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Basti News: हड़ताल पर रहे डॉक्टर और इंटर्न...भटकते रहे मरीज
Thu, 15 Aug 2024 02:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 15 Aug 2024 02:43 AM IST
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डिकल कालेज में रेंजीडेंस चिकित्सक धरने पर बैठे।
मेडिकल कॉलेज : कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ दरिंदगी और हत्या के विरोध में दूसरे दिन भी हुआ आंदोलन
ओपीडी में नहीं बना पर्चा, इमरजेंसी वार्ड हो गया फुल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ दरिंदगी और हत्या के विरोध में दूसरे दिन बुधवार को मेडिकल कॉलेज में आंदोलन की लौ धीमी नहीं पड़ी। रेजीडेंट डॉक्टर और इंटर्न कामकाज छोड़ हड़ताल पर रहे। ओपेक चिकित्सालय कैली पर धरना-प्रदर्शन भी हुआ। इस दौरान ओपीडी सेवाएं ठप रहीं। मरीजों का पर्चा नहीं बन पाया। ऐसे में 35 बेड का इमरजेंसी वार्ड फुल हो गया है। मरीज और तीमारदार इधर-उधर भटकते रहे। हालांकि, दोपहर दो बजे के बाद डॉक्टर काम पर लौट आए।
मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर और इंटर्न सुबह करीब नौ बजे अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए। दरिंदों को सजा दो एवं जस्टिस फाॅर वोमेन डॉक्टर लिखा हुआ पोस्टर हाथ में लहराते हुए देर तक नारेबाजी करते रहे। इसके बाद आंदोलनरत चिकित्सक धरने पर बैठ गए। डॉक्टरों की हड़ताल से मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्था दो दिन से बेपटरी हो गई है। ओपीडी सेवा बिल्कुल ठप है।
दूर-दराज से आए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई मरीज जानकारी के अभाव में ओपीडी के बाहर डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहे। बाद में उन्हें निराश लौटना पड़ा। परिसर में कई मरीज अपने पुराने पर्चे के साथ डॉक्टर से मिलने के लिए भटकते नजर आए। यहां प्रतिदिन एक से डेढ़ हजार मरीज पहुंचते हैं। ज्यादातर भार ओपीडी ही संभालता है। लेकिन, हड़ताल की वजह से इन मरीजों को उचित परामर्श नहीं मिल पा रहा है।
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ओपीडी सेवाएं ठप होने से लोग इमरजेंसी में भर्ती होने के लिए जुगाड़ लगाते तीमारदार नजर आए। इसके लिए कई लोगों ने सीएमएस और जनप्रतिनिधियों से संपर्क भी साधा। बावजूद इसके डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो सके। इमरजेंसी के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की भीड़ लगी रही है। 35 बेड की इमरजेंसी फुल हो गई है। यहां एक बेड दो-दो मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।
...
मरीजों ने बताई समस्या
ओपीडी के बाहर मौजूद डुमरियागंज से आई सरिता ने बताया की पेट दर्द से वह परेशान है। हड़ताल की वजह से कोई डॉक्टर नहीं मिला। कप्तानगंज से आए आशू ने बताया कि पेट दर्द की शिकायत थी। मेडिसन विभाग बंद है। अब दूसरे अस्पताल में जाएंगे। लालगंज की सुनीता कमर दर्द से पीड़ित हैं। हड़ताल की वजह से उन्हें भी निराश लौटना पड़ा। ओझागंज के कृष्ण कुमार ने बताया कि मानसिक विभाग में परामर्श के लिए आए थे। लेकिन, डॉक्टर नहीं मिले।
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चिकित्सकों ने प्रधानाचार्य से मांगी सुरक्षा, सौंपा ज्ञापन
डॉ. रजत पांडेय, डॉ. श्याम गुप्ता, डॉ. राहुल गुप्ता, डॉ. सौरभजीत, डॉ. अजीत मौर्या, डॉ. आर्य मान सिंह, डॉ. अंजली पांंडेय, डाॅ. श्वेता श्रीवास्तव आदि ने मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को आठ सूत्री ज्ञापन सौंपकर सुरक्षा की मांग की। कहा कि प्रत्येक वार्ड में डॉक्टरों के लिए एक अलग चिकित्सक कक्ष की व्यवस्था की जाए, ताकि रात्रि कालीन ड्यूटी में असुविधा न हो। अस्पताल परिसर और निकासी द्वार पर सीसीटीवी कैमरे और गार्ड की व्यवस्था की जाए। इंटर्न और रेजीडेंट डॉक्टरों के लिए परिसर में हॉस्टल की सुविधा की जाए। महिला डॉक्टर और इंटर्न की रात्रि कालीन ड्यूटी के समय आने-जाने के लिए वाहन और महिला गार्ड की सुविधाएं दी जाएं। इसके अलावा छात्रावास एवं अतिथि परिसर में रोशनी की व्यवस्था, पार्किंग स्थल चिह्नित हो और पानी का इंतजाम किया जाए। छात्रावास में नियमित सफाई और परिसर में पुलिस बूथ स्थापित कराया जाए।
जिला और महिला अस्पताल पर बढ़ा मरीजों का भार
मेडिकल कॉलेज में हड़ताल होने से जिला अस्पताल और महिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। जिला अस्पताल में बुधवार को अधिकांश चिकित्सकों के कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी लाइन देखी गई। यहां दिन में एक बजेे तक 500 से अधिक मरीजों का पर्चा बन चुका था। वहीं महिला अस्पताल में भी महिला मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा रही। 12 बजे तक ढाई सौ मरीज पहुंच चुके थे। इस वजह से चिकित्सकों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
