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Basti News: जीजीआईसी में धमाके की गूंज... रेस्क्यू कर घायलों को निकाला
Thu, 08 May 2025 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 08 May 2025 12:57 AM IST
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बस्ती। दोपहर एक बजे जीजीआईसी का जर्जर भवन अचानक धमाके से गूंज उठा। गांधीनगर मार्ग पर सायरन बजने लगा। पुलिस के वज्र वाहन, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस सभी घटना स्थल की तरफ दौड़ने लगे। आनन-फानन आम अवाम सड़क खाली करने लगा। विद्यालय में बचाव कार्य शुरू हो गया। पुलिस, अफसर, स्वास्थ्य कर्मचारी, फायर सुरक्षा बल, एनसीसी कैडेट हर कोई अलर्ट मोड में भागदौड़ करने लगा। अफरा-तफरी के बीच बाहर भीड़ जुट गई। बाद में पता चला कि मॉकडि्रल हो रही है।
युद्ध के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने का यह पूर्वाभ्यास (मॉकडि्रल) की गई। विभिन्न विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी टीम का नेतृत्व कर रहे थे। डीएम, एसपी एवं अन्य प्रशासनिक अफसर भी पल-पल की निगरानी करते रहे। विद्यालय के खाली पड़े भवन में विस्फोट के बाद आग लग गई। पुलिस बल और फायर ब्रिगेड आग बुझाने में जुट गया। भवन के अंदर रखे मानव के पुतलों का रेस्क्यू शुरू हो गया।
स्वास्थ्य कर्मी सधे अंदाज में स्ट्रेचर के साथ घटना स्थल से निकाले जा रहे घायलों को एंबुलेंस तक पहुंचाने में जुट गए। एनसीसी कैडेटों ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। एक-एक घायल को स्वास्थ्य कैंप में पहुंचाकर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा था। विद्यालय की छात्राएं और शिक्षक पूर्वाभ्यास के साक्षी बने। उन्हें युद्ध के दौरान विषम परिस्थितियों से निपटने की सीख मिली।
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प्रशासनिक अफसरों के अलावा पुलिस, आपदा टीम, स्वास्थ्य टीम, फायर सुरक्षा टीम में शामिल कर्मचारियों ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई। इस दौरान संसाधनों का भी प्रदर्शन हुआ। अचानक भगदड़ जैसी स्थिति देख आसपास के लोग भी बाहर निकल गए। उन्हें बैरिकेडिंग से अंदर नहीं जाने दिया गया। अधिकारी विद्यालय परिसर की सुरक्षा की कमान खुद संभाल रखे थे। इस मौके पर डीएम रवीश गुप्ता, एसपी अभिनंदन, एडीएम प्रतिपाल सिंह चौहान, सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, एएसपी ओपी सिंह, सीओ सिटी सत्येंद्र भूषण तिवारी, सीओ स्वर्णिमा सिंह के अलावा सीएमओ डॉ. राजीव निगम, डीआईओएस जगदीश प्रसाद शुक्ल, प्रधानाचार्य अपर्णा भारद्वाज समेत सभी एसडीएम आदि मौजूद रहे।
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कुछ देर के लिए ठप हो गया आवागमन
मॉकडि्रल के दौरान जीजीआईसी के बाहर गांधीनगर मार्ग पर दोनों तरफ से आवागमन बंद कर दिया गया था। लगभग एक घंटे तक चले पूर्वाभ्यास के दौरान रोडवेज से लेकर इंदिरा नगर मोड़ तक किसी वाहन को प्रवेश नहीं दिया गया। एक किमी का यह क्षेत्र हाई अलर्ट जोन बन गया था। धमाका होते ही इस मार्ग पर सायरन बजाते हुए एंबुलेंस, पुलिस के वज्र वाहन और फायर ब्रिगेड के वाहन दौड़ते नजर आए। जिन्हें इस आयोजन के बारे में नहीं पता था वे मौके की नजाकत को नहीं समझ पाए। अनजान लोग काफी देर तक सकते में रहे। उन्हें किसी घटना का आभास होने लगा। हड़बड़ाए लोग आसपास खड़े लोगों से पूछते नजर आए। मॉकडि्रल की जानकारी होने पर ही लोगों को सुकून मिला।
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रोडवेज से मालवीय मार्ग तक लग गया जाम
जीजीआईसी में पूर्वाभ्यास के दौरान गांधीनगर मार्ग पर आवागमन बंद होने के कारण रोडवेज तक जाम लग गया। नेहरू तिराहा से गांधीनगर की तरफ नहीं बढ़ पाने के कारण वाहन घूमने लगे। इस वजह से जाम लगता गया। मालवीय मार्ग पर रंजीत चौराहे तक रोडवेज बस, स्कूल बस, टैक्सी, टेंपो जाम में फंसे रहे। वहीं, राेडवेज से पचपेड़िया मोड़ और अस्पताल चौराहे तक जाम लगा रहा। पूर्वाभ्यास से खाली होने के बाद पुलिस को जाम हटवाने में घंटों मशक्कत करनी पड़ी। दोपहर तीन बजे तक लोग जाम से जूझते नजर आए। बाइक सवार मालवीय मार्ग से गांधीनगर मार्ग पहुंचने के लिए गलियों का सहारा लिए। वहीं, रेलवे स्टेशन एवं पुरानी बस्ती जाने वाले लोगों को सेंटबेसिल के रास्ते पटेल चौक मार्ग से होकर निकलना पड़ा।
