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Basti News: गोतस्करी के नेटवर्क की डायरी तैयार, पुलिस के निशाने पर गोहत्या के अड्डे

Tue, 19 May 2026 12:35 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2026 12:35 AM IST
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Diary of cow smuggling network prepared, cow slaughter centres under police scanner
बस्ती। जिले में गोवंश तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने पूरी योजना तैयार की है। बस्ती समेत आसपास के गोंडा, संतकबीरनगर और आंबेडकरनगर जनपद के तस्कर पुलिस के रडार पर है। एक दिन पहले परशुपरामपुर थाने में गिरफ्तार पशुतस्करों के गिरोह से पुलिस को अहम सुराग भी मिले हैं। पुलिस ने तस्करों के नेटवर्क की पूरी डायरी तैयार की है। गोवंश की तस्करी बस्ती से बिहार प्रांत तक होती है। बस्ती एवं आसपास के जिलों में भी गोहत्या के कुछ खास अड्डे हैं। वहां गोवंश का वध करके मांस का पैकेट कैरियर के जरिये खपत वाली आबादी में पहुंचा दिया जाता है।
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शहर के गांधीनगर क्षेत्र में भी गोहत्या का अड्डा पुलिस के संज्ञान में आया है। गोतस्कर पकड़े जाने के बाद गोहत्या के संभावित ठिकाने को लेकर पुलिस सक्रिय हो गई है। इसके अलावा जिले के अन्य हिस्सों में भी चोरी छिपे गोहत्या के ठिकानों का पता चला है। गोतस्करों के नेटवर्क से जुड़े इन अड्डों पर गाेमांस की खपत के अनुसार पशुओं की हत्या की जाती है। इसके बाद कैरियर के जरिये गोमांस का पैकेट बनाकर खपत वाली आबादी में इसकी आपूर्ति कर दी जाती है।
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एक दिन पहले पकड़े गए गिरोह में बस्ती के अलावा गोंडा और संतकबीरनगर जिले के भी पशु तस्कर पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। यह गिरोह बस्ती समेत तीनों जिलों से छुट्टा एवं चोरी के गोवंश की तस्करी करके मांग के हिसाब स्थानीय गोहत्या ठिकानों पर पहुंचाता है। शेष गोवंश को बिहार प्रांत में बध के लिए भेज दिया जाता है। इन तस्करों के क्षेत्रवार एजेंट भी सक्रिय है। यह लोग रात में छुट्टा एवं चोरी के गोवंश किसी सुनसान बगीचे या नदियों के किनारे लाकर बांध देते हैं। इसके बाद पशु तस्करों की इसकी जानकारी दी जाती है। रात के अंधेरे में पिकअप लेकर पशु तस्कर इन पशुओं को एकत्र कर निर्धारित ठिकानों तक पहुंचाने का काम करते हैं।
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सद्दाम को काफी दिन से तलाश रही थी पुलिस
गोतस्करों के गिरोह में मुठभेड़ के दौरान पकड़ा गया संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र का मोहम्मदपुर कछार निवासी सद्दाम काफी शातिर किस्म का बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार पिछले साल 13 फरवरी 2025 को लालगंज थाना क्षेत्र के महादेवा कस्बे में रात करीब तीन बजे तत्कालीन एसओजी प्रभारी चंद्रकांत पांडेय समेत पुलिस टीम वाहनों की चेकिंग कर रही है। इसी बीच पशुओं से लदी पिकअप दिखाई पड़ी। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो तस्करों ने पशुओं से भरी पिकअप पुलिस टीम पर चढ़ाने का प्रयास किया। इसमें तत्कालीन एसओजी प्रभारी घायल भी हो गए थे। बाद पशुओं से लदी पिकअप छोड़कर तस्कर फरार हो गए थे। पुलिस की जांच फरार तस्कर के रूप में सद्दाम का नाम ही सामने आया था, तभी से सद्दाम पुलिस के निशाने पर था।
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संपर्क मार्गों के सहारे करते हैं तस्करी
पशु तस्कर आधी रात के बाद जब सन्नाटा होता हैं तो ग्रामीण अंचल के संपर्क मार्गों के सहारे पशु तस्करी का खेल करते हैं। गोवंश की तस्करी में ज्यादातर पिकअप या छोटा हाथी का इस्तेमाल किया जाता है। लोकल एजेंट इस गिरोह से फोन पर जुड़े रहकर पशु एकत्र करने की जानकारी देते हैं। इसके बाद तस्कर गाड़ी लेकर उस सुनसान जगह पर पहुंचते हैं वहां गोवंश पहले से एकत्र रहते हैं। उन्हें लादने के बाद संपर्क मार्गों के जरिये बस्ती-बांसी मार्ग या लखनऊ-गोरखपुर हाईवे पकड़कर इन्हें जनपद सीमा पार कर दिया जाता है। गोवंश एकत्र करने वाले एजेंटों को प्रति पशु चार से पांच हजार रुपये मिलता है।
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मुठभेड़ में पकड़ा गया आठ पशु तस्करों का गिरोह
परशुरामपुर पुलिस ने दो दिन पहले शनिवार की रात 11:26 बजे पचौरी बाग में घेराबंदी करके राकेश यादव, राम अवतार यादव निवासी गढ़ी, थाना नवाबगंज, जनपद गोंडा, सहबान उर्फ छोटू निवासी मंझारी, थाना हरैया, बस्ती, आयुष प्रताप सिंह निवासी डिगरापुर, थाना कलवारी, बस्ती, सहजाद हुसैन निवासी केवड़ी मुस्तहकम, थाना दुबौलिया, बस्ती, मुरली सोनकर निवासी चौबेपुर सेमरियांवा, थाना परसरामपुर, बस्ती, असलम निवासी खमहरिया सुजात डुहरिया, थाना हर्रैया को चार गोवंश के साथ पकड़ लिया था। इस बीच पुलिस को चकमा देकर सद्दाम निवासी मोहम्मदपुर कछार, थाना खलीलाबाद जनपद संतकबीरनगर फिर फरार हो गया था। वह पुलिस को तीन घंटे तक छकाया। आखिर में मुठभेड़ के दौरान नकटवा पुल सहरिया गांव के पास से उसे गिरफ्तार किया गया है।

कोट
पशु तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने के लिए पुलिस मुस्तैदी से काम कर रही है। एक दिन पहले बड़ा गिरोह पकड़ में आया है। इसके अलावा गोहत्या के संभावित ठिकानों पर भी पुलिस की नजर हैं। अभी और सफलता मिलने की उम्मीद है।
-श्यामकांत, एएसपी।
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