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Basti News: खोखले धरातल पर बिजली का तानाबाना, धराशायी हो रहे खंभे-तार
Wed, 10 Jul 2024 04:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 10 Jul 2024 04:02 AM IST
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बड़ेवन की 33 केवी लाइन पर फाल्ट दुरुस्त करने लाइनमैन।
25-30 किमी रफ्तार से हवा चलने पर टूट जाते हैं 10 से 20 खंभे
कभी रात तो कभी दिनभर बिजली न मिलने से परेशान हो रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। छतों पर चढ़कर कटिया कनेक्शन ढूंढने वाले बिजली निगम का तानाबाना खोखले धरातल पर खड़ा है, जोे हल्की आंधी और बारिश में ताश के पत्तों की तरह बिखर जाता है। 25-30 किमी रफ्तार से हवा चलने पर भी जिले में 10-20 खंभे टूट कर गिर जाना आम बात है।
उपभोक्ता कहते हैं कि कोई विषम परिस्थिति हो तो कोई बात नहीं लेकिन, बात-बात पर मरम्मत व फाल्ट के नाम पर बिना सूचना के घंटों लाइट कटना अराजकता नहीं तो क्या है। स्मार्ट मीटर का सर्वे कर रहे सिस्टम का बुनियादी ढांचा अगर इतना जर्जर है तो बिजली का बिल वसूलने का उनका कोई अधिकार नहीं। उपभोक्ता आए दिन बिजली आपूर्ति के लिए परेशान रहते हैं।
सोमवार की रात में आधा शहर करीब चार घंटे तक अंधेरे में डूबा रहा। गांधीनगर उपकेंद्र के पांचों फीडर से रात 9:30 बजे आपूर्ति ठप हो गई। बिजली जाने के बाद सिविल लाइंस, आवास विकास, कंपनी बाग सहित दर्जनभर से अधिक मोहल्लों में अंधेरा छा गया। देर रात करीब 2 बजे आपूर्ति सामान्य हो पाई थी। निगम के अनुसार, उपकेंद्र की 33 केवी लाइन फाल्ट हो गई थी।
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काम चलाऊ व्यवस्था के तहत गांधीनगर उपकेंद्र के पांचों फीडर को बड़ेबन उपकेंद्र से जोड़ा गया, लेकिन 11:20 बजे बड़ेवन लाइन में भी फाल्ट आ गई। इसके बाद आधी रात तक फाल्ट ढूंढने का सिलसिला चलता रहा। आखिरकार मोहता घाट के पास 33 केवी लाइन का जंफर टूटा मिला। तब तक रात के करीब 12:30 बजे गए। जंफर ठीक करने में रात के करीब एक बज गए। धीरे-धीरे लाइन पर लोड दिया गया और रात करीब 2 बजे तक आधे शहर की बिजली आपूर्ति सामान्य हो पाई।
जिले में चार से पांच दशक पुरानी लाइनों में लगाए गए सामान आज भी वैसे ही बने हुए हैं। मगर, बिजनेस प्लान, सौभाग्य व दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत बनाई गई लाइनें बारिश के समय सर्वाधिक खराब हो रही हैं। विभागीय अनुमान के मुताबिक चालू मानसून सत्र में अब तक करीब 150 जगहों पर खंभे टूट चुके हैं।
...
दैवीय आपदा का नहीं रखते हैं रिकॉर्ड
अभियंताओं से जब पूछा गया कि इस मानसून सीजन में अब तक कितने खंभे व तार टूटे और कहां-कहां ट्रांसफाॅर्मर खराब हुए। इस बारे में कोई अभियंता स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाया। अभियंताओं का कहना है कि इसका रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। जहां जो नुकसान हुआ है, उसे ठीक कर दिया जाता है। जानकारी के अनुसार, जिले में चार वितरण खंड, 16 उपखंड और 37 विद्युत उपकेंद्र हैं। लाइनों के रख-रखाव और मरम्मत के लिए 524 कुशल-अकुशल संविदाकर्मी सेवाएं दे रहे हैं।
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भीषण गर्मी में नहीं हुई दिक्कत, आखिर अब क्या हुआ
जून में भीषण गर्मी में 225 मेगावाट बिजली की खपत हो रही थी। मानसून सीजन शुरू होते ही यह खपत 170 मेगावाट हो गई। कंपनी बाग निवासी उपभोक्ता हरिश्चंद्र गुप्ता बताते हैं कि भीषण गर्मी में कटौती बहुत कम हो रही थी। गर्मी में कभी ऐसी दिक्कत नहीं आई कि घंटों तक कटौती की गई हो। बारिश शुरू होने के बाद से ही कटौती बढ़ गई है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि खपत कम होते ही कटौती बढ़ गई।
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बिजली आपूर्ति बेपटरी होने के प्रमुख कारण
- तारों से पेड़ों की डालियों की छंटाई न करना।
- लाइनों की सही मरम्मत यथा पुराने इंसुलेटर व जंफर आदि न बदलना।
- नालियों और गड्ढों के किनारे के खंभों की ग्राउटिंग कमजोर होना।
- ट्रांसफाॅर्मर की ठीक तरह से अर्थिंग न होना।
- डिस्क व पैनल में नमी आ जाना।
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कोट
बारिश के समय नमी बढ़ जाती है। इससे लाइनों में फाल्ट अधिक आता है। यही कारण है कि बार-बार कटौती की जाती है। फिलहाल, पुरानी लाइनों के सुदृढ़ीकरण का कार्य चल रहा है। आने वाले दिनों में समस्याएं कम हो जाएंगी।
