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Basti News: कुआनो नदी के वजूद पर संकट, जलकुंभी व शैवाल ने रोकी धारा
Sat, 01 Jun 2024 02:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 01 Jun 2024 02:13 AM IST
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- बहाव कम होने से पट गई जलीय वनस्पतियां
- जिले में करीब 50 किलोमीटर है नदी का बहाव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली कुआनो नदी का वजूद संकट में है। गंदे नाले और कचरे ने पहले ही जलीय जंतुओं को खत्म कर दिया है। अब जलकुंभी, शैवाल जैसी जलीय वनस्पतियां इस नदी का अस्तित्व मिटाने में अहम भूमिका निभा रही है। अतिक्रमण के अलावा पानी का दुश्मन कही जाने वाली जलकुंभी इस वक्त वजूद खत्म करने पर अमादा है।
बहराइच जिले के बसऊपुर में एक नाले के रूप में बहने वाला जल स्रोत बलरामपुर जिले में पहुंचते-पहुंचते नदी का रूप ले लेता है। पूरब दिशा में बढ़ते ही बस्ती में कुआनो नदी बन जाती है। जिले में प्रवाह 50 किलोमीटर का है। इसमें 30 किलोमीटर खुला क्षेत्र है जबकि 20 किलोमीटर वन क्षेत्र के तहत आता है। जिले में लालगंज में मनोरमा नदी में इसका संगम हो जाता है। इस नदी का रहस्य जमीन के अंदर से निकलने वाले हजारों छोटे-छोटे जलस्रोत हैं, जो नदी में के रूप में बहने के लिए जल देते हैं। रहस्य यही कि नदी का कोई उद्गमस्थल नहीं है। फिर भी इस नदी से जनभावनाएं जुड़ीं हैं।
हाल के कुछ वर्षों में देखा जा रहा है कि गर्मी के सीजन में जल स्तर घटने पर नदी में जलकुंभी जमा हो जाती है। जिसके कारण नदी का बहाव अत्यंत कम हो जाता है। बहाव कम होने से जलीय वनस्पतियां जकड़ ले रही हैं। लोगों का कहना है कि यही हालात रहे तो एक दिन इस नदी का वजूद ही मिट जाएगा। जन भावनाओं के कारण अमहट घाट पर भव्य कुआनो आरती का आयोजन होने लगा है। पिछले वर्ष नगरपालिका के प्रस्ताव पर पूर्व की सरकार ने करीब सात करोड़ का प्रस्ताव स्वीकृत किया था। इस धनराशि से कुआनो नदी के अमहट घाट का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। कुआनो को बचाने और इसे प्रदूषण मुक्त करने की चित्रांश क्लब, हिन्दू युवा वाहिनी समेत कई संगठनों ने कुआनो बचाओ आंदोलन के जरिए लंबी लड़ाई लड़ी लेकिन नतीजा शून्य रहा। नदी के किनारों पर अतिक्रमण कर खेती भी की जा रही है।
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घटता जा रहा दायरा, पटती जा रही नदी
टिनिच। कुआनो नदी में सिल्ट जमा होने से नदी, नाले के रूप में तब्दील हो रही है। बस्ती जनपद की जीवन रेखा कही जाने वाली इस नदी का उद्गम बहराइच जनपद के बसऊपुर गांव के निकट से है। यह बलरामपुर, बस्ती, संतकबीरनगर होते हुए गोरखपुर में राप्ती नदी में मिलती है। इस नदी के किनारे पर्यटन व तीर्थ स्थल बाराह छत्तर, भदेश्वर नाथ महादेवा शिव मन्दिर सहित दर्जनों स्थल है। विभिन्न पर्व पर लोग इस नदी में स्नान कर पिण्डदान भी करते हैं।
नदी के आसपास बसे लोगों के मवेशियों व जंगली जानवरों के पानी पीने का प्रमुख साधन है। लेकिन महादेवा, चौरा, बारह छत्तर व गटरा पुल के पास सिल्ट जमा होने से नदी नाले के रूप में आ गई है। जिससे इस समय नदी का व्यास लगभग 30 फिट ही रह गया है, जबकि अमूमन लगभग 300 फिट से अधिक चौड़ाई में इसका पाट है। अजगैवा जंगल के 80 वर्षीय परमात्मा प्रसाद त्रिपाठी कहते हैं कि जबसे हमें होश आया है तब से अब तक नदी का पाट इतना कम कभी नहीं हुआ। नदी के किनारे बसे खलवा बजहिया निवासी अशोक कुमार कहते हैं कि हम लोग बचपन से इसी नदी में रोज स्नान करते आ रहे हैं। नदी में सिल्ट जमा हो गई। चौड़ाई कम हो गई तो बहाव ज्यादा होना था मगर पानी का वेग भी कम हो रहा है। क्षेत्र के रामदीन शुक्ल, राम सागर निषाद, राधेश्याम यादव, अमित सिंह, सत्यप्रकाश सिंह, भारत चौधरी ने नदी की सफाई कराने की मांग की है।
