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दीपक हत्याकांड : बुलेट के शाकर के रॉड से की गई थी दीपक चौरसिया की हत्या
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कन्थुई गांव में युवक की हत्या होने पर हत्यारोपी के घर जाँच करती पुलिस
सल्टौआ। सोनहा थानाक्षेत्र के कंथुई निवासी दीपक चौरसिया उर्फ रामजी की हत्या की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है, मगर स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इतनी निर्ममता से हत्या किए जाने के पीछे की असली कहानी क्या है। हालांकि पुलिस यह पता लगाने में कामयाब हो गई है कि बुलेट के शाॅकर में लगने वाले रॉड से यह हत्या की गई थी। उसके सिर के पीछे उसी रॉड के प्रहार का निशान पाया गया। जिससे उसके सिर की हड्डी भीतर की तरफ चकनाचूर हो गई थी। पुलिस ने मृतक की नामजद चाची के कमरे से खून से सना वह रॉड बरामद कर लिया। उसमें लगे खून और दीवार पर पड़े खून के छींटों का नमूना भी लिया गया।
सोमवार को स्वाट, एसओजी व सर्विलांस की टीमों ने घटना स्थल पर पहुंचकर पूरे घर की जांच की। इस दौरान मृतक दीपक चौरसिया की सगी चाची लालमती की निशानदेही पर रॉड बरामद किया। पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। उनसे लंबी पूछताछ की जा रही है।
बता दें कि कंथुई निवासी राम शंकर चौरसिया के बड़े बेटे दीपक चौरसिया उर्फ रामजी का रविवार को तड़के बिस्तर पर लहूलुहान शव पाया गया था। शनिवार रात को रोज की तरह वह बरामदे के एक किनारे स्थित अपने कमरे में सोया था। वह रोज चार बजे गांव के लड़कों के साथ दौड़ लगाने के लिए निकल जाता था। राम शंकर के मुताबिक रविवार को जब वह नहीं गया तो साथ जाने वाले लड़के फोन करने लगे। फोन भी नहीं रिसीव हुआ तो करीब सवा चार बजे गांव के अंदर रहने वाला उनका चचेरा भाई श्याम सुंदर बिस्तर के पास जगाने पहुंचा। उसने दीपक को बिस्तर पर लहूलुहान पड़ा देखा। इसके बाद उसने परिवार के अन्य लोगों को जानकारी दी।
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सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दीपक को सीएचसी ले गई,जहां डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
बाद में पिता राम शंकर चौरसिया ने अपने भाई उमाशंकर उर्फ बबलू , भयहू लालमती के अलावा उमाशंकर की पान की दुकान पर काम करने वाले राम कृपाल चौधरी निवासी देईपार थाना वाल्टरगंज और उसी के टाटा मैजिक के ड्राइवर हजरत अली निवासी पचमोहनी के खिलाफ नामजद तहरीर दी।
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लालमती पर पहले से सवार था खून
भतीजे की हत्या में नामजद चाची लालमती के सिर पर पहले से मानो खून सवार था। उसने अपने पति उमाशंकर उर्फ बबलू से पहले ही बता दिया था कि मैं किसी न किसी को मार दूंगी। घर में पहले से उसने पुरानी उमाशंकर की बुलेट से निकलवाए गए शॉकर के रॉड को संभाल कर रख लिया था। पुलिस के मुताबिक उसने पति से रात में बताया कि उसका सिरदर्द हो रहा है। जिस पर पति ने दवा दिया। लालमती दवा खाकर सो गई थी। उसके मन में न जाने कौन की खुन्नस थी कि वह दीपक की बहन पूजा को भी मारने की बात कर रही थी। 17 वर्ष पूर्व उमाशंकर उर्फ बबलू की शादी सिद्धार्थनगर जनपद के कठमोरावा गांव में हुई थी। बताया जाता है कि जब से वह घर में आई थी तभी से अनबन रहने लगी थी। उसी की वजह से दोनों भाई अलग अलग रहने लगे थे।
