाश पटेल का सरदार पटेल हॉस्पिटल एंड सत्यांजलि पैरा मेडिकल इंस्टीट्यूट और कप्तानगंज में चल रहे कृष्ण कुमार चौधरी के सरदार पटेल पैरा मेडिकल काॅलेज व उत्कर्ष पैरा मेडिकल काॅलेज को उसी ने मान्यता दी है।
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यूपी में पैरा मेडिकल काॅलेजों को मान्यता देने से लेकर परीक्षा कराने से लेकर प्रमाणपत्र देने और उन पर निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल फैकल्टी की स्थापना की गई थी। इसके तहत प्रदेश में करीब 1700 मान्यता प्राप्त पैरा मेडिकल काॅलेज चल रहे हैं। मगर, बरेली के बीके यादव ने एक अलग उत्तर प्रदेश पैरा मेडिकल फैकल्टी नाम से संस्था बना ली थी।
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फर्जी संस्था खोलने के बाद बीके यादव प्रदेश के दूसरे छोटे-छोटे पैरा मेडिकल काॅलेजों से संपर्क करने लगा जो बड़े यूनिवर्सिटी से संबद्ध होकर विद्यार्थियों को कोर्स करवा रहे थे। उन्हें समझाता था कि उसकी फैकल्टी सभी जगह मान्य है। वह संबद्ध कर मान्यता दे सकता है। झांसा देने में कामयाब होने पर मोटी रकम लेकर खुद मान्यता देने लगा। इसका साथी स्वतंत्र श्रीवास्तव छात्र-छात्राओं का इस तरह फर्जी नामांकन करता था, ताकि जांच करने पर वेबसाइट पर नाम और नामांकन संख्या दिखाई दे। पुलिस के अनुसार बृहस्पतिवार को पकड़ा गया पीयूष पांडेय और राम अशीष यादव फर्जी मार्कशीट तैयार करते थे।
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भेद खुलने पर अच्छे संस्थानों में करा देते थे प्रवेश
फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेज चलाने वाले ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं का प्रवेश लेते थे। इसलिए ज्यादातर बच्चे समझ नहीं पाते थे कि उन्हें फर्जी मार्कशीट थमा दी गई है। अगर कोई अभिभावक समझ जाता था या फर्जीवाड़ा पकड़कर शिकायत करता था, तो उसे समझा-बुझाकर यह लोग बड़े संस्थानों में प्रवेश करा देते थे। हालांकि, यह अंधेरगर्दी ज्यादा दिन नहीं चल पाई और विद्यार्थियों ने बगावत कर भांडाफोड़ कर दिया।