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नकली लिक्विड यूरिया : कंपनियों के प्रतिनिधि निशाने पर
Mon, 20 Jan 2025 11:13 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 20 Jan 2025 11:13 PM IST
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- मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी पुलिस, 15 जनवरी की रात कृषि विभाग की टीम ने मारा था छापा
- बोरियों, ब्रांडेड कंपनी की बाल्टी आदि के लॉट, बैच की हो रही जांच
कप्तानगंज (बस्ती)। क्षेत्र के गड़हा गौतम फ्लाईओवर के पास नकली लिक्विड यूरिया बनाने का धंधा करने वालों पर केस दर्ज होने के बाद पुलिस मास्टरमाइंड की तलाश में जुट गई है। बिना उसके गिरफ्त में आए आगे की कड़ियों को जोड़ना संभव नहीं दिख रहा है। वहीं पुलिस नकली लिक्विड यूरिया बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि भी निशाने पर हैं।
दूसरी तरफ फैक्टरी में यूरिया की 62 बोरी और ब्रांडेड कंपनी की बाल्टियां, ढक्कन सहित अन्य उपयोगी सामानों के मिलने से जांच पड़ताल में कई नए नए मामले सामने आ रहे हैं। फैक्टरी में मिली खाली यूरिया की बोरियों की टैगिंग, लाॅट नंबर और ब्रांडेड कंपनी की खाली बाल्टियां कहां से मिलीं, पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम इसकी भी जांच कर रही है।
सूत्रों की मानें तो 16 जनवरी से डीजल लिक्विड यूरिया बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों से पुलिस व कृषि विभाग की टीम संपर्क करने का प्रयास कर रही है, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने तो फैक्टरी सील करते समय किसी कर्मचारी को भेजा और न ही अपने सफाई में कोई लिखित पत्र दी। जिससे जांच टीम को उनके भी संलिप्त होने का शक है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम मौर्या ने बताया कि हर बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जब तक संचालक नहीं पकड़ा जाता तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता।
क्या था मामला
बता दें कि बस्ती-अयोध्या फोरलेन स्थित कप्तानगंज क्षेत्र के गड़हा गौतम गांव के रहने वाले अरुण प्रताप सिंह का फोरलेन पर फ्लाईओवर के पास मकान बना है। ऊपर एक टेंट हाउस की दुकान चलती है और नीचे बेसमेंट में हरैया क्षेत्र के नथउपुर निवासी अरविंद कुमार तिवारी दो माह पहले 23 नवंबर को बेसमेंट का कमरा किराया पर लिए थे। जहां उन्होंने आरओ प्लांट स्थापित किया और यूरिया केमिकल बनाने का व्यवसाय शुरू किया था। चार दिन पहले 15 जनवरी की रात ग्रामीणों की सूचना पर कप्तानगंज के प्रभारी निरीक्षक उपेंद्र कुमार मिश्रा व जिला कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम मौर्या की टीम ने देर शाम को छापा मारा था। यहां डीजल यूरिया केमिकल बनाने का उपकरण, पानी की कई टंकियां, बाल्टियां व यूरिया की बोरियां सहित अन्य उपकरण मिले थे। यहां बड़े पैमाने पर नकली फैक्ट्री संचालित होते हुए पाई गई। वहां बनने वाली लिक्विड यूरिया बीएस-6 डीजल गाड़ियों में प्रयोग किया जाने वाला है। यहां से नकली यूरिया बनाकर फोरलेन के कई ढाबों व गैर जनपदों में सप्लाई की जाती थी।
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- बोरियों, ब्रांडेड कंपनी की बाल्टी आदि के लॉट, बैच की हो रही जांच
कप्तानगंज (बस्ती)। क्षेत्र के गड़हा गौतम फ्लाईओवर के पास नकली लिक्विड यूरिया बनाने का धंधा करने वालों पर केस दर्ज होने के बाद पुलिस मास्टरमाइंड की तलाश में जुट गई है। बिना उसके गिरफ्त में आए आगे की कड़ियों को जोड़ना संभव नहीं दिख रहा है। वहीं पुलिस नकली लिक्विड यूरिया बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि भी निशाने पर हैं।
दूसरी तरफ फैक्टरी में यूरिया की 62 बोरी और ब्रांडेड कंपनी की बाल्टियां, ढक्कन सहित अन्य उपयोगी सामानों के मिलने से जांच पड़ताल में कई नए नए मामले सामने आ रहे हैं। फैक्टरी में मिली खाली यूरिया की बोरियों की टैगिंग, लाॅट नंबर और ब्रांडेड कंपनी की खाली बाल्टियां कहां से मिलीं, पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम इसकी भी जांच कर रही है।
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सूत्रों की मानें तो 16 जनवरी से डीजल लिक्विड यूरिया बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों से पुलिस व कृषि विभाग की टीम संपर्क करने का प्रयास कर रही है, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने तो फैक्टरी सील करते समय किसी कर्मचारी को भेजा और न ही अपने सफाई में कोई लिखित पत्र दी। जिससे जांच टीम को उनके भी संलिप्त होने का शक है।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम मौर्या ने बताया कि हर बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जब तक संचालक नहीं पकड़ा जाता तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता।
क्या था मामला
बता दें कि बस्ती-अयोध्या फोरलेन स्थित कप्तानगंज क्षेत्र के गड़हा गौतम गांव के रहने वाले अरुण प्रताप सिंह का फोरलेन पर फ्लाईओवर के पास मकान बना है। ऊपर एक टेंट हाउस की दुकान चलती है और नीचे बेसमेंट में हरैया क्षेत्र के नथउपुर निवासी अरविंद कुमार तिवारी दो माह पहले 23 नवंबर को बेसमेंट का कमरा किराया पर लिए थे। जहां उन्होंने आरओ प्लांट स्थापित किया और यूरिया केमिकल बनाने का व्यवसाय शुरू किया था। चार दिन पहले 15 जनवरी की रात ग्रामीणों की सूचना पर कप्तानगंज के प्रभारी निरीक्षक उपेंद्र कुमार मिश्रा व जिला कृषि अधिकारी डॉ. बाबूराम मौर्या की टीम ने देर शाम को छापा मारा था। यहां डीजल यूरिया केमिकल बनाने का उपकरण, पानी की कई टंकियां, बाल्टियां व यूरिया की बोरियां सहित अन्य उपकरण मिले थे। यहां बड़े पैमाने पर नकली फैक्ट्री संचालित होते हुए पाई गई। वहां बनने वाली लिक्विड यूरिया बीएस-6 डीजल गाड़ियों में प्रयोग किया जाने वाला है। यहां से नकली यूरिया बनाकर फोरलेन के कई ढाबों व गैर जनपदों में सप्लाई की जाती थी।