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सचिवों के हड़ताल के कारण समितियों नहीं मिल मिल रही डीएपी
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सचिवों की हड़ताल के कारण समितियों को नहीं मिल रही डीएपी
- अन्य समितियों से भी नहीं कराया जा रहा वितरण
- भंडारण में पड़ी है 72 हजार बोरी डीएपी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। साधन सहकारी समितियों के सचिव हड़ताल पर हैं। जिससे जिले में डीएपी वितरण की व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। आजकल रबी फसलों की बुवाई चल रही है और किसान डीएपी के लिए भटक रहे हैं। वहीं, सब कुछ जानकर जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं।
जिले में करीब 107 साधन सहकारी समितियां हैं। इनमें करीब 97 समितियां किसानों को फुटकर उर्वरक उपलब्ध कराती हैं। सचिवों की हड़ताल के कारण यहां से उर्वरक की बिक्री बंद है। जबकि दलहन, तिलहन और गेहूं की फसलों की बुवाई चल रही है। ऐसे में शासन के निर्देशानुसार जिले में स्थित करीब 26 निजी समितियों, 35 आईएफएफडीसी, 22 एग्री जंक्शन, 40 डीसीएफ, 55 क्रय-विक्रय समितियों व 10 केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडारों के सहारे उर्वरक की फुटकर बिक्री की जानी है। फिर भी इन बिक्री केंद्रों पर डीएपी की आपूर्ति नहीं की जा रही है। ऐसे में किसानों को डीएपी खरीदने में दिक्कतें आ रही हैं। जबकि भंडारण में करीब 72000 बोरी डीएपी पड़ी है। वहीं, सल्टौआ ब्लॉक के गोविंदपुर निवासी किसान राम बहादुर चौधरी ने बताया कि तीन दिन से डीएपी ढूंढ रहे हैं लेकिन पूरे क्षेत्र में कहीं नहीं मिल रही है। जिला कृषि अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि एआर को-ऑपरेटिव को अन्य समितियों पर डीएपी भेजने के लिए कहा गया है। एआर को-ऑपरेटिव प्रेमचंद्र प्रजापति ने बताया कि अन्य वितरण केंद्रों को उर्वरक भेजना शुरू कर दिया गया है।
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- अन्य समितियों से भी नहीं कराया जा रहा वितरण
- भंडारण में पड़ी है 72 हजार बोरी डीएपी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। साधन सहकारी समितियों के सचिव हड़ताल पर हैं। जिससे जिले में डीएपी वितरण की व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है। आजकल रबी फसलों की बुवाई चल रही है और किसान डीएपी के लिए भटक रहे हैं। वहीं, सब कुछ जानकर जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं।
जिले में करीब 107 साधन सहकारी समितियां हैं। इनमें करीब 97 समितियां किसानों को फुटकर उर्वरक उपलब्ध कराती हैं। सचिवों की हड़ताल के कारण यहां से उर्वरक की बिक्री बंद है। जबकि दलहन, तिलहन और गेहूं की फसलों की बुवाई चल रही है। ऐसे में शासन के निर्देशानुसार जिले में स्थित करीब 26 निजी समितियों, 35 आईएफएफडीसी, 22 एग्री जंक्शन, 40 डीसीएफ, 55 क्रय-विक्रय समितियों व 10 केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडारों के सहारे उर्वरक की फुटकर बिक्री की जानी है। फिर भी इन बिक्री केंद्रों पर डीएपी की आपूर्ति नहीं की जा रही है। ऐसे में किसानों को डीएपी खरीदने में दिक्कतें आ रही हैं। जबकि भंडारण में करीब 72000 बोरी डीएपी पड़ी है। वहीं, सल्टौआ ब्लॉक के गोविंदपुर निवासी किसान राम बहादुर चौधरी ने बताया कि तीन दिन से डीएपी ढूंढ रहे हैं लेकिन पूरे क्षेत्र में कहीं नहीं मिल रही है। जिला कृषि अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि एआर को-ऑपरेटिव को अन्य समितियों पर डीएपी भेजने के लिए कहा गया है। एआर को-ऑपरेटिव प्रेमचंद्र प्रजापति ने बताया कि अन्य वितरण केंद्रों को उर्वरक भेजना शुरू कर दिया गया है।
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