-मनोज कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, नगरीय
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कभी रात तो कभी दिनभर बिजली न मिलने से परेशान हो रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। छतों पर चढ़कर कटिया कनेक्शन ढूंढने वाले बिजली निगम का तानाबाना खोखले धरातल पर खड़ा है, जोे हल्की आंधी और बारिश में ताश के पत्तों की तरह बिखर जाता है। 25-30 किमी रफ्तार से हवा चलने पर भी जिले में 10-20 खंभे टूट कर गिर जाना आम बात है।
उपभोक्ता कहते हैं कि कोई विषम परिस्थिति हो तो कोई बात नहीं लेकिन, बात-बात पर मरम्मत व फाल्ट के नाम पर बिना सूचना के घंटों लाइट कटना अराजकता नहीं तो क्या है। स्मार्ट मीटर का सर्वे कर रहे सिस्टम का बुनियादी ढांचा अगर इतना जर्जर है तो बिजली का बिल वसूलने का उनका कोई अधिकार नहीं। उपभोक्ता आए दिन बिजली आपूर्ति के लिए परेशान रहते हैं।
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सोमवार की रात में आधा शहर करीब चार घंटे तक अंधेरे में डूबा रहा। गांधीनगर उपकेंद्र के पांचों फीडर से रात 9:30 बजे आपूर्ति ठप हो गई। बिजली जाने के बाद सिविल लाइंस, आवास विकास, कंपनी बाग सहित दर्जनभर से अधिक मोहल्लों में अंधेरा छा गया। देर रात करीब 2 बजे आपूर्ति सामान्य हो पाई थी। निगम के अनुसार, उपकेंद्र की 33 केवी लाइन फाल्ट हो गई थी।
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काम चलाऊ व्यवस्था के तहत गांधीनगर उपकेंद्र के पांचों फीडर को बड़ेबन उपकेंद्र से जोड़ा गया, लेकिन 11:20 बजे बड़ेवन लाइन में भी फाल्ट आ गई। इसके बाद आधी रात तक फाल्ट ढूंढने का सिलसिला चलता रहा। आखिरकार मोहता घाट के पास 33 केवी लाइन का जंफर टूटा मिला। तब तक रात के करीब 12:30 बजे गए। जंफर ठीक करने में रात के करीब एक बज गए। धीरे-धीरे लाइन पर लोड दिया गया और रात करीब 2 बजे तक आधे शहर की बिजली आपूर्ति सामान्य हो पाई।
जिले में चार से पांच दशक पुरानी लाइनों में लगाए गए सामान आज भी वैसे ही बने हुए हैं। मगर, बिजनेस प्लान, सौभाग्य व दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत बनाई गई लाइनें बारिश के समय सर्वाधिक खराब हो रही हैं। विभागीय अनुमान के मुताबिक चालू मानसून सत्र में अब तक करीब 150 जगहों पर खंभे टूट चुके हैं।
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दैवीय आपदा का नहीं रखते हैं रिकॉर्ड
अभियंताओं से जब पूछा गया कि इस मानसून सीजन में अब तक कितने खंभे व तार टूटे और कहां-कहां ट्रांसफाॅर्मर खराब हुए। इस बारे में कोई अभियंता स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाया। अभियंताओं का कहना है कि इसका रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। जहां जो नुकसान हुआ है, उसे ठीक कर दिया जाता है। जानकारी के अनुसार, जिले में चार वितरण खंड, 16 उपखंड और 37 विद्युत उपकेंद्र हैं। लाइनों के रख-रखाव और मरम्मत के लिए 524 कुशल-अकुशल संविदाकर्मी सेवाएं दे रहे हैं।
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भीषण गर्मी में नहीं हुई दिक्कत, आखिर अब क्या हुआ
जून में भीषण गर्मी में 225 मेगावाट बिजली की खपत हो रही थी। मानसून सीजन शुरू होते ही यह खपत 170 मेगावाट हो गई। कंपनी बाग निवासी उपभोक्ता हरिश्चंद्र गुप्ता बताते हैं कि भीषण गर्मी में कटौती बहुत कम हो रही थी। गर्मी में कभी ऐसी दिक्कत नहीं आई कि घंटों तक कटौती की गई हो। बारिश शुरू होने के बाद से ही कटौती बढ़ गई है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि खपत कम होते ही कटौती बढ़ गई।
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बिजली आपूर्ति बेपटरी होने के प्रमुख कारण
- तारों से पेड़ों की डालियों की छंटाई न करना।
- लाइनों की सही मरम्मत यथा पुराने इंसुलेटर व जंफर आदि न बदलना।
- नालियों और गड्ढों के किनारे के खंभों की ग्राउटिंग कमजोर होना।
- ट्रांसफाॅर्मर की ठीक तरह से अर्थिंग न होना।
- डिस्क व पैनल में नमी आ जाना।
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कोट
बारिश के समय नमी बढ़ जाती है। इससे लाइनों में फाल्ट अधिक आता है। यही कारण है कि बार-बार कटौती की जाती है। फिलहाल, पुरानी लाइनों के सुदृढ़ीकरण का कार्य चल रहा है। आने वाले दिनों में समस्याएं कम हो जाएंगी।
-मनोज कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, नगरीय