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युद्ध के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने का यह पूर्वाभ्यास (मॉकडि्रल) की गई। विभिन्न विभागों के अधिकारी अपनी-अपनी टीम का नेतृत्व कर रहे थे। डीएम, एसपी एवं अन्य प्रशासनिक अफसर भी पल-पल की निगरानी करते रहे। विद्यालय के खाली पड़े भवन में विस्फोट के बाद आग लग गई। पुलिस बल और फायर ब्रिगेड आग बुझाने में जुट गया। भवन के अंदर रखे मानव के पुतलों का रेस्क्यू शुरू हो गया।
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स्वास्थ्य कर्मी सधे अंदाज में स्ट्रेचर के साथ घटना स्थल से निकाले जा रहे घायलों को एंबुलेंस तक पहुंचाने में जुट गए। एनसीसी कैडेटों ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। एक-एक घायल को स्वास्थ्य कैंप में पहुंचाकर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा था। विद्यालय की छात्राएं और शिक्षक पूर्वाभ्यास के साक्षी बने। उन्हें युद्ध के दौरान विषम परिस्थितियों से निपटने की सीख मिली।
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प्रशासनिक अफसरों के अलावा पुलिस, आपदा टीम, स्वास्थ्य टीम, फायर सुरक्षा टीम में शामिल कर्मचारियों ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई। इस दौरान संसाधनों का भी प्रदर्शन हुआ। अचानक भगदड़ जैसी स्थिति देख आसपास के लोग भी बाहर निकल गए। उन्हें बैरिकेडिंग से अंदर नहीं जाने दिया गया। अधिकारी विद्यालय परिसर की सुरक्षा की कमान खुद संभाल रखे थे। इस मौके पर डीएम रवीश गुप्ता, एसपी अभिनंदन, एडीएम प्रतिपाल सिंह चौहान, सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती, एएसपी ओपी सिंह, सीओ सिटी सत्येंद्र भूषण तिवारी, सीओ स्वर्णिमा सिंह के अलावा सीएमओ डॉ. राजीव निगम, डीआईओएस जगदीश प्रसाद शुक्ल, प्रधानाचार्य अपर्णा भारद्वाज समेत सभी एसडीएम आदि मौजूद रहे।
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कुछ देर के लिए ठप हो गया आवागमन
मॉकडि्रल के दौरान जीजीआईसी के बाहर गांधीनगर मार्ग पर दोनों तरफ से आवागमन बंद कर दिया गया था। लगभग एक घंटे तक चले पूर्वाभ्यास के दौरान रोडवेज से लेकर इंदिरा नगर मोड़ तक किसी वाहन को प्रवेश नहीं दिया गया। एक किमी का यह क्षेत्र हाई अलर्ट जोन बन गया था। धमाका होते ही इस मार्ग पर सायरन बजाते हुए एंबुलेंस, पुलिस के वज्र वाहन और फायर ब्रिगेड के वाहन दौड़ते नजर आए। जिन्हें इस आयोजन के बारे में नहीं पता था वे मौके की नजाकत को नहीं समझ पाए। अनजान लोग काफी देर तक सकते में रहे। उन्हें किसी घटना का आभास होने लगा। हड़बड़ाए लोग आसपास खड़े लोगों से पूछते नजर आए। मॉकडि्रल की जानकारी होने पर ही लोगों को सुकून मिला।
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रोडवेज से मालवीय मार्ग तक लग गया जाम
जीजीआईसी में पूर्वाभ्यास के दौरान गांधीनगर मार्ग पर आवागमन बंद होने के कारण रोडवेज तक जाम लग गया। नेहरू तिराहा से गांधीनगर की तरफ नहीं बढ़ पाने के कारण वाहन घूमने लगे। इस वजह से जाम लगता गया। मालवीय मार्ग पर रंजीत चौराहे तक रोडवेज बस, स्कूल बस, टैक्सी, टेंपो जाम में फंसे रहे। वहीं, राेडवेज से पचपेड़िया मोड़ और अस्पताल चौराहे तक जाम लगा रहा। पूर्वाभ्यास से खाली होने के बाद पुलिस को जाम हटवाने में घंटों मशक्कत करनी पड़ी। दोपहर तीन बजे तक लोग जाम से जूझते नजर आए। बाइक सवार मालवीय मार्ग से गांधीनगर मार्ग पहुंचने के लिए गलियों का सहारा लिए। वहीं, रेलवे स्टेशन एवं पुरानी बस्ती जाने वाले लोगों को सेंटबेसिल के रास्ते पटेल चौक मार्ग से होकर निकलना पड़ा।