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- जिले में करीब 50 किलोमीटर है नदी का बहाव
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली कुआनो नदी का वजूद संकट में है। गंदे नाले और कचरे ने पहले ही जलीय जंतुओं को खत्म कर दिया है। अब जलकुंभी, शैवाल जैसी जलीय वनस्पतियां इस नदी का अस्तित्व मिटाने में अहम भूमिका निभा रही है। अतिक्रमण के अलावा पानी का दुश्मन कही जाने वाली जलकुंभी इस वक्त वजूद खत्म करने पर अमादा है।
बहराइच जिले के बसऊपुर में एक नाले के रूप में बहने वाला जल स्रोत बलरामपुर जिले में पहुंचते-पहुंचते नदी का रूप ले लेता है। पूरब दिशा में बढ़ते ही बस्ती में कुआनो नदी बन जाती है। जिले में प्रवाह 50 किलोमीटर का है। इसमें 30 किलोमीटर खुला क्षेत्र है जबकि 20 किलोमीटर वन क्षेत्र के तहत आता है। जिले में लालगंज में मनोरमा नदी में इसका संगम हो जाता है। इस नदी का रहस्य जमीन के अंदर से निकलने वाले हजारों छोटे-छोटे जलस्रोत हैं, जो नदी में के रूप में बहने के लिए जल देते हैं। रहस्य यही कि नदी का कोई उद्गमस्थल नहीं है। फिर भी इस नदी से जनभावनाएं जुड़ीं हैं।
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हाल के कुछ वर्षों में देखा जा रहा है कि गर्मी के सीजन में जल स्तर घटने पर नदी में जलकुंभी जमा हो जाती है। जिसके कारण नदी का बहाव अत्यंत कम हो जाता है। बहाव कम होने से जलीय वनस्पतियां जकड़ ले रही हैं। लोगों का कहना है कि यही हालात रहे तो एक दिन इस नदी का वजूद ही मिट जाएगा। जन भावनाओं के कारण अमहट घाट पर भव्य कुआनो आरती का आयोजन होने लगा है। पिछले वर्ष नगरपालिका के प्रस्ताव पर पूर्व की सरकार ने करीब सात करोड़ का प्रस्ताव स्वीकृत किया था। इस धनराशि से कुआनो नदी के अमहट घाट का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। कुआनो को बचाने और इसे प्रदूषण मुक्त करने की चित्रांश क्लब, हिन्दू युवा वाहिनी समेत कई संगठनों ने कुआनो बचाओ आंदोलन के जरिए लंबी लड़ाई लड़ी लेकिन नतीजा शून्य रहा। नदी के किनारों पर अतिक्रमण कर खेती भी की जा रही है।
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घटता जा रहा दायरा, पटती जा रही नदी
टिनिच। कुआनो नदी में सिल्ट जमा होने से नदी, नाले के रूप में तब्दील हो रही है। बस्ती जनपद की जीवन रेखा कही जाने वाली इस नदी का उद्गम बहराइच जनपद के बसऊपुर गांव के निकट से है। यह बलरामपुर, बस्ती, संतकबीरनगर होते हुए गोरखपुर में राप्ती नदी में मिलती है। इस नदी के किनारे पर्यटन व तीर्थ स्थल बाराह छत्तर, भदेश्वर नाथ महादेवा शिव मन्दिर सहित दर्जनों स्थल है। विभिन्न पर्व पर लोग इस नदी में स्नान कर पिण्डदान भी करते हैं।
नदी के आसपास बसे लोगों के मवेशियों व जंगली जानवरों के पानी पीने का प्रमुख साधन है। लेकिन महादेवा, चौरा, बारह छत्तर व गटरा पुल के पास सिल्ट जमा होने से नदी नाले के रूप में आ गई है। जिससे इस समय नदी का व्यास लगभग 30 फिट ही रह गया है, जबकि अमूमन लगभग 300 फिट से अधिक चौड़ाई में इसका पाट है। अजगैवा जंगल के 80 वर्षीय परमात्मा प्रसाद त्रिपाठी कहते हैं कि जबसे हमें होश आया है तब से अब तक नदी का पाट इतना कम कभी नहीं हुआ। नदी के किनारे बसे खलवा बजहिया निवासी अशोक कुमार कहते हैं कि हम लोग बचपन से इसी नदी में रोज स्नान करते आ रहे हैं। नदी में सिल्ट जमा हो गई। चौड़ाई कम हो गई तो बहाव ज्यादा होना था मगर पानी का वेग भी कम हो रहा है। क्षेत्र के रामदीन शुक्ल, राम सागर निषाद, राधेश्याम यादव, अमित सिंह, सत्यप्रकाश सिंह, भारत चौधरी ने नदी की सफाई कराने की मांग की है।