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फर्जी डीएल प्रकरण : सिर्फ आउटसोर्स कर्मियों पर कार्रवाई, बच गए अफसर

Sun, 07 Jun 2026 01:12 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 01:12 AM IST
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Fake DL case: Action taken only against outsourced employees, officers spared
बस्ती। परिवहन विभाग के संभागीय निरीक्षक प्राविधिक कार्यालय में एक साल से अधिक समय तक बैकलॉग के आधार पर फर्जी हैवी डीएल बनाने का खेल चलता रहा। यह मामला उजागर होने के बाद विभाग में एक महीने से हड़कंप की स्थिति है। शासन स्तर से दो बार जांच कराने के बाद अब जब कार्रवाई की बारी आई तो जिम्मेदार पूरे प्रकरण में कहीं भी फंसते नजर नहीं आ रहे हैं। केवल सारथी पोर्टल के लिए आउटसोर्स पर नियुक्त तीन कर्मचारियों पर ही कार्रवाई की गाज गिरी है। विभाग में चर्चा है कि जिम्मेदार इस मामले में बच निकलेंगे। बस्ती में एक साल के भीतर 4500 फर्जी हैवी डीएल जारी किए गए हैं। बैकलॉग के आधार पर पता बदलकर बस्ती, मिर्जापुर, गोंडा, बागपत समेत विभिन्न जिलों के रहने वाले लोगों के नाम हैवी डीएल जारी हुए हैं। अमर उजाला में इसका खुलासा होने के बाद शासन स्तर तक हलचल तेज हुई। सूबे के परिवहन आयुक्त के निर्देश पर दो स्तर से प्रकरण की जांच कराई गई। उप परिवहन आयुक्त अयोध्या राजकुमार सिंह और शासन की तकनीकी टीम ने फर्जी डीएल मामले की अलग-अलग जांच की। इसमें डेढ़ सौ से अधिक फर्जी तरीके से जारी किए गए हैवी डीएल का डाटा खंगाला गया। दोनों स्तर से हुई जांच की रिपोर्ट 15 दिन पहले ही शासन को प्रेषित हो चुकी है। शुरूआत में चर्चा थी कि पूरे प्रकरण में विभाग के स्थानीय कई जिम्मेदार भी नप सकते हैं। क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी डीएल बनने के बाद भी स्थानीय स्तर पर मामला पकड़ में नहीं आया। मगर जब कार्रवाई की बारी आई तो केवल आउटसोर्स पर तैनात तीनों कर्मचारी की ही सेवा समाप्त कर मामले का पटाक्षेप कर दिया गया है। वहीं उप आयुक्त परिवहन की जांच रिपोर्ट के बाद यहां तैनात तत्कालीन आरआई सीमा गौतम को निलंबित कर दिया गया था। यह कार्रवाई इस मामले के बजाय पूर्व में गोरखपुर में उनके तैनाती के दौरान भारी वाहनों के फिटनेस में हुई अनियमितता से जोड़कर की गई थी। अभी तक बस्ती के फर्जी हैवी डीएल प्रकरण में एक भी विभागीय अधिकारी और कर्मचारी दोषी नहीं ठहराए गए हैं।
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आउटसोर्स कर्मियों को किया गया आगे
जानकारों का कहना है कि दलालों का सिंडीकेट अरुणाचल प्रदेश से बैकलॉग एंट्री कराने के बाद बस्ती आरआई कार्यालय से पता बदलने का आवेदन देकर हैवी डीएल जारी कराता रहा। इसके बदले आवेदकों से 35 से 40 हजार रुपये प्रति डीएल वसूली होती रही। जानकारों के अनुसार, इस रकम में विभागीय अधिकारियों का बाकायदा हिस्सा पहुंचता रहा। इसीलिए इतने बड़े गड़बड़झाला के बाद भी जिम्मेदार मौन थे। इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए सारथी पोर्टल के लिए तैनात वेंडरों को आगे कर दिया गया था। आरआई का पासवर्ड और लॉगिन इन्हीं आउटसोर्स कर्मियों के पास रहता था। बैकलॉग डीएल के पता बदलने का आवेदन होते ही आउटसोर्स कर्मी आरआई के लॉगिन से इसे अप्रूव करते रहे। इसकी जांच आरआई या उनके ऊपर स्तर के अधिकारियों द्वारा नहीं की जाती थी। चर्चा हैं कि इस खेल में जिम्मेदारों की संलिप्तता होने के चलते आरआई कार्यालय में डीएल के लिए स्थाई बाबू तक तैनात नहीं किए गए थे। मामला उजागर होने के बाद आनन-फानन स्थाई डीएल के लिए लिपिक प्रेम सागर की तैनाती की गई।
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