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सबसे ज्यादा पूजा को सदमा
दीपक उर्फ रामजी की हत्या का वैसे तो उसके पूरे परिवार को झकझोर दिया है लेकिन सबसे ज्यादा सदमा उसकी बहन पूजा को लगा है। भाई की निर्मम हत्या से वह टूट सी गई है। उसने बताया कि मां की मौत के बाद मेरा भाई ही मेरा सब कुछ था। मुझे मेरी मां जैसा ही प्यार दुलार करते थे। किसी भी समान की मुझे जरूरत होती थी तो तुरंत मिलता था। मेरे भाई के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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सोमवार को स्वाट, एसओजी व सर्विलांस की टीमों ने घटना स्थल पर पहुंचकर पूरे घर की जांच की। इस दौरान मृतक दीपक चौरसिया की सगी चाची लालमती की निशानदेही पर रॉड बरामद किया। पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। उनसे लंबी पूछताछ की जा रही है।
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बता दें कि कंथुई निवासी राम शंकर चौरसिया के बड़े बेटे दीपक चौरसिया उर्फ रामजी का रविवार को तड़के बिस्तर पर लहूलुहान शव पाया गया था। शनिवार रात को रोज की तरह वह बरामदे के एक किनारे स्थित अपने कमरे में सोया था। वह रोज चार बजे गांव के लड़कों के साथ दौड़ लगाने के लिए निकल जाता था। राम शंकर के मुताबिक रविवार को जब वह नहीं गया तो साथ जाने वाले लड़के फोन करने लगे। फोन भी नहीं रिसीव हुआ तो करीब सवा चार बजे गांव के अंदर रहने वाला उनका चचेरा भाई श्याम सुंदर बिस्तर के पास जगाने पहुंचा। उसने दीपक को बिस्तर पर लहूलुहान पड़ा देखा। इसके बाद उसने परिवार के अन्य लोगों को जानकारी दी।
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सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दीपक को सीएचसी ले गई,जहां डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
बाद में पिता राम शंकर चौरसिया ने अपने भाई उमाशंकर उर्फ बबलू , भयहू लालमती के अलावा उमाशंकर की पान की दुकान पर काम करने वाले राम कृपाल चौधरी निवासी देईपार थाना वाल्टरगंज और उसी के टाटा मैजिक के ड्राइवर हजरत अली निवासी पचमोहनी के खिलाफ नामजद तहरीर दी।
लालमती पर पहले से सवार था खून
भतीजे की हत्या में नामजद चाची लालमती के सिर पर पहले से मानो खून सवार था। उसने अपने पति उमाशंकर उर्फ बबलू से पहले ही बता दिया था कि मैं किसी न किसी को मार दूंगी। घर में पहले से उसने पुरानी उमाशंकर की बुलेट से निकलवाए गए शॉकर के रॉड को संभाल कर रख लिया था। पुलिस के मुताबिक उसने पति से रात में बताया कि उसका सिरदर्द हो रहा है। जिस पर पति ने दवा दिया। लालमती दवा खाकर सो गई थी। उसके मन में न जाने कौन की खुन्नस थी कि वह दीपक की बहन पूजा को भी मारने की बात कर रही थी। 17 वर्ष पूर्व उमाशंकर उर्फ बबलू की शादी सिद्धार्थनगर जनपद के कठमोरावा गांव में हुई थी। बताया जाता है कि जब से वह घर में आई थी तभी से अनबन रहने लगी थी। उसी की वजह से दोनों भाई अलग अलग रहने लगे थे।
सबसे ज्यादा पूजा को सदमा
दीपक उर्फ रामजी की हत्या का वैसे तो उसके पूरे परिवार को झकझोर दिया है लेकिन सबसे ज्यादा सदमा उसकी बहन पूजा को लगा है। भाई की निर्मम हत्या से वह टूट सी गई है। उसने बताया कि मां की मौत के बाद मेरा भाई ही मेरा सब कुछ था। मुझे मेरी मां जैसा ही प्यार दुलार करते थे। किसी भी समान की मुझे जरूरत होती थी तो तुरंत मिलता था। मेरे भाई के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।