{"_id":"6a271c218a4c01ae7308c329","slug":"doctor-in-a-hurryconsults-20-patients-in-10-minutes-basti-news-c-207-1-bst1005-160188-2026-06-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: जल्दबाजी में चिकित्सक...10 मिनट में 20 मरीजों को परामर्श","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: जल्दबाजी में चिकित्सक...10 मिनट में 20 मरीजों को परामर्श
विज्ञापन
जिला अस्पताल के ओपीडी के बाहर चिकित्सीय परामर्श के लिए परेशान मरीज संवाद
बस्ती। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। सोमवार को ओपीडी में 1005 मरीजों ने पर्चे बनवाए। पर्चे बनवाने, ओपीडी में जांच और दवा लेने के लिए काउंटर पर घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ा।
वहीं ओपीडी में देरी से आए चिकित्सक जल्दबाजी में दिखे। वह मरीजों का दूर से ही हाल पूछ कर सीधे पर्चे पर दवा लिख रहे थे। हाल ये था कि 10 मिनट में 20 मरीजों को परामर्श दे दिया। कई मरीज आधार के झमेले से परेशान होकर लौट गए।
जिला अस्पताल के चिकित्सकों की मनमानी लगातार बढ़ रही है। सोमवार सुबह आठ बजे तक डॉक्टरों के ड्यूटी नहीं शुरू हुई। इस समय तक कई चिकित्सक अस्पताल ही नहीं पहुंचे थे, जबकि नियमानुसार चिकित्सकों को ओपीडी के पहले अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को देखना होता है। इसके बाद 9 से 2 बजे तक ओपीडी करनी है।
विज्ञापन
फिलहाल अस्पताल के चिकित्सक नियमों को ताक पर रख ओपीडी में ही एक घंटे देरी से पहुंच रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण अंचलों से आए मरीजों को पर्चा बनवाने के बाद चिकित्सकों का इंतजार करना पड़ रहा है। जब तक चिकित्सक आते हैं, लाइन लंबी हो जाती है। ऐसे में परामर्श लेकर जांच कराने और फिर रिपोर्ट लेकर आए उससे पहले ही चिकित्सक चले जाते हैं।
ऐसे में दूसरे दिन मरीजों को आना पड़ रहा, पता चला कि उस दिन चिकित्सक बदल गए। फिर उन्हें रिपोर्ट दिखाकर दवा लिखवानी पड़ रही है। यह प्रक्रिया पूरी करने में दो से तीन दिन बीत जा रहे, तब जाकर दवा नसीब हो रही है।
मरीजों का कहना है कि जांच में इतना झमेला है कि उपचार मिलना कठिन हो गया है। आधार कार्ड की अनिवार्यता इसमें और सांसत बढ़ा दी है। जिनके पास आधार मौके पर नहीं है, वह पर्चे तक नहीं बनवा पा रहा है। दवा काउंटर पर भी कतार होने से अक्सर दवा लेने में परेशानी होती है। यहां अप्रशिक्षित ही दवा बांटते इससे उल्टा-सीधा दवा दे देते हैं। यह भी नहीं बताया जाता है कि कैसे दवा का सेवन करना है।
दोबारा दवा खाने संबंधी जानकारी के लिए चिकित्सक के पास जाना पड़ता है। ऐसे में सुबह से शाम हो जाता है, इसी प्रक्रिया से गुजरते हुए। इसमें खाली पेट आने वाले मरीजों के सामने संकट रहता है। मेडिसिन विभाग, बाल रोग विभाग, आर्थो सर्जन कक्ष और नेत्र समेत त्वचा रोग विभाग में यह संकट अधिक दिखा।
दूर से ही मरीजों हाल पूछ लेते हैं चिकित्सक : सोमवार को ओपीडी का आलम यह था कि सुबह करीब साढ़े आठ बजे से मरीजों की भीड़ उमड़ी दिखी। पहले पर्चा काउंटर पर भीड़ दिखी, उसके बाद डॉक्टरों के कक्ष के बाहर मरीजों की कतार लगने लगी थीं।
