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Basti News: कुत्तों का आतंक...सिस्टम पर मुआवजे के दबाव से राहत की उम्मीद
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शहर के पचपेड़िया मार्ग पर लावारिश कुत्तों की भरमार। संवाद
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बस्ती। आवारा कुत्तों का आतंक खत्म नहीं हो रहा है। गलियों, मोहल्लों से लेकर सड़क, अस्पताल, स्टेशन, कचहरी हर जगह लावारिश कुत्तों की मौजूदगी देखी जा रही है।
अधिक भीड़, चहल- पहल और वाहनों के आवाजाही के शोर में यह कुत्ते अक्सर अपना आपा खो बैठते हैं। आक्रामक होकर किसी न किसी पर हमला कर देते हैं। कुत्तों के नोचने से प्रतिदिन सौ से अधिक लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ रहा है।
कुत्तों के काटने पर मुआवजा देने के सुप्रीम काेर्ट के आदेश के बाद आम लोगों ने काफी राहत महसूस की है। अब लोगों में उम्मीद जगी है कि सार्वजनिक जगहाें पर लावारिस कुत्तों का भय अब खत्म होगा। क्योंकि मुआवजा से बचने के लिए नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र में कुत्तों के संरक्षण के लिए प्रशासनिक पहल तेजी से शुरू होगी।
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स्थानीय स्तर के जिम्मेदारों का कहना है कि इस विषय पर शीघ्र शासन स्तर से दिशा निर्देश मिलने वाले हैं। इसके बाद लावारिश कुत्तों के प्रबंधन की व्यवस्था शुरू हो जाएगी। इनके संरक्षण के लिए जगह-जगह शेल्टर होम बनाए जाएंगे।
जंतु विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. जेपी शुक्ला बताते हैं प्रचंड गर्मी और प्रजनन के सीजन में लावारिश कुत्ते ज्यादा खुंखार होते हैं। गर्मी के बीच शोर-शराबा अधिक होने से इनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। यह किसी को भी सामने पड़ने पर नोच लेते हैं। कुछ कुत्तों में तो भेड़ियों जैसे गुण देखने को मिलते हैं। अनायास ही यह बच्चों और जानवरों पर हमला करने लगते हैं।
कुत्तों के काटने से मासूम और महिलाओं के गंभीर रूप से घायल होने या मौत तक के मामले सामने आ चुके हैं। प्रकृति का असंतुलन भी इन कुत्तों के मानसिक संतुलन बिगाड़ने में काफी सहायक सिद्ध हो रहा है।
यहीं वजह हैं कि अपने से कमजोर जानवर जैसे हिरन, बिल्ली, मुर्गा, बकरी आदि पर भी कुत्ते आक्रामक होकर हमला कर दे रहे हैं। लावारिश कुत्तों के सरंक्षण का सुप्रीम आदेश का पालन होना जरूरी है।
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अधिक भीड़, चहल- पहल और वाहनों के आवाजाही के शोर में यह कुत्ते अक्सर अपना आपा खो बैठते हैं। आक्रामक होकर किसी न किसी पर हमला कर देते हैं। कुत्तों के नोचने से प्रतिदिन सौ से अधिक लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ रहा है।
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कुत्तों के काटने पर मुआवजा देने के सुप्रीम काेर्ट के आदेश के बाद आम लोगों ने काफी राहत महसूस की है। अब लोगों में उम्मीद जगी है कि सार्वजनिक जगहाें पर लावारिस कुत्तों का भय अब खत्म होगा। क्योंकि मुआवजा से बचने के लिए नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र में कुत्तों के संरक्षण के लिए प्रशासनिक पहल तेजी से शुरू होगी।
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स्थानीय स्तर के जिम्मेदारों का कहना है कि इस विषय पर शीघ्र शासन स्तर से दिशा निर्देश मिलने वाले हैं। इसके बाद लावारिश कुत्तों के प्रबंधन की व्यवस्था शुरू हो जाएगी। इनके संरक्षण के लिए जगह-जगह शेल्टर होम बनाए जाएंगे।
जंतु विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ. जेपी शुक्ला बताते हैं प्रचंड गर्मी और प्रजनन के सीजन में लावारिश कुत्ते ज्यादा खुंखार होते हैं। गर्मी के बीच शोर-शराबा अधिक होने से इनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। यह किसी को भी सामने पड़ने पर नोच लेते हैं। कुछ कुत्तों में तो भेड़ियों जैसे गुण देखने को मिलते हैं। अनायास ही यह बच्चों और जानवरों पर हमला करने लगते हैं।
कुत्तों के काटने से मासूम और महिलाओं के गंभीर रूप से घायल होने या मौत तक के मामले सामने आ चुके हैं। प्रकृति का असंतुलन भी इन कुत्तों के मानसिक संतुलन बिगाड़ने में काफी सहायक सिद्ध हो रहा है।
यहीं वजह हैं कि अपने से कमजोर जानवर जैसे हिरन, बिल्ली, मुर्गा, बकरी आदि पर भी कुत्ते आक्रामक होकर हमला कर दे रहे हैं। लावारिश कुत्तों के सरंक्षण का सुप्रीम आदेश का पालन होना जरूरी है।