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ओपीडी में नहीं बना पर्चा, इमरजेंसी वार्ड हो गया फुल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ दरिंदगी और हत्या के विरोध में दूसरे दिन बुधवार को मेडिकल कॉलेज में आंदोलन की लौ धीमी नहीं पड़ी। रेजीडेंट डॉक्टर और इंटर्न कामकाज छोड़ हड़ताल पर रहे। ओपेक चिकित्सालय कैली पर धरना-प्रदर्शन भी हुआ। इस दौरान ओपीडी सेवाएं ठप रहीं। मरीजों का पर्चा नहीं बन पाया। ऐसे में 35 बेड का इमरजेंसी वार्ड फुल हो गया है। मरीज और तीमारदार इधर-उधर भटकते रहे। हालांकि, दोपहर दो बजे के बाद डॉक्टर काम पर लौट आए।
मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर और इंटर्न सुबह करीब नौ बजे अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए। दरिंदों को सजा दो एवं जस्टिस फाॅर वोमेन डॉक्टर लिखा हुआ पोस्टर हाथ में लहराते हुए देर तक नारेबाजी करते रहे। इसके बाद आंदोलनरत चिकित्सक धरने पर बैठ गए। डॉक्टरों की हड़ताल से मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य व्यवस्था दो दिन से बेपटरी हो गई है। ओपीडी सेवा बिल्कुल ठप है।
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दूर-दराज से आए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई मरीज जानकारी के अभाव में ओपीडी के बाहर डॉक्टरों के आने का इंतजार करते रहे। बाद में उन्हें निराश लौटना पड़ा। परिसर में कई मरीज अपने पुराने पर्चे के साथ डॉक्टर से मिलने के लिए भटकते नजर आए। यहां प्रतिदिन एक से डेढ़ हजार मरीज पहुंचते हैं। ज्यादातर भार ओपीडी ही संभालता है। लेकिन, हड़ताल की वजह से इन मरीजों को उचित परामर्श नहीं मिल पा रहा है।
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ओपीडी सेवाएं ठप होने से लोग इमरजेंसी में भर्ती होने के लिए जुगाड़ लगाते तीमारदार नजर आए। इसके लिए कई लोगों ने सीएमएस और जनप्रतिनिधियों से संपर्क भी साधा। बावजूद इसके डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो सके। इमरजेंसी के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्चा बनवाने के लिए मरीजों की भीड़ लगी रही है। 35 बेड की इमरजेंसी फुल हो गई है। यहां एक बेड दो-दो मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।
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मरीजों ने बताई समस्या
ओपीडी के बाहर मौजूद डुमरियागंज से आई सरिता ने बताया की पेट दर्द से वह परेशान है। हड़ताल की वजह से कोई डॉक्टर नहीं मिला। कप्तानगंज से आए आशू ने बताया कि पेट दर्द की शिकायत थी। मेडिसन विभाग बंद है। अब दूसरे अस्पताल में जाएंगे। लालगंज की सुनीता कमर दर्द से पीड़ित हैं। हड़ताल की वजह से उन्हें भी निराश लौटना पड़ा। ओझागंज के कृष्ण कुमार ने बताया कि मानसिक विभाग में परामर्श के लिए आए थे। लेकिन, डॉक्टर नहीं मिले।
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चिकित्सकों ने प्रधानाचार्य से मांगी सुरक्षा, सौंपा ज्ञापन
डॉ. रजत पांडेय, डॉ. श्याम गुप्ता, डॉ. राहुल गुप्ता, डॉ. सौरभजीत, डॉ. अजीत मौर्या, डॉ. आर्य मान सिंह, डॉ. अंजली पांंडेय, डाॅ. श्वेता श्रीवास्तव आदि ने मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को आठ सूत्री ज्ञापन सौंपकर सुरक्षा की मांग की। कहा कि प्रत्येक वार्ड में डॉक्टरों के लिए एक अलग चिकित्सक कक्ष की व्यवस्था की जाए, ताकि रात्रि कालीन ड्यूटी में असुविधा न हो। अस्पताल परिसर और निकासी द्वार पर सीसीटीवी कैमरे और गार्ड की व्यवस्था की जाए। इंटर्न और रेजीडेंट डॉक्टरों के लिए परिसर में हॉस्टल की सुविधा की जाए। महिला डॉक्टर और इंटर्न की रात्रि कालीन ड्यूटी के समय आने-जाने के लिए वाहन और महिला गार्ड की सुविधाएं दी जाएं। इसके अलावा छात्रावास एवं अतिथि परिसर में रोशनी की व्यवस्था, पार्किंग स्थल चिह्नित हो और पानी का इंतजाम किया जाए। छात्रावास में नियमित सफाई और परिसर में पुलिस बूथ स्थापित कराया जाए।
जिला और महिला अस्पताल पर बढ़ा मरीजों का भार
मेडिकल कॉलेज में हड़ताल होने से जिला अस्पताल और महिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। जिला अस्पताल में बुधवार को अधिकांश चिकित्सकों के कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी लाइन देखी गई। यहां दिन में एक बजेे तक 500 से अधिक मरीजों का पर्चा बन चुका था। वहीं महिला अस्पताल में भी महिला मरीजों की संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा रही। 12 बजे तक ढाई सौ मरीज पहुंच चुके थे। इस वजह से चिकित्सकों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।