कई विभाग में एक घंटे देरी से कक्ष में आए चिकित्सकों ने कतार में लगे मरीजों की नब्ज देखा न आला लगाया, दूर से क्या परेशानी है, पूछकर पर्चे पर दवा लिख दी। जांच नहीं लिखी गई तो ठीक नहीं तो उनके कई बाहरी सहायक दवा लिखी पर्ची तत्काल थमा देते हैं।
विज्ञापन
वहीं ओपीडी में देरी से आए चिकित्सक जल्दबाजी में दिखे। वह मरीजों का दूर से ही हाल पूछ कर सीधे पर्चे पर दवा लिख रहे थे। हाल ये था कि 10 मिनट में 20 मरीजों को परामर्श दे दिया। कई मरीज आधार के झमेले से परेशान होकर लौट गए।
विज्ञापन
जिला अस्पताल के चिकित्सकों की मनमानी लगातार बढ़ रही है। सोमवार सुबह आठ बजे तक डॉक्टरों के ड्यूटी नहीं शुरू हुई। इस समय तक कई चिकित्सक अस्पताल ही नहीं पहुंचे थे, जबकि नियमानुसार चिकित्सकों को ओपीडी के पहले अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को देखना होता है। इसके बाद 9 से 2 बजे तक ओपीडी करनी है।
विज्ञापन
फिलहाल अस्पताल के चिकित्सक नियमों को ताक पर रख ओपीडी में ही एक घंटे देरी से पहुंच रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण अंचलों से आए मरीजों को पर्चा बनवाने के बाद चिकित्सकों का इंतजार करना पड़ रहा है। जब तक चिकित्सक आते हैं, लाइन लंबी हो जाती है। ऐसे में परामर्श लेकर जांच कराने और फिर रिपोर्ट लेकर आए उससे पहले ही चिकित्सक चले जाते हैं।
ऐसे में दूसरे दिन मरीजों को आना पड़ रहा, पता चला कि उस दिन चिकित्सक बदल गए। फिर उन्हें रिपोर्ट दिखाकर दवा लिखवानी पड़ रही है। यह प्रक्रिया पूरी करने में दो से तीन दिन बीत जा रहे, तब जाकर दवा नसीब हो रही है।
मरीजों का कहना है कि जांच में इतना झमेला है कि उपचार मिलना कठिन हो गया है। आधार कार्ड की अनिवार्यता इसमें और सांसत बढ़ा दी है। जिनके पास आधार मौके पर नहीं है, वह पर्चे तक नहीं बनवा पा रहा है। दवा काउंटर पर भी कतार होने से अक्सर दवा लेने में परेशानी होती है। यहां अप्रशिक्षित ही दवा बांटते इससे उल्टा-सीधा दवा दे देते हैं। यह भी नहीं बताया जाता है कि कैसे दवा का सेवन करना है।
दोबारा दवा खाने संबंधी जानकारी के लिए चिकित्सक के पास जाना पड़ता है। ऐसे में सुबह से शाम हो जाता है, इसी प्रक्रिया से गुजरते हुए। इसमें खाली पेट आने वाले मरीजों के सामने संकट रहता है। मेडिसिन विभाग, बाल रोग विभाग, आर्थो सर्जन कक्ष और नेत्र समेत त्वचा रोग विभाग में यह संकट अधिक दिखा।
दूर से ही मरीजों हाल पूछ लेते हैं चिकित्सक : सोमवार को ओपीडी का आलम यह था कि सुबह करीब साढ़े आठ बजे से मरीजों की भीड़ उमड़ी दिखी। पहले पर्चा काउंटर पर भीड़ दिखी, उसके बाद डॉक्टरों के कक्ष के बाहर मरीजों की कतार लगने लगी थीं।
कई विभाग में एक घंटे देरी से कक्ष में आए चिकित्सकों ने कतार में लगे मरीजों की नब्ज देखा न आला लगाया, दूर से क्या परेशानी है, पूछकर पर्चे पर दवा लिख दी। जांच नहीं लिखी गई तो ठीक नहीं तो उनके कई बाहरी सहायक दवा लिखी पर्ची तत्काल थमा